बैराबी-सैरांग रेलवे लाइन: मिजोरम में रेल कनेक्टिविटी के एक साल पूरे
पूर्वोत्तर में रेल नेटवर्क के विस्तार से मिजोरम में लॉजिस्टिक्स लागत घटी, पर्यटन में 86% बढ़ोतरी और व्यापार को गति मिली।

तस्वीर में मिजोरम की हरी पहाड़ियों के बीच बना ऊंचा रेलवे ब्रिज दिख रहा है।
13 सितंबर 2025 को प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 51.38 किलोमीटर लंबी बैराबी-सैरांग रेलवे लाइन और सैरांग रेलवे स्टेशन का उद्घाटन किया था। मिजोरम में रेल कनेक्टिविटी की शुरुआत के एक साल के भीतर यह लाइन महज रेलवे नेटवर्क का हिस्सा नहीं रही, बल्कि बेहतर यात्री आवागमन, बाजारों तक पहुंच, पर्यटन, माल ढुलाई और नए आर्थिक अवसरों का माध्यम बन गई है।
पीढ़ियों से मिजोरम के दुर्गम इलाकों में लंबी दूरी की आवाजाही मुख्य रूप से सड़कों पर निर्भर रही। इससे यात्राएं समय लेने वाली, असुविधाजनक और कई बार अविश्वसनीय होती थीं। बैराबी-सैरांग नई रेलवे लाइन के संचालन के बाद स्थिति में बदलाव आया है। यह रेल लाइन मिजोरम की खड़ी पहाड़ियों और गहरी घाटियों से होकर गुजरती है और इंजीनियरिंग की बड़ी उपलब्धि के रूप में सामने आई है।
इस परियोजना में कुल 153 पुल हैं, जिनमें 55 बड़े पुल, 88 छोटे पुल और 10 रोड ओवर ब्रिज/रोड अंडर ब्रिज शामिल हैं। छह पुल 70 मीटर से अधिक ऊंचे हैं। इनमें सबसे ऊंचा पुल 114 मीटर ऊंचा है, जो दिल्ली के कुतुब मीनार से 42 मीटर ऊंचा है। रेल लाइन करीब 16 किलोमीटर लंबी 45 सुरंगों से भी होकर गुजरती है। यह रेल कॉरिडोर बैराबी से आगे राष्ट्रीय रेलवे नेटवर्क को चार नए स्टेशनों होर्टोकी, कानपुई, मुआलखांग और अंत में सैरांग रेलवे स्टेशन से जोड़ता है। इसके साथ मिजोरम की राजधानी आइजोल की दहलीज तक रेल कनेक्टिविटी पूरी हो गई है।
13 सितंबर 2025 को बैराबी-सैरांग रेलवे लाइन के उद्घाटन के साथ मिजोरम के लोगों का लंबे समय से देखा गया सपना पूरा हुआ। राज्य की आबादी, प्रशासन, शिक्षा और व्यापार के सबसे बड़े केंद्र के करीब भरोसेमंद रेलवे यात्री और माल ढुलाई सेवाएं पहुंचीं।
एक साल के भीतर यात्री सेवाओं ने भी लोगों के भरोसे को आंकड़ों में दर्ज किया है। तीन महत्वपूर्ण लंबी दूरी की ट्रेन सेवाएं अब मिजोरम की राजधानी को गुवाहाटी, कोलकाता और दिल्ली से जोड़ती हैं। सैरांग-आनंद विहार राजधानी एक्सप्रेस ने मिजोरम को राष्ट्रीय राजधानी से पहला सीधा प्रीमियम रेलवे कनेक्शन दिया। वहीं गुवाहाटी और कोलकाता की ट्रेन सेवाओं ने देश के पूर्वी और उत्तरी हिस्सों के प्रमुख शैक्षिक, वाणिज्यिक और चिकित्सा केंद्रों के साथ भरोसेमंद संपर्क बनाया है।
इसके अलावा, सैरांग-सिलचर यात्री ट्रेन सेवा का उद्घाटन जनवरी 2026 में केंद्रीय रेल मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने किया। इस सेवा ने सैरांग को असम की बराक घाटी से जोड़ने वाली नियमित और भरोसेमंद यात्री ट्रेन सेवा उपलब्ध कराई।
