केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने 16 अगस्त 2026 को राजस्थान के चित्तौड़गढ़ में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जी की पुण्यतिथि पर उनकी 21 फुट ऊंची प्रतिमा का अनावरण किया। डेढ़ करोड़ रुपये से अधिक की लागत से स्थापित इस प्रतिमा के अनावरण के साथ उन्होंने राजस्थान सरकार के विभिन्न विकास कार्यों का लोकार्पण एवं शिलान्यास भी किया। कार्यक्रम में राजस्थान के मुख्यमंत्री श्री भजन लाल शर्मा सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

श्री अमित शाह ने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी जी की पुण्यतिथि के अवसर पर इस पवित्र भूमि पर उनकी 21 फुट ऊंची प्रतिमा स्थापित की गई है। उन्होंने बताया कि आज 15 जिलों में 5755 करोड़ रुपये के 944 विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमि पूजन हुआ।

स्वतंत्रता दिवस के संदर्भ में श्री शाह ने कहा कि 80वें स्वतंत्रता दिवस पर देशभर में भव्य आयोजन हुए, लेकिन इस बार एक बड़ा परिवर्तन देखने को मिला। आजादी के 80 साल बाद लाल किले की प्राचीर और देशभर में आयोजित स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रमों में पहली बार ‘वंदे मातरम्’ का गान हुआ। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय जी की अमर कृति के दो शब्द ‘वंदे मातरम्’ बोलकर हजारों-लाखों लोग फांसी के फंदे पर चढ़ गए, गोलियां और लाठियां खाईं तथा कई वर्षों तक जेल में रहे।

श्री अमित शाह ने आरोप लगाया कि वोट बैंक के लालच में मुख्य विपक्षी पार्टी ने ‘वंदे मातरम्’ को भुला दिया था। उन्होंने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ की रचना के 150 साल पूरे होने के अवसर पर प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने लाल किले की प्राचीर से इस अमर गान को नई आयु दी है।

उन्होंने मुख्य विपक्षी पार्टी के मुख्यालय पर आयोजित स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम का भी उल्लेख किया। श्री शाह ने कहा कि कार्यक्रम के दौरान पार्टी की प्रमुख नेता ने ‘वंदे मातरम्’ को बीच में रोकने को कहकर उसका अपमान किया। उन्होंने कहा कि 80 साल बाद बंकिम बाबू के अमर मंत्र और अमर गान को फिर से सम्मान प्राप्त होना विपक्ष को रास नहीं आ रहा है। श्री शाह ने विपक्षी पार्टी की प्रमुख नेता से कहा कि देश की 140 करोड़ जनता उन्हें देख रही है और उनके द्वारा किया गया यह पाप देश की जनता कभी माफ नहीं करेगी। उन्होंने सवाल किया कि कोई सपने में भी कैसे सोच सकता है कि ‘वंदे मातरम्’ का गान अधूरा छोड़ दिया जाए।

अटल बिहारी वाजपेयी जी के जीवन और राजनीतिक योगदान का उल्लेख करते हुए श्री शाह ने कहा कि अटल जी बाल्यकाल से ही राष्ट्रभक्ति के पथ पर चले। वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक बने, जनसंघ के कार्यकर्ता बने और सिर्फ 33 साल की आयु में बलरामपुर से सांसद चुने गए। उन्होंने कहा कि अटल जी चार दशक तक विपक्ष में रहे, लेकिन उनका विचार राष्ट्रभक्ति और राष्ट्र प्रथम का रहा तथा इसी विचार के आधार पर उनका जीवन चला। वे जेल गए, लाठियां खाईं और सत्तारूढ़ पार्टी के अत्याचार भी सहे, लेकिन कभी सिद्धांत नहीं छोड़ा।

श्री अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री बनने पर अटल बिहारी वाजपेयी जी ऐसे पहले प्रधानमंत्री थे जो कभी मुख्य विपक्षी पार्टी के सदस्य नहीं रहे थे। उन्होंने कहा कि अटल जी ने प्रधानमंत्री रहते कई बड़े फैसले किए। पूरे विश्व के दबाव के सामने बिना झुके भारत को परमाणु शक्ति बनाने का काम किया। हर गांव को सड़क से जोड़ने का काम किया और स्वर्णिम चतुर्भुज योजना के माध्यम से राष्ट्रीय राजमार्गों का निर्माण कराया।

