केंद्रीय रेल मंत्री, सूचना एवं प्रसारण मंत्री और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को लोकसभा में पूछे गए प्रश्नों के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।

स्टेशन का पुनर्विकास और अमृत भारत योजना

रेल मंत्रालय ने स्टेशनों के दीर्घकालिक पुनर्विकास के लिए अमृत भारत स्टेशन योजना शुरू की है। इस योजना के अंतर्गत स्टेशनों के सुधार हेतु मास्टर प्लान तैयार करना और चरणबद्ध तरीके से उनका कार्यान्वयन करना शामिल है। मास्टर प्लान में निम्नलिखित बातें शामिल हैं:

  • स्टेशन और आवागमन क्षेत्रों तक पहुंच में सुधार
  • स्टेशन का शहर के दोनों हिस्सों से जुड़ाव और स्टेशन भवन का सुधार
  • प्रतीक्षा कक्षों, शौचालयों, बैठने की व्यवस्था और पानी के बूथों में सुधार
  • यात्री यातायात के अनुरूप चौड़े फुट ओवरब्रिज/एयर कॉनकोर्स का प्रावधान
  • लिफ्ट/एस्केलेटर/रैंप की व्यवस्था
  • प्लेटफार्म की सतह में सुधार/उपलब्धता और प्लेटफार्म के ऊपर आवरण का प्रावधान
  • 'वन स्टेशन वन प्रोडक्ट' जैसी योजनाओं के माध्यम से स्थानीय उत्पादों के लिए कियोस्क की व्यवस्था करना
  • पार्किंग क्षेत्र, मल्टीमॉडल एकीकरण और दिव्यांगजनों के लिए उपलब्ध सुविधाएं
  • बेहतर यात्री सूचना प्रणाली
  • प्रत्येक स्टेशन पर आवश्यकतानुसार एग्‍जीक्‍युटिव लाउंज, व्यावसायिक बैठकों के लिए निर्धारित स्थान, हरियाली आदि की व्यवस्था करना

इस योजना में टिकाऊ और पर्यावरण के अनुकूल समाधान, आवश्यकतानुसार बैलास्टलेस ट्रैक का प्रावधान, चरणबद्ध कार्यान्वयन और व्यवहार्यता के साथ-साथ दीर्घकालिक रूप से स्टेशन पर शहर केंद्र का निर्माण जैसी परिकल्पनाएं भी शामिल हैं। अब तक इस योजना के तहत विकास के लिए 1337 स्टेशनों की पहचान की गई है। फिलहाल, 172 स्टेशनों का काम पूरा हो चुका है।

पुलों की सुरक्षा और निरीक्षण प्रणाली

"भारतीय रेलवे (आईआर) द्वारा देशभर के पुलों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है।" पुलों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए, आईआर में रेलवे पुलों के निरीक्षण की एक सुस्थापित प्रणाली है। सभी पुलों का निरीक्षण वर्ष में दो बार नामित अधिकारियों द्वारा किया जाता है, एक बार मानसून शुरू होने से पहले और एक बार मानसून के बाद विस्तृत निरीक्षण।

इसके अतिरिक्त, मुख्य पुल अभियंता (सीबीई) द्वारा निर्धारित स्थिति के आधार पर कुछ पुलों का निरीक्षण अधिक बार भी किया जाता है। महत्वपूर्ण और बड़े पुलों का व्यापक तकनीकी निरीक्षण इस प्रकार किया जाता है कि ऐसे 20 प्रतिशत पुलों का निरीक्षण प्रतिवर्ष किया जाता है।

मरम्मत और आधुनिकीकरण

पुलों की मरम्मत/मजबूतीकरण/पुनर्वास/पुनर्निर्माण एक सतत और निरंतर प्रक्रिया है और यह पुलों के निरीक्षण के आधार पर की जाती है। 2022-2025 (दिसंबर 2025 तक) के दौरान, भारतीय रेलवे में 8,626 रेलवे पुलों की मरम्मत/वुनर्वास/मजबूतीकरण/पुनर्निर्माण किया गया है।

रोड अंडर ब्रिज (आरयूबी) और सबवे में जलभराव को कम करने के लिए कई कदम उठाए गए हैं, जैसे कि:

  • नए डिजाइनों में बेहतर जल निकासी व्यवस्था
  • पानी को प्राकृतिक नालियों में मोड़ना
  • हम्प और क्रॉस-ड्रेन बनाना, जोड़ों को सील करना और संवेदनशील स्थानों पर उच्च क्षमता वाले पंप लगाना

