जयपुर में अंशु हर्ष की ‘प्लेटोनिक लव 2.0’ ने कविताओं और सुरों से प्रेम के आध्यात्मिक रूप को किया अभिव्यक्त
जयपुर के राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर में अंशु हर्ष की ‘प्लेटोनिक लव 2.0’ काव्य प्रस्तुति ने कविताओं, गीतों और संगीत के माध्यम से प्रेम के निःस्वार्थ, आध्यात्मिक और रूहानी स्वरूप को अभिव्यक्त किया।

जयपुर के राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित ‘प्लेटोनिक लव 2.0’ कार्यक्रम के दौरान अतिथियों का पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत करते हुए आयोजक और कवयित्री अंशु हर्ष।
जयपुर, 17 अक्टूबर। प्रेम जब किसी अपेक्षा, अधिकार और सामाजिक बंधन से परे आत्मिक अनुभूति बन जाता है, तो वह प्रार्थना और समर्पण का रूप ले लेता है। इसी भाव को कविताओं और गीतों के माध्यम से प्रस्तुत करते हुए कवयित्री एवं लेखिका अंशु हर्ष की विशेष काव्य प्रस्तुति ‘प्लेटोनिक लव 2.0’ का आयोजन राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर, जयपुर के मुख्य सभागार में किया गया। राकेश राठी प्रोडक्शंस की इस प्रस्तुति में प्रेम के शुद्ध, निःस्वार्थ, आध्यात्मिक और रूहानी स्वरूप को अभिव्यक्ति दी गई।
इस काव्य यात्रा में अंशु हर्ष ने अपनी प्रस्तुति ‘प्लेटोनिक लव’ के माध्यम से उस प्रेम को स्वर दिया, जो किसी रिश्ते की परिभाषा या सामाजिक बंधनों तक सीमित नहीं है, बल्कि आत्मा के स्तर पर अनुभव किया जाता है। कार्यक्रम में पियानो और गायन पर अमित गंधर्व तथा बांसुरी पर संदीप सोनी ने प्रस्तुति दी।
‘प्लेटोनिक लव’ की संकल्पना के पीछे भक्त शिरोमणि मीराबाई का भगवान कृष्ण के प्रति अनन्य और अलौकिक प्रेम अंशु हर्ष के लिए प्रमुख प्रेरणास्रोत रहा है। मीरा का प्रेम देह की सीमाओं से परे समर्पण, प्रतीक्षा, विश्वास और भक्ति का ऐसा भाव है, जिसे केवल शब्दों में व्यक्त नहीं किया जा सकता, बल्कि आत्मा की गहराइयों में महसूस किया जाता है।
अंशु हर्ष के लिए यह गर्व और सौभाग्य का विषय है कि जिस मेड़ता की धरती ने मीराबाई जैसी महान भक्त कवयित्री को जन्म दिया, उसी शहर की बेटी होने का गौरव उन्हें भी प्राप्त है। मीरा की प्रेम चेतना और आध्यात्मिक विरासत से प्रेरित होकर ही उनकी कविताओं में ‘प्लेटोनिक लव’ का भाव आकार लेता है।
इस काव्य यात्रा में अंशु हर्ष ने ऐसे आत्मिक लगाव को अभिव्यक्त किया, जिसे समझने का प्रयास अनेक गीतों, भावों और विचारों को जन्म देता है, लेकिन जिसकी वास्तविक अनुभूति शब्दों से परे रह जाती है। यह लगाव कभी ईश्वर के प्रति आस्था, कभी उसके दर पर दीप जलाने की भावना और कभी मीरा के कृष्ण के प्रति समर्पण के रूप में सामने आता है। यह भक्त और भगवान के बीच का संबंध हो सकता है या किसी ऐसे व्यक्ति से आत्मिक जुड़ाव, जिसकी उपस्थिति मन को सुकून देती है।
अंशु हर्ष की कविताएँ प्रेम के इसी गहरे, जटिल और संवेदनशील पक्ष को सामने लाती हैं। जीवन में पीड़ा मिलने पर मन सबसे पहले उसी व्यक्ति से अपना दर्द साझा करना चाहता है, जिससे उसका अनकहा रिश्ता जुड़ा होता है। यह संबंध आकर्षण से शुरू होकर धीरे-धीरे विश्वास, अपनत्व और आत्मिक जुड़ाव में बदल सकता है। इसमें मिलने की अनिवार्यता, संवाद की अपेक्षा या किसी प्रकार के अधिकार की शर्त नहीं होती। साथ होने पर निकटता का अहसास और दूर रहने पर भी बना रहने वाला रूहानी जुड़ाव इसकी प्रमुख विशेषता है।
‘प्लेटोनिक लव 2.0’ इसी आत्मिक रिश्ते की काव्यात्मक अभिव्यक्ति है, जिसमें प्रेम किसी स्वार्थ, अपेक्षा या बंधन से परे रहता है। कविताओं और गीतों के माध्यम से प्रस्तुत यह भाव प्रेम को केवल किसी दूसरे व्यक्ति से जुड़ी अनुभूति के रूप में नहीं, बल्कि भीतर महसूस किए जाने वाले समर्पण के रूप में सामने लाता है।
अंशु हर्ष की कविताएँ और उनकी आवाज इस भागती-दौड़ती दुनिया में ठहरने, स्वयं से जुड़ने और प्रेम को अपने भीतर आत्मसात करने का संदेश देती हैं। उनकी काव्य प्रस्तुति श्रोताओं को अपने भीतर झाँकने और उन अनकहे भावों को महसूस करने के लिए प्रेरित करती है, जिन्हें जीवन की आपाधापी में अक्सर पीछे छोड़ दिया जाता है।
आज जब दुनिया अनेक संघर्षों, तनावों और संवेदनहीनताओं से घिरी हुई है, ऐसे समय में प्रेम को केवल किसी दूसरे व्यक्ति में खोजने के बजाय अपने भीतर बसाना और उसे जीवन का हिस्सा बनाना अधिक आवश्यक हो गया है। ‘प्लेटोनिक लव 2.0’ के माध्यम से अंशु हर्ष ने प्रेम के इसी स्वरूप को कविताओं, गीतों और संगीत के संगम के रूप में प्रस्तुत किया, जहाँ प्रेम केवल एक अनुभूति नहीं, बल्कि जीवन को देखने की ऐसी दृष्टि है, जो मनुष्य को अधिक संवेदनशील, सहज और मानवीय बनाती है।

