भाजपा पूर्व प्रदेशाध्यक्ष अशोक परनामी ने झारखंड में अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे छात्रों पर हुए लाठीचार्ज को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला करार दिया है। उन्होंने कांग्रेस और जेएमएम सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि झारखंड में छात्र शांतिपूर्ण, मर्यादित और अनुशासित तरीके से अपने हक की आवाज उठा रहे हैं, लेकिन उनकी मांगों को सुनने के बजाय सरकार उन्हें लाठियों से जवाब दे रही है।

परनामी ने कहा कि कोटा से लेकर प्रयागराज तक छात्रों के मुद्दों पर कांग्रेस और विपक्ष के नेता मुखर नजर आते हैं, लेकिन झारखंड में छात्रों की आवाज उन्हें क्यों सुनाई नहीं दे रही है। उन्होंने कहा कि झारखंड में कांग्रेस समर्थित सरकार होने के कारण राहुल गांधी सहित विपक्षी दलों की इतने दिनों तक चुप्पी कई सवाल खड़े करती है।

भाजपा पूर्व प्रदेशाध्यक्ष अशोक परनामी ने सवाल उठाया कि दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने वालों के लोकतांत्रिक अधिकारों की बात करने वाले राहुल गांधी का रवैया झारखंड में आंदोलन कर रहे छात्रों के मामले में अलग क्यों है। उन्होंने कहा कि एक ही लोकतांत्रिक देश में प्रदर्शनकारियों के लिए अलग-अलग मापदंड नहीं हो सकते।

परनामी ने कहा कि यदि छात्रों की मांगें जायज हैं तो सरकार को संवाद के माध्यम से समाधान निकालना चाहिए। उन्होंने कहा कि झारखंड में छात्र केवल पेपर लीक के मुद्दे को लेकर ही आंदोलनरत नहीं हैं, बल्कि परीक्षा और भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं एवं पारदर्शिता को लेकर भी गंभीर सवाल उठा रहे हैं। जब युवाओं के भविष्य से जुड़ा इतना गंभीर विषय सामने हो, तब सरकार की जिम्मेदारी उनकी बात सुनने और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने की है, न कि उनके आंदोलन को दबाने की।

उन्होंने कहा कि झारखंड के छात्र न तो किसी सुविधा या विशेष व्यवस्था की मांग कर रहे हैं और न ही उनके आंदोलन में किसी प्रकार का दिखावा है। वे अपने भविष्य और निष्पक्ष परीक्षा व्यवस्था के लिए संघर्ष कर रहे हैं। ऐसे में उनके साथ बल प्रयोग करना संवेदनहीनता की पराकाष्ठा है।

परनामी ने कहा, “पारदर्शी परीक्षा मांगी थी, बदले में लाठियां मिलीं। हक मांगने पर सरकार ने युवाओं को जवाब के रूप में जख्म दिए।” उन्होंने कहा कि यह घटना जेएमएम-कांग्रेस सरकार की विफलता और युवाओं के प्रति उसकी संवेदनहीनता को उजागर करती है।

उन्होंने मांग की कि झारखंड सरकार छात्रों की मांगों पर तत्काल संवाद करे, लाठीचार्ज की निष्पक्ष जांच कराए और परीक्षा एवं भर्ती प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाने के लिए ठोस कदम उठाए। परनामी ने कहा कि युवाओं के भविष्य से जुड़े सवालों पर राजनीति करने के बजाय सरकार को जवाबदेही तय करनी चाहिए और छात्रों को न्याय दिलाना चाहिए।

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