भारतीय रेलवे पुल नियमावली (आईआरबीएम) में पुल पुनर्निर्माण कार्यों की कार्यप्रणाली दी गई है। अनुबंध प्रबंधन के माध्यम से गुणवत्ता आश्वासन योजना (क्यूएपी) और निरीक्षण एवं परीक्षण योजना (आईटीपी) का अनुपालन सुनिश्चित किया जाता है। निष्पादन एजेंसी की जवाबदेही के लिए दोष दायित्व अवधि तक सुरक्षा जमा राशि को रोके रखने और अनुबंध समाप्त करने जैसे दंडात्मक प्रावधान शामिल हैं।

कोच निर्माण और एलएचबी तकनीक

वर्तमान में, रेल मंत्रालय के अधीन देश में तीन कोच निर्माण इकाइयां कार्यरत हैं। रायबरेली स्थित मॉडर्न कोच फैक्ट्री की स्थापना पर 3,042.83 करोड़ रुपये का व्यय हुआ है। इसके अतिरिक्त, इंटीग्रल कोच फैक्ट्री, चेन्नई, रेल कोच फैक्ट्री, कपूरथला और मॉडर्न कोच फैक्ट्री, रायबरेली के उन्नयन/विस्तार के लिए 2443 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं।

एलएचबी (LHB) कोचों का उत्पादन

आईसीएफ कोचों को अधिक सुरक्षित और आधुनिक एलएचबी कोचों से बदलने का कार्य चरणबद्ध तरीके से शुरू किया गया है। एलएचबी कोच निर्माण 2004-14 और 2014-25 के बीच 18 गुना से अधिक बढ़ गया है।

अवधि एलएचबी कोचों का निर्माण किया गया
2004-14 2,337 नग
2014-25 42,677 नग (18 गुना से अधिक)

रेलवे स्टेशनों पर स्टॉल और आवंटन

रेलवे स्टेशनों पर 11,650 स्टॉल/यूनिट आवंटित किए गए हैं, जिनमें अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति समुदायों के लोग भी शामिल हैं। स्टॉलों का आवंटन ई-नीलामी/ई-निविदा के माध्यम से किया जाता है। मौजूदा नीति में मुफ्त स्टॉल आवंटन का कोई प्रावधान नहीं है।

स्वच्छता और जैव-शौचालय (Bio-Toilets)

स्वच्छता एक सतत प्रक्रिया है। स्टेशनों और ट्रेनों में स्वच्छता बनाए रखने के लिए समर्पित बजटीय प्रावधान हैं और इसके लिए यात्री किराए का कोई घटक नहीं लिया जाता है।

  • मशीनीकृत कोच सफाई और ऑन-बोर्ड हाउसकीपिंग स्टाफ (OBHS) सेवा
  • स्वच्छ रेलवे स्टेशन सेवा: उच्च दबाव वाली जेट मशीनों से सफाई
  • सभी यात्री डिब्बों में जैव-शौचालय (Bio-Toilets) स्थापित किए गए हैं
अवधि लगाए गए बायो-टॉयलेट की संख्या
2004-2014 9,587
2014 से अब तक 3,61,572

भोजन, खानपान और शिकायत निवारण

भारतीय रेलवे औसतन प्रति वर्ष लगभग 58 करोड़ भोजन परोसता है। औसतन केवल 0.0008 प्रतिशत शिकायतें ही प्राप्त होती हैं। पिछले तीन वर्षों में शिकायतों की जांच के आधार पर 2.6 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया है।

"रेल मदद पोर्टल के लॉन्च के साथ, भारतीय रेलवे ने यात्रियों को शिकायतें और सुझाव दर्ज करने के लिए एक एकल विंडो प्रणाली प्रदान की है।"

अधिक किराया वसूलने पर अंकुश लगाने के लिए उठाए गए कदम:

  • मेनू और टैरिफ के लिंक के साथ एसएमएस सेवा
  • बिलिंग के लिए पीओएस (POS) मशीनों की स्थापना
  • ई-पेंट्री सेवा और क्यूआर कोड युक्त पहचान पत्र
  • बाल्टियों और बर्तनों पर दर-सूचक स्टिकर और जागरूकता अभियान
  • नियमित निरीक्षण और दोषी पाए जाने पर उचित दंड

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