पिछले एक साल में इन ट्रेन सेवाओं ने 1100 से अधिक यात्राएं पूरी की हैं। इन सेवाओं को 15 लाख से अधिक यात्रियों का समर्थन मिला है और वे मिजोरम के लोगों की जिंदगी का जरूरी हिस्सा बन गई हैं। यात्रियों की भारी मांग के कारण सभी ट्रेनें प्रत्येक यात्रा में 100 प्रतिशत से अधिक क्षमता के साथ संचालित हो रही हैं।
सैरांग से कोलकाता के लिए सप्ताह में तीन दिन चलने वाली ट्रेन सेवा में औसत ऑक्यूपेंसी 140 प्रतिशत से अधिक रही है। सैरांग से गुवाहाटी की दैनिक ट्रेन सेवा में ऑक्यूपेंसी लगातार 110 प्रतिशत से अधिक रही। इसी तरह सैरांग-आनंद विहार राजधानी एक्सप्रेस में भी औसत ऑक्यूपेंसी 145 प्रतिशत से अधिक रही है। इन ट्रेन सेवाओं से भारतीय रेलवे को कुल 54 करोड़ रुपये की टिकट बिक्री हुई है।
पिछले एक साल में सैरांग रेलवे स्टेशन पर 5.54 लाख से अधिक यात्रियों की आवाजाही दर्ज हुई है। स्टेशन पर प्रतिदिन औसतन 3300 यात्री आते हैं। सैरांग रेलवे स्टेशन यात्री आवागमन के महत्वपूर्ण केंद्र के साथ आसपास के क्षेत्र की सामुदायिक जिंदगी का भी हिस्सा बन गया है। स्थानीय लोग स्टेशन परिसर के आसपास पेड़-पौधे लगाने और अन्य पर्यावरणीय गतिविधियों में भी हिस्सा ले रहे हैं।
बैराबी-सैरांग रेलवे लाइन ने मिजोरम में माल परिवहन को भी बदल दिया है। आवश्यक वस्तुओं, ऑटोमोबाइल और निर्माण सामग्री समेत विभिन्न सामान को सुरक्षित, समयबद्ध और लागत प्रभावी तरीके से आइजोल तक पहुंचाने में रेलवे सक्षम हुआ है।
नई लाइन के उद्घाटन के ठीक एक दिन बाद 14 सितंबर 2025 को पहली रेलवे मालगाड़ी गुवाहाटी के पास टेटेलिया स्थित स्टार सीमेंट साइडिंग से 26000 से अधिक बैग सीमेंट की खेप लेकर सैरांग पहुंची। इस मालगाड़ी का असर आइजोल में सीमेंट की कीमतों पर तत्काल दिखाई दिया। इससे यह स्पष्ट हुआ कि रेलवे रसद लागत को काफी कम करने और पूरे क्षेत्र के आर्थिक विकास में योगदान देने में सक्षम है।
सीधी मालगाड़ी सेवाओं ने ऑटोमोबाइल की खरीद में मौजूद अंतर को भी खत्म किया है। इससे लैंडिंग लागत कम हुई और अंतिम उपभोक्ताओं के लिए कीमतें अधिक अनुकूल हुईं। दिसंबर 2025 में गुवाहाटी के पास चांगसारी से 119 मारुति कारों वाली पहली ऑटोमोबाइल खेप रेल मार्ग से सैरांग पहुंची। यह क्षेत्र में ऑटोमोबाइल लॉजिस्टिक्स के बदलाव की उल्लेखनीय उपलब्धि रही।
पिछले एक साल में सैरांग में 2500 से अधिक रेलवे माल वैगन डिलीवर किए गए हैं। इनमें करीब 70 प्रतिशत कार्गो सीमेंट, पत्थर और रेत जैसी निर्माण सामग्री का था। इन सामग्रियों ने मिजोरम में आवास और सार्वजनिक कार्यों में मदद की। इससे राज्य में कम लागत पर बुनियादी ढांचा विकास को बढ़ावा मिला और सामग्री को गंतव्य तक पहुंचाने में लगने वाला समय भी कम हुआ।
