राजस्थान की राजधानी जयपुर स्थित झालाना डूंगरी में शनिवार को सामाजिक और वैचारिक परिवर्तन की एक नई धारा प्रवाहित हुई। अम्बेडकर मैमोरियल वेलफेयर सोसायटी राजस्थान के तत्वावधान में आयोजित चार दिवसीय 'अम्बेडकर-फुले विचार क्रांति महोत्सव 2026' का विधिवत शुभारंभ हुआ। महान समाज सुधारक महात्मा ज्योतिबा फुले की जयंती के पावन अवसर पर आयोजित इस गरिमामय समारोह में शिक्षा, आरक्षण और जातिगत भेदभाव जैसे गंभीर विषयों पर गहन मंथन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत महात्मा ज्योतिबा फुले, डॉ. बी.आर. अंबेडकर और महात्मा बुद्ध की प्रतिमाओं पर पुष्पांजलि अर्पित कर की गई, जिसके उपरांत वक्ताओं ने अपने ओजस्वी विचारों से समाज को नई दिशा देने का आह्वान किया।

उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी श्री जयनारायण शेर ने शिक्षा प्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि पाठ्यक्रमों में महात्मा ज्योतिबा फुले जैसे महापुरुषों को वह स्थान प्राप्त नहीं हुआ जिसके वे हकदार थे, जबकि उन्होंने ही देश में शिक्षा की वास्तविक क्रांति की नींव रखी थी। सोसायटी के अध्यक्ष श्री सत्यवीर सिंह ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि यह महोत्सव केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि समाज में समानता का मार्ग प्रशस्त करने वाली वैचारिक क्रांति की शुरुआत है, जो सामूहिक प्रयासों से ही साकार होगी। कार्यक्रम का कुशल मंