बीकानेर/जयपुर। केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को बीकानेर स्थित भारत-पाकिस्तान अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) की ऐतिहासिक सांचू पोस्ट का दौरा किया। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की गरिमामयी मौजूदगी में आयोजित 'प्रहरी सम्मेलन' को संबोधित करते हुए केन्द्रीय गृह मंत्री ने देश के सीमा प्रहरियों के अदम्य साहस को सराहा और स्पष्ट किया कि तेज बारिश, अत्यधिक तापमान, घने जंगलों तथा बर्फीली चोटियों जैसी अत्यंत कठोर एवं विषम परिस्थितियों में भी हमारे जवान कर्तव्यपरायणता, वीरता और सर्वोच्च बलिदान की भावना के साथ सरहद पर मुस्तैदी से तैनात रहते हैं। उन्होंने पूर्व के 'ऑपरेशन सिंदूर' का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि इस दौरान बीएसएफ के जवानों ने न केवल सीमावर्ती जिलों के नागरिकों का हौसला बुलंद रखा, बल्कि पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब देने में अत्यंत अहम भूमिका निभाई। गृह मंत्री ने भरोसा दिलाया कि केन्द्र सरकार भारतीय सीमाओं पर तैनात बीएसएफ को आधुनिकतम तकनीक और बेहतरीन सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

इस महत्वपूर्ण रणनीतिक पड़ाव पर देश की आंतरिक और बाह्य सुरक्षा को अभेद्य बनाने का रोडमैप साझा करते हुए केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आह्वान किया कि सीमाओं की अचूक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बीएसएफ, सेना, जागरूक नागरिक और स्थानीय प्रशासन मिलकर एक मजबूत 'चतुष्कोणीय सुरक्षा ग्रिड' का निर्माण करें। उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने देश के सीमा सुरक्षा परिदृश्य में आमूलचूल परिवर्तन किया है, जिसके तहत सेना और बीएसएफ का व्यापक आधुनिकीकरण करने के साथ-साथ अत्याधुनिक उपकरण एवं संसाधन उपलब्ध करवाए गए हैं। आतंकवादियों को मुंहतोड़ जवाब देने की नीति को रेखांकित करते हुए उन्होंने बीएसएफ के उन दो हजार से अधिक शहीद सीमा प्रहरियों को नमन किया, जिन्होंने मातृभूमि की रक्षा में अपना सर्वोच्च बलिदान दिया। पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में जवानों के अतुलनीय योगदान की सराहना करते हुए उन्होंने बताया कि वर्ष 2019 से शुरू हुई विशेष मुहिम के तहत जवानों द्वारा अब तक 7 करोड़ 35 लाख पौधे लगाए जा चुके हैं, जो भविष्य में जलवायु परिवर्तन और पृथ्वी के तापमान को नियंत्रित रखने में बेहद उपयोगी साबित होंगे।

देश की रक्षा में नारी शक्ति के बढ़ते कदमों की सराहना करते हुए गृह मंत्री ने कहा कि आज बॉर्डर पर बेटियां बेटों से भी दो कदम आगे हैं और केंद्र सरकार वर्ष 2030 तक इन जांबाज बेटियों के लिए हर आवश्यक सुविधा मुहैया करवाएगी। इसी कड़ी में उन्होंने राजस्थान में बीएसएफ की सीमा चौकियों पर 40 करोड़ रुपए की लागत से स्वीकृत 79 महिला बैरकों का जिक्र किया, जिनमें से ई-लोकार्पित हुए 14 बैरकों सहित 67 का कार्य पूरा हो चुका है तथा शेष 12 बैरकों का कार्य भी जल्द पूर्ण कर लिया जाएगा; जबकि पूरे देश की सीमा चौकियों पर 200 करोड़ रुपए की लागत से कुल 360 बैरक बनाए जा रहे हैं। इतिहास के पन्नों को पलटते हुए उन्होंने सांचू चौकी को भारत के इतिहास में स्वर्णाक्षरों में दर्ज बताते हुए याद दिलाया कि वर्ष 1965 के भारत-पाक युद्ध के दौरान पाकिस्तान ने सांचू पर कब्जा करने का दुस्साहस किया था, तब यहां से 25 किलोमीटर दूर रणजीतपुरा में स्थित 3 आरएसी की चौकी के जवानों और 13 ग्रेनेडियर के वीरों ने पाकिस्तान पर भीषण हमला बोलकर सांचू को सुरक्षित रखा और दुश्मनों को भागने पर मजबूर कर दिया। वही 3 आरएसी अब बीएसएफ की बारहवीं वाहिनी बन चुकी है, जहां प्रतिवर्ष गौरवशाली 'सांचू विजय दिवस' मनाया जाता है।

रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण 179वीं बटालियन की इस बॉर्डर आउट पोस्ट से गृह मंत्री ने बुनियादी ढांचे के विकास पर प्रकाश डालते हुए बताया कि केंद्र सरकार द्वारा अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर 1096 किलोमीटर लंबी लिटरल रोड और 520 किलोमीटर लंबी एक्ससीएल रोड का निर्माण किया जा रहा है, जिससे जवानों के आवागमन और कनेक्टिविटी की चिंताएं दूर होंगी। इसके साथ ही सीमाओं पर नई डिजाइन की फेंसिंग की जा रही है और सीमा की 180 चौकियों पर पाइपलाइन के जरिए पीने का पानी पहुंचाने का कार्य सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है। उन्होंने बीएसएफ को परंपरागत ड्यूटी से आगे बढ़कर नए आयामों पर सोचने का निर्देश देते हुए सीमा पार से होने वाले अतिक्रमण, स्मगलिंग और घुसपैठ पर पैनी नजर रखने को कहा। सीमांत गांवों के सर्वांगीण विकास के लिए प्रधानमंत्री के 'वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम' का हवाला देते हुए उन्होंने घोषणा की कि आगामी छह महीनों के भीतर ड्रोन रोधी संयंत्र लगाने की शुरुआत कर दी जाएगी। उन्होंने बीएसएफ को राज्यों के साथ क्षेत्रीय सुरक्षा चिंताओं को साझा करने, जनसांख्यिकी में किसी भी प्रकार के कृत्रिम परिवर्तन होने पर राज्य सरकार को समय रहते आगाह करने तथा ड्रोन का उपयोग करने वाले संदिग्ध तत्वों पर सिविल व पुलिस प्रशासन के साथ मिलकर पैनी नजर रखने के निर्देश दिए।

राष्ट्रीय सुरक्षा को सामाजिक सरोकार से जोड़ते हुए केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि बीएसएफ के जवान केंद्र और राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम छोर तक पहुंचाने में अपनी सक्रिय सहभागिता निभाएं तथा स्कूलों में बच्चों, किशोरों और युवाओं के साथ निरंतर संवाद स्थापित करें। उन्होंने कड़े लहजे में निर्देशित किया कि बीएसएफ न केवल सरहद के उस पार से आने वाले खतरों पर नजर रखे, बल्कि सरहद के भीतर देश विरोधी गतिविधियों के लिए इस्तेमाल होने वाले तत्वों के खिलाफ भी इतनी सख्त कानूनी कार्यवाही सुनिश्चित करे कि भविष्य में कोई भी ऐसी हरकत करने की जुर्रत न कर सके। दौरे के दौरान केन्द्रीय गृह मंत्री एवं मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने सीमा पर तैनात सजग प्रहरियों से व्यक्तिगत मुलाकात कर उनका हौसला बढ़ाया, प्रहरी शस्त्र गैलरी का बारीकी से अवलोकन कर आधुनिक ड्रोन तकनीक की कार्यप्रणाली की जानकारी ली तथा जवानों के साथ जलपान कर आत्मीय संवाद किया। इससे पूर्व, गृह मंत्री ने प्रसिद्ध सांचू माता मंदिर में विधि-विधान से दर्शन एवं पूजा-अर्चना कर देश व प्रदेश की सुख-अभिवृद्धि, समृद्धि तथा लोक-कल्याण की मंगल कामना की और सांचू पोस्ट पर पवित्र खेजड़ी का पौधा लगाया। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने भी सांचू पोस्ट और इससे पूर्व बीकानेर के स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय परिसर में पौधारोपण कर आमजन से पर्यावरण संरक्षण हेतु आगे आने का आह्वान किया। इस ऐतिहासिक अवसर पर केंद्रीय विधि एवं न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अर्जुनराम मेघवाल, केन्द्रीय गृह सचिव गोविन्द मोहन, निदेशक आसूचना ब्यूरो तपन कुमार, सचिव सीमा प्रबंधन डॉ. राजेन्द्र कुमार, बीएसएफ महानिदेशक प्रवीण कुमार सहित अनेक गणमान्य जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी और बड़ी संख्या में भारतीय सेना व सीमा सुरक्षा बल के जांबाज जवान उपस्थित रहे।

Pratahkal Newsroom

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