उन्होंने कहा कि अटल जी ने अपने छह साल के अल्प कार्यकाल में सबसे बड़ा काम जनजातीय कार्य मंत्रालय की स्थापना का किया। अटल जी से पहले देश की जनजातियों के लिए कोई अलग मंत्रालय नहीं था। उन्होंने पहली बार जनजातीय कार्य मंत्रालय गठित किया। श्री शाह ने कहा कि इसका परिणाम है कि आज एक गरीब आदिवासी परिवार की बेटी महामहिम श्रीमती द्रौपदी मुर्मू राष्ट्रपति के रूप में राष्ट्रपति भवन को शोभायमान कर रही हैं।

केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने हमेशा आदिवासी कल्याण को आगे बढ़ाया। अनुसूचित जनजाति कंपोनेंट का बजट पहले मात्र 25,000 करोड़ रुपये था, जिसे बढ़ाकर 1,25,000 करोड़ रुपये तक किया गया। भगवान बिरसा मुंडा के जन्मदिन को ‘जनजातीय गौरव दिवस’ के रूप में मनाने की शुरुआत हुई। छत्तीसगढ़, ओडिशा और अरुणाचल प्रदेश में आदिवासी मुख्यमंत्री बनाए गए। 10 आदिवासी स्वतंत्रता सेनानियों के संग्रहालय बनाए गए और 722 एकलव्य विद्यापीठ खोले गए, जिसकी शुरुआत अटल जी ने की थी।

श्री शाह ने कहा कि अटल जी पत्रकार बने तो कलम से राष्ट्रवाद को आगे बढ़ाया, कवि बने तो शब्दों से राष्ट्रभक्ति को आगे बढ़ाया और प्रधानमंत्री बने तो राष्ट्र की सुरक्षा तथा सुशासन को आगे बढ़ाया। उन्होंने कहा कि अटल जी ने न सत्ता में रहते सिद्धांत छोड़ा और न विपक्ष में रहते सिद्धांत छोड़ा। ऐसे विरले नेता कभी-कभार ही जन्म लेते हैं। इसी कारण अटल जी को हमेशा ‘अजातशत्रु’ के तौर पर जाना जाता है।

राजस्थान में हर घर नल के जल की योजना का उल्लेख करते हुए श्री अमित शाह ने कहा कि जब प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने राजस्थान में यह योजना शुरू की थी, तब राज्य के सिर्फ 11 लाख घरों में पानी पहुंच रहा था। उन्होंने कहा कि जिस राजस्थान में माताएं-बहनें सिर पर तीन-तीन मटकियां लेकर कोसों दूर से पानी लाती थीं, वहां मुख्य विपक्षी पार्टी ने 70 साल में 11 लाख घरों तक पानी पहुंचाया, जबकि मोदी जी ने 64 लाख घरों तक पानी पहुंचाने का काम किया। उन्होंने कहा कि विपक्षी पार्टी ने जो काम 70 साल में किया, उससे छह गुना काम मोदी जी ने आठ साल में किया है और यही मोदी जी की विशेषता है।

श्री अमित शाह ने कहा कि राजस्थान की भजन लाल शर्मा सरकार ने अपने वादे पूरे करने की दिशा में काफी तेजी से काम किए हैं। उन्होंने कहा कि राजस्थान को पानी की कमी के लिए जाना जाता था, लेकिन भजन लाल जी ने तीन बड़े समझौते करके आधे राजस्थान की प्यास बुझाने का काम किया है। इन योजनाओं से करोड़ों लोगों की प्यास बुझाने का काम किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि ‘राइजिंग राजस्थान’ कार्यक्रम में 35 लाख करोड़ रुपये का निवेश आया है। 36 नई पॉलिसी बनाई गई हैं। रोजगार मेलों में 1,78,000 नौकरियां दी गई हैं और 450 रुपये से भी कम में गैस सिलिंडर देने का काम किया गया है। अब तक 1 हजार 128 करोड़ रुपये की गैस सिलिंडर सब्सिडी दी गई है।

श्री शाह ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा दिए जाने वाले 5 लाख रुपये तक के मुफ्त इलाज की सुविधा में बढ़ोतरी करके भजन लाल सरकार ने 45 लाख लोगों को प्रधानमंत्री-मुख्यमंत्री आयुष आरोग्य योजना का लाभ दिया है। इसके अलावा लाडो प्रोत्साहन योजना दी गई है और पूरे राजस्थान को हरियाली से परिपूर्ण करने का अभियान चलाया गया है।

केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने राजस्थान की विपक्षी राजनीति पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि राजस्थान में विपक्ष के प्रमुख नेता आपस में लड़ते रहते हैं, जबकि उनकी पार्टी के नेता जनता से मिले आशीर्वाद का मान रखते हुए जनता की सेवा करते हैं। उन्होंने कहा कि नरेन्द्र मोदी जी और भजन लाल शर्मा जी के कार्यकाल में राजस्थान बहुत आगे बढ़ने वाला है।

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