बाबा उमाकान्त जी महाराज का जयपुर सत्संग: पंचदेवों की नाराजगी से आएंगी आपदाएं
जयपुर के ठिकरिया आश्रम में उमड़ा जनसैलाब, बाबा उमाकान्त जी महाराज ने मांसाहार त्यागने और जयगुरुदेव नाम सुमिरन से रक्षा का बताया मार्ग।

आध्यात्मिक जगत की प्रख्यात विभूति और परम सन्त बाबा जयगुरुदेव जी महाराज के आध्यात्मिक उत्तराधिकारी परम सन्त बाबा उमाकान्त जी महाराज ने वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों और मानवीय आचरण पर गहरा क्षोभ व्यक्त करते हुए मानवता को सचेत किया है। रविवार, 5 अप्रैल 2026 को जयपुर के अजमेर रोड स्थित ठिकरिया टोल के समीप बाबा उमाकान्त जी महाराज आश्रम में आयोजित विशाल सत्संग समारोह के दौरान उन्होंने स्पष्ट उद्घोष किया कि भविष्य में ऐसा समय आ रहा है जब घोर नास्तिक व्यक्ति को भी मात्र एक मिनट के भीतर भगवान की याद आ जाएगी। गुलाबी वस्त्रों में सजे हजारों अनुयायियों की उपस्थिति में महाराज जी ने कहा कि मानवीय क्रूरता और प्रकृति के साथ हो रहे खिलवाड़ के कारण पांचों देवता इस समय अत्यधिक नाराज हैं, जिसके परिणामस्वरूप विश्व को भिन्न-भिन्न प्रकार की भीषण आपदाओं का सामना करना पड़ेगा।
सत्संग की अमृत वर्षा करते हुए बाबा उमाकान्त जी महाराज ने समाज में बढ़ती निर्दयता का मुख्य कारण दूषित खान-पान और मांसाहार को बताया। उन्होंने कहा कि जब मनुष्य मांसाहार और तामसिक भोजन का सेवन करता है, तो उसके भीतर से दया का भाव समाप्त हो जाता है। दया धर्म का मूल आधार है और इसके अभाव में मनुष्य के कर्म दूषित हो जाते हैं, जिसका दंड मिलना निश्चित है। उन्होंने आगाह किया कि खराब कर्मों के रहते तीर्थाटन और व्रत-उपवास भी निष्फल हो जाते हैं, अतः जीवों पर दया करना ही एकमात्र मार्ग है। प्रकृति की नाराजगी का वैज्ञानिक और आध्यात्मिक विश्लेषण करते हुए उन्होंने कहा कि बारूद और हथियारों के परीक्षण से पवन देवता, भूमि के भीतर सात-सात सौ फुट गहरे असलाह दबाने से धरती माता और वनों व जीवों को झुलसाने से अग्नि देवता कुपित हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि धरती का दोहन केवल अन्न उत्पादन के लिए होना चाहिए, अन्यथा यह आपदाओं का निमंत्रण है।
पश्चिम एशिया में गहराते युद्ध के बादलों पर चिंता व्यक्त करते हुए महाराज जी ने कहा कि युद्ध किसी भी समस्या का समाधान नहीं है। उन्होंने विश्व की महाशक्तियों से आह्वान किया कि वे हथियार बनाना बंद कर एक मंच पर आएं और शांति गोष्ठी का आयोजन करें। महाराज जी ने सुझाव दिया कि बड़े राष्ट्रों को छोटे व विकासशील देशों को गोद लेकर उनका सर्वांगीण विकास करना चाहिए, जिससे वास्तविक यश की प्राप्ति होगी। उन्होंने संकट काल से रक्षा का सूत्र देते हुए बताया कि बाबा जयगुरुदेव जी महाराज द्वारा जागृत 'जय गुरु देव' नाम ही इस समय बचत का एकमात्र उपाय है। जो लोग इस नाम का सुमिरन करेंगे और दया के मार्ग पर चलेंगे, वे आने वाली आफत से सुरक्षित रहेंगे।
आश्रम प्रबंधन द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, आगामी सत्संग एवं नामदान कार्यक्रम 7 अप्रैल 2026 को सुबह 10 बजे मकराना के वेदिका फार्म, बोरावड़ रोड पर आयोजित होगा। साथ ही, प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी बाबा जयगुरुदेव जी महाराज का विशाल भंडारा 13, 14 और 15 मई 2026 को उज्जैन, मध्य प्रदेश में संपन्न होगा, जहां श्रद्धालुओं को गुरु महाराज के भंडारे का दिव्य प्रसाद प्राप्त होगा।

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