सैरांग पहुंचने वाले अन्य रेलवे कार्गो में चावल और उर्वरक जैसी आवश्यक वस्तुओं के साथ ऑटोमोबाइल के 156 वैगन शामिल हैं। ऑटोमोबाइल रेक ने वाहनों के लिए सुरक्षित और अधिक क्षमता वाला आपूर्ति मार्ग बनाया। वहीं उर्वरक और अनाज ने राज्य में खेती तथा स्थानीय पीडीएस वितरण में मदद की। इस तरह बड़ी मात्रा में माल की लंबी दूरी की सड़क ढुलाई की जगह अधिक प्रभावी रेलवे परिवहन ने ली है।
रेलवे कनेक्टिविटी ने मिजोरम में शिक्षा और पर्यटन के अवसरों को भी बढ़ाया है। दिल्ली, कोलकाता, गुवाहाटी और सिलचर से सीधी ट्रेनों ने घरेलू यात्रियों के लिए मिजोरम पहुंचना आसान बनाया है। रेलवे ने उन यात्रियों के लिए कम लागत वाला प्रवेश मार्ग उपलब्ध कराया, जो पहले पूरी तरह हवाई यात्रा या लंबी सड़क यात्राओं पर निर्भर थे। रेलवे शुरू होने के बाद से मिजोरम में पर्यटन में कुल मिलाकर 86 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी हुई है।
अधिक पर्यटकों की आवाजाही का असर होटल, होमस्टे, रेस्टोरेंट, टैक्सी, गाइड, सांस्कृतिक उद्यम और स्थानीय बाजारों पर भी पड़ा है। भरोसेमंद रेल संपर्क से मिजोरम की शैक्षिक, खेल, सांस्कृतिक और आधिकारिक गतिविधियों को राष्ट्रीय स्तर पर अधिक भागीदारी के साथ आयोजित करने की क्षमता मजबूत हुई है।
मिजोरम के विद्यार्थियों के लिए भी रेलवे कनेक्टिविटी ने राज्य से बाहर विश्वविद्यालयों, व्यावसायिक संस्थानों, कोचिंग सेंटरों, परीक्षाओं और शैक्षणिक कार्यक्रमों तक पहुंच आसान बनाई है।
रेलवे मिजोरम के हथकरघा, बांस, बेंत और हस्तशिल्प की परंपराओं को बड़े बाजारों तक पहुंचाने में भी मदद कर रहा है। सैरांग से पहला पार्सल कंसाइनमेंट 19 सितंबर 2025 को बुक किया गया था। इसमें सैरांग-आनंद विहार राजधानी एक्सप्रेस की पार्सल वैन से एंथुरियम के फूल दिल्ली भेजे गए थे। इस छोटे कंसाइनमेंट ने यह रास्ता खोला कि मिजोरम के भीतर से ही उच्च मूल्य वाले स्थानीय उत्पाद अपनी राष्ट्रीय बाजार यात्रा शुरू कर सकते हैं।
एक साल में बैराबी-सैरांग रेलवे लाइन ने यात्रियों, छात्रों, पर्यटकों, व्यापारियों और स्थानीय उत्पादकों के लिए नए रास्ते खोले हैं। यात्रियों को बड़े शहरों तक सीधी पहुंच मिली है, छात्रों के लिए संस्थानों और परीक्षाओं तक पहुंच के अधिक व्यावहारिक विकल्प बने हैं, पर्यटकों के लिए कम लागत वाला प्रवेश मार्ग उपलब्ध हुआ है और व्यापारियों को थोक माल की आवाजाही में सुविधा मिली है। निर्माण सामग्री और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति अधिक क्षमता के साथ आगे बढ़ी है, जबकि फूल, हस्तशिल्प और अन्य स्थानीय उत्पादों के लिए देशभर के ग्राहकों तक पहुंच का रास्ता बना है।
सैरांग का महत्व इस बदलाव में दिखाई देता है कि कठिन पहाड़ियों के बीच बनी रेलवे लाइन ने दूरी कम करने के साथ विकल्प बढ़ाए और मिजोरम को नई लॉजिस्टिक्स पहचान दी। बैराबी-सैरांग रेल संपर्क ने यात्री आवागमन, बुनियादी ढांचे, व्यापार, पर्यटन और स्थानीय उत्पादों के लिए ऐसे अवसरों का विस्तार किया है, जिनका असर इसके संचालन के पहले ही वर्ष में आंकड़ों और गतिविधियों के रूप में सामने आया है।

