जयपुर गुरु पूर्णिमा कार्यक्रम में बाबा उमाकांत जी महाराज का संदेश, गौ हत्या कानून की मांग
जयपुर गुरु पूर्णिमा कार्यक्रम में बाबा उमाकांत जी महाराज ने गौ हत्या कानून, नशामुक्ति और सनातन धर्म को लेकर महत्वपूर्ण संदेश दिया।

तस्वीर में बाबा उमाकांत जी महाराज जयपुर ठिकरिया स्थित जयगुरुदेव आश्रम में पत्रकारों को संबोधित करते हुए दिखाई दे रहे हैं।
जयपुर ठिकरिया स्थित जयगुरुदेव आश्रम में चल रहे तीन दिवसीय आध्यात्मिक गुरु पूर्णिमा कार्यक्रम में बाबा उमाकांत जी महाराज ने पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए मानव जीवन, आध्यात्मिक साधना, नशामुक्ति, गौ रक्षा और सनातन धर्म को लेकर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि जीवात्मा को मुक्ति मोक्ष दिलाना ही वास्तविक सनातन धर्म है।
बाबा उमाकांत जी महाराज ने कहा कि दुनिया बनाने वाले ने मानव शरीर को जल, अग्नि, पृथ्वी, वायु और आकाश से तैयार कराया तथा मनुष्य को एक अवसर दिया कि वह अपने उद्देश्य को पूरा करे। उन्होंने कहा कि जीवात्मा मां के पेट में रहते हुए प्रभु से प्रार्थना करती है कि उसे ठीक आंख, नाक, कान और शरीर देकर बाहर निकाला जाए। इसके बाद मनुष्य को समर्थ गुरु की तलाश कर उनके बताए मार्ग पर चलकर भवसागर से पार होने का प्रयास करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि जहां मनुष्य रहता है, कमाता है, खाता है, जन्म लेता है और मृत्यु को प्राप्त होता है, वही भवसागर है। इससे निकलना कठिन हो रहा है क्योंकि लोगों को सही मार्ग नहीं मिल रहा है। महात्माओं का साथ और सतसंग नहीं मिलने से खानपान, चालचलन और विचारों में गिरावट आ रही है। उन्होंने कहा कि मानवता और ईश्वरवादिता कम होती जा रही है तथा लोग वास्तविक मानव धर्म और सनातन धर्म से दूर हो रहे हैं।
महाराज जी ने कहा कि जब कर्म खराब हो जाते हैं तो धर्म नहीं रहता और धर्म का ह्रास होने पर परेशानियां आना स्वाभाविक है। उन्होंने कहा कि आज घर-घर में बीमारी, लड़ाई-झगड़ा, ईर्ष्या, वैमनस्यता और द्वेष बढ़ता जा रहा है। देश की स्थिति भी खराब होती जा रही है। जिन युवाओं से देश को आगे बढ़ाने, डॉक्टर, वैज्ञानिक बनने और देश की रक्षा करने की उम्मीद है, उनमें से कई नशे की गिरफ्त में हैं।
उन्होंने कहा कि यदि नशे की बढ़ती प्रवृत्ति पर रोक नहीं लगाई गई और वैचारिक क्रांति के माध्यम से परिवर्तन नहीं लाया गया तो आने वाला समय गंभीर हो सकता है। उन्होंने पत्रकारों का उल्लेख करते हुए कहा कि शराब के नशे में मां, बहन, बेटी के साथ गलत काम करने, चोरी, डकैती और देश के खिलाफ काम करने जैसी घटनाएं सामने आती हैं। उन्होंने लोगों से खानपान, विचार, भावना और चरित्र को सही करने की अपील की।
बाबा उमाकांत जी महाराज ने कहा कि जिस उद्देश्य के लिए मनुष्य शरीर मिला है, उसे पूरा करने के लिए शरीर को चलाने वाली आत्मा को परमात्मा तक पहुंचाना और परमात्मा की शक्ति को अपने अंदर लाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि जैसे राम के आने से राम नाम में शक्ति बढ़ी और कृष्ण के आने से कृष्ण नाम में शक्ति बढ़ी, उसी प्रकार वर्तमान समय के जयगुरुदेव नाम में शक्ति है, जिसे गुरु महाराज ने बताया था। उन्होंने कहा कि जयगुरुदेव नाम धूनी का सुबह-शाम जाप करने से कई लोग लाभ उठाते हैं और विश्वास बनने के बाद सतसंग की बातों को अपनाने से भौतिक और आध्यात्मिक दोनों लाभ मिलने लगते हैं।
उन्होंने लोगों से आत्महित और जनहित के कार्यों में सहयोग करने की अपील की।
युवाओं को आध्यात्मिक मार्ग से जोड़ने के सवाल पर बाबा उमाकांत जी महाराज ने कहा कि छोटे बच्चे जब गलत संगत में पड़ जाते हैं तो बिगड़ जाते हैं, लेकिन अच्छी संगत मिलने पर सुधर जाते हैं और साधना करने लगते हैं। उन्होंने कहा कि अच्छी संगत मिलने से बच्चों में अच्छे संस्कार आते हैं और उनके अंदर राम-कृष्ण की शक्ति आ जाती है। उन्होंने कहा कि बच्चियां जब अच्छी बच्चियों के साथ रहती हैं और संस्कार ग्रहण करती हैं तो उनमें सती और सावित्री जैसी ताकत आती है।
उन्होंने कहा कि पहले लोग सतसंग में जाते थे, इसलिए समाज में इतनी अव्यवस्था नहीं थी। राजा भी राजगुरु से सलाह लेते थे और समय पर सर्दी, बरसात तथा गर्मी का क्रम बना रहता था।
गौ रक्षा को लेकर चल रहे अभियान पर जानकारी देते हुए बाबा उमाकांत जी महाराज ने कहा कि गाय को राष्ट्रीय पशु बनाने के लिए उनका संकल्प गुरु महाराज के साथ जुड़ा हुआ है। उन्होंने बताया कि उन्होंने संकल्प लिया था कि हर की पौड़ी पर तभी स्नान करेंगे जब गौ माता का कटना बंद होगा। उन्होंने कहा कि इस विषय पर ध्यान नहीं दिया गया और कुछ लोग हिंसा करने लगे।
उन्होंने कहा कि अब उनकी मुहिम लोगों को आध्यात्मिक बनाने की है। जब लोगों के अंदर आध्यात्मिक शक्ति आएगी तो वे बुद्धिजीवी और गौ प्रेमी बनकर गौ की रक्षा करना चाहेंगे। उन्होंने कहा कि देश के सभी धार्मिक, सामाजिक, राजनैतिक, पत्रकार और बुद्धिजीवी लोगों को गृह मंत्री, प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति से कहना चाहिए कि देश में गौ हत्या बंद करने का कानून बनाया जाए।
भारत के भविष्य को लेकर उन्होंने कहा कि समय खराब है और आगे भी खराब होता जा रहा है। उन्होंने कहावत "विनाशकाले विपरीत बुद्धि" का उल्लेख करते हुए कहा कि खानपान का असर होता है और यही क्रोध लाने की जड़ है। यदि इस जड़ को खत्म कर दिया जाए तो क्रोध और अहंकार समाप्त हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि काम, क्रोध, लोभ, मोह और अहंकार मनुष्य को परेशान कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि जो लोग चिंता में रहते हैं और देश तथा लोगों की रक्षा करना चाहते हैं, उन्हें सबसे पहले भारत के लोगों के अंदर सुधार लाने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि लोगों के अंदर सद्बुद्धि आएगी तो उसका प्रभाव दूसरों पर भी पड़ेगा। उन्होंने कहा कि वह विनाश नहीं चाहते, लेकिन आने वाली परेशानियों को रोकने के लिए साधना शिविर और नामधूनी शिविर लगाए जा रहे हैं, जिनके माध्यम से लोगों को शाकाहारी और नशामुक्त बनाया जा रहा है।
सनातन धर्म की व्याख्या करते हुए बाबा उमाकांत जी महाराज ने कहा कि सनातन धर्म में कई शाखाएं हैं, लेकिन वास्तविक रूप से मनुष्य शरीर को चलाने वाली जीवात्मा को नरकों से बचाना और उसे मुक्ति मोक्ष दिलाना ही सनातन धर्म है।
कार्यक्रम के दौरान बाबा उमाकांत जी महाराज ने देशवासियों से शाकाहारी, सदाचारी, नशामुक्त, चरित्रवान और ईश्वरवादी बनने का संदेश दिया। गुरु पूर्णिमा कार्यक्रम में दिए गए उनके संदेश में आध्यात्मिक जीवन, सामाजिक सुधार, नशामुक्ति और गौ रक्षा जैसे विषय प्रमुख रहे।

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