अरावली सुरक्षित भाजपा ने अशोक गहलोत के दावों को बताया भ्रामक, कोर्ट और विज्ञान के अनुसार तथ्य पेश
पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ ने अशोक गहलोत के “90 प्रतिशत अरावली समाप्त हो जाएगी” के दावे को भ्रामक बताया। सुप्रीम कोर्ट और वैज्ञानिक आंकड़ों के अनुसार अरावली पर्वतमाला सुरक्षित है, खनन केवल 2.56% क्षेत्र में नियंत्रित रूप से हो रहा है। केंद्र और राज्य सरकार प्रतिबद्ध हैं कि अरावली पूरी तरह संरक्षित रहे।

जयपुर, 22 दिसंबर। राजस्थान की अरावली पर्वतमाला को लेकर राजनीति और भ्रम का नया विवाद सामने आया है। पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ ने कांग्रेस अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत द्वारा यह दावा कि “90 प्रतिशत अरावली समाप्त हो जाएगी”, पूरी तरह असत्य और भ्रामक है, खारिज कर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि वास्तविक स्थिति इसके बिलकुल विपरीत है।
राजेंद्र राठौड़ के अनुसार, अरावली क्षेत्र का लगभग 25 प्रतिशत हिस्सा हिरसा अभ्यारण्य, राष्ट्रीय उद्यान और आरक्षित वनों में आता है, जहां खनन पूरी तरह प्रतिबंधित है। पूरे अरावली क्षेत्र का केवल 2.56 प्रतिशत हिस्सा सीमित, नियंत्रित और कड़े नियमों के तहत खनन के दायरे में आता है। उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि इंडियन काउंसिल ऑफ फॉरेस्ट्री रिसर्च एंड एजुकेशन द्वारा विस्तृत वैज्ञानिक मैपिंग और सस्टेनेबल माइनिंग मैनेजमेंट प्लान तैयार होने तक कोई नया खनन पट्टा जारी नहीं किया जा सकता।
राजेंद्र राठौड़ ने यह भी बताया कि 100 मीटर की ऊंचाई का मानदंड केवल ऊंचाई तक सीमित नहीं है। सुप्रीम कोर्ट की स्वीकृत परिभाषा के अनुसार 100 मीटर या उससे ऊंची पहाड़ियों, उनकी ढलानों और दो पहाड़ियों के बीच आने वाली सभी भू-आकृतियाँ खनन पट्टों से पूरी तरह बाहर हैं। यह व्यवस्था पहले से अधिक सख्त और वैज्ञानिक है।
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने 18 दिसंबर को “Save Aravalli” नामक अभियान सोशल मीडिया पर शुरू किया और अपनी प्रोफाइल पिक्चर बदली। राजेंद्र राठौड़ ने कहा कि कांग्रेस के अन्य शीर्ष नेता जैसे प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा, राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और सचिन पायलट ने इस अभियान का समर्थन नहीं किया, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह केवल राजनीतिक दिखावा है और पर्यावरण संरक्षण के वास्तविक प्रयास का प्रतिनिधित्व नहीं करता।
सर्वे ऑफ इंडिया के आंकड़ों के अनुसार, कमेटी की परिभाषा लागू होने पर अरावली क्षेत्र में खनन में कोई वृद्धि नहीं होगी, बल्कि और अधिक सख्ती आएगी। राजस्थान के राजसमंद में 98.9%, उदयपुर में 99.89%, गुजरात के साबरकांठा में 89.4% और हरियाणा के महेंद्रगढ़ में 75.07% पहाड़ी क्षेत्र खनन से प्रतिबंधित रहेगा। राष्ट्रीय उद्यान, इको-सेंसिटिव ज़ोन, रिज़र्व और प्रोटेक्टेड फ़ॉरेस्ट तथा वेटलैंड्स में खनन पूरी तरह बंद है।
वर्तमान में 37 जिलों में अरावली क्षेत्र का केवल 0.19 प्रतिशत (277.89 वर्ग किमी) हिस्सा ही कानूनी खनन पट्टों के अंतर्गत है, जिसमें लगभग 90% खनन राजस्थान में, 9% गुजरात में और 1% हरियाणा में सीमित है। केंद्रीय वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने भी स्पष्ट किया है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के अनुसार अरावली पर्वतमाला पर कोई आंच नहीं आएगी और केंद्र सरकार इसे पूरी तरह सुरक्षित रखने के लिए प्रतिबद्ध है।
राजेंद्र राठौड़ ने कहा कि अरावली के विषय पर प्रतीकात्मक राजनीति नहीं, बल्कि न्यायालय के आदेशों और वैज्ञानिक तथ्यों के अनुसार ठोस कार्रवाई की आवश्यकता है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि अरावली न पहले खतरे में थी, न आज है और न भविष्य में होगी। प्रेस वार्ता में विधायक कुलदीप धनकड़, महेन्द्र पाल मीणा और प्रदेश मीडिया प्रभारी प्रमोद वशिष्ठ उपस्थित रहे।
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Pratahkal Bureau
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