नई दिल्ली: केंद्रीय रेलवे, सूचना एवं प्रसारण और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने आज बजट वेबिनार श्रृंखला के दूसरे सत्र को संबोधित किया। "आर्थिक विकास को बनाए रखना और मजबूत करना: अवसंरचना, रसद और माल ढुलाई" विषय पर आधारित इस वेबिनार में उन्होंने स्पष्ट किया कि रेलवे परियोजनाओं की बहुआयामी जटिलता को देखते हुए कार्यान्वयन में डोमेन विशेषज्ञता और क्षेत्र-विशिष्ट अनुभव की आवश्यकता अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि अवसंरचना, रसद और माल ढुलाई में आर्थिक विकास को बनाए रखने और मजबूत करने के लिए समन्वित क्षमता विस्तार, मजबूत गुणवत्ता मानक और संविदात्मक सुधार ही वे तीन प्रमुख फोकस क्षेत्र हैं जो विवादों को कम करने और समय पर वितरण सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक हैं।

रेलवे अवसंरचना का अभूतपूर्व और समन्वित विस्तार

श्री वैष्णव ने पिछले दशक में भारत के रेलवे नेटवर्क की अभूतपूर्व वृद्धि को रेखांकित करते हुए बताया कि लगभग 35,000 किलोमीटर नई पटरियाँ जोड़ी गई हैं, जो जर्मनी के कुल रेलवे नेटवर्क से अधिक है। इसके अलावा, वर्तमान में लगभग 99% नेटवर्क का विद्युतीकरण हो चुका है। केंद्रीय मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि इस तरह के तीव्र विस्तार से एक बड़ी चुनौती खड़ी होती है, जो सरकारी विस्तार के साथ-साथ उद्योग की क्षमता और संसाधनों को बढ़ाने से जुड़ी है। उन्होंने बल देते हुए कहा कि "रेलवे विकास मूल रूप से उद्योग और सरकार की साझेदारी है। परियोजना के पैमाने में अचानक वृद्धि या कमी से उद्योग की तैयारियों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए, बुनियादी ढांचे के विस्तार के साथ-साथ कौशल विकास, पर्यवेक्षण, गुणवत्ता मानक और प्रौद्योगिकी को अपनाना भी आवश्यक है।" उन्होंने यह भी जोड़ा कि उद्योग के हितधारकों से प्राप्त सुझाव भविष्य के सुधारों को आकार देने में सहायक होंगे।

हाई-स्पीड रेल विजन और सात नए कॉरिडोर की मंजूरी

हाई-स्पीड रेल विकास पर चर्चा करते हुए श्री वैष्णव ने मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर को एक चुनौतीपूर्ण अनुभव बताया। उन्होंने रेखांकित किया कि 160 किमी प्रति घंटे से अधिक की गति से ट्रेन संचालन करने से डिजाइन और परिचालन जटिलता में अभूतपूर्व वृद्धि होती है। आईआईटी संस्थानों, उद्योग भागीदारों और रेलवे इंजीनियरों के सहयोग से भारत ने इन चुनौतियों का सफलतापूर्वक सामना किया है। इस सफलता को आगे बढ़ाते हुए केंद्रीय मंत्री ने घोषणा की कि "माननीय प्रधानमंत्री ने 4,000 किमी में फैले सात नए हाई-स्पीड यात्री कॉरिडोर को मंजूरी दे दी है।" उन्होंने जोर दिया कि इन लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए रेलवे, उद्योग, आपूर्ति श्रृंखला, उपकरण निर्माताओं, सेवा प्रदाताओं, संचालन और रखरखाव टीमों, सिग्नलिंग विशेषज्ञों, रोलिंग स्टॉक निर्माताओं और विशेष विद्युत चालकों के उत्पादकों के बीच समन्वित प्रयासों की आवश्यकता होगी। उन्होंने प्रमुख निर्माण और डिजाइन फर्मों को इन चुनौतियों पर विचार-विमर्श करने के लिए कार्यशालाओं में आमंत्रित किया।

गुणवत्ता, योग्यता और निविदा मानदंडों में सुधार

श्री वैष्णव ने योग्यता मानदंडों को सख्त करने और अत्यधिक उप-ठेकेदारी को कम करने की तत्काल आवश्यकता पर विशेष बल दिया। उनके अनुसार, "सार्वजनिक परियोजनाओं को और भी सख्त गुणवत्ता और जवाबदेही मानकों का पालन करना होगा, जिससे सरकारी धन का कुशलतापूर्वक उपयोग सुनिश्चित हो सके और विवाद कम से कम हों।" यह कदम संविदात्मक ढाँचों में सुधार और दस्तावेज़ीकरण को पारदर्शी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण होगा।

उद्योग सहयोग और अंत-विभागीय सहभागिता

बजट के बाद आयोजित इस वेबिनार के समापन पर श्री वैष्णव ने अपने विचार साझा करने वाले उद्योग जगत के पेशेवरों, विभिन्न मंत्रालयों के प्रतिभागियों, कार्यकारी एजेंसियों और हितधारकों को धन्यवाद दिया। उन्होंने विश्वास जताया कि ये सुझाव पूरे क्षेत्र में सुधारों की नींव बनेंगे। केंद्रीय मंत्री ने केंद्रीय मंत्री श्री मनोहर लाल खट्टर, श्री सरबानंदा सोनोवाल और श्री के. राम मोहन नायडू के साथ-साथ बंदरगाह, जहाजरानी एवं जलमार्ग, विद्युत और नागरिक उड्डयन मंत्रालयों के सचिवों का भी आभार व्यक्त किया। उन्होंने इस वेबिनार को प्रमुख मुद्दों पर विचार-विमर्श करने और केंद्रीय बजट घोषणाओं के अनुरूप नवीन समाधान विकसित करने का एक प्रभावी मंच बताया।

Pratahkal Newsroom

Pratahkal Newsroom

प्रातःकाल न्यूज़-रूम, प्रातःकाल न्यूज़ की वह समर्पित संपादकीय टीम है, जो सटीक, समयबद्ध और निष्पक्ष समाचार पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा न्यूज़-रूम राजनीति, समाज, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय मामलों में सत्यापित रिपोर्टिंग, गहन विश्लेषण और जिम्मेदार पत्रकारिता पर अपना ध्यान केंद्रित करता है।

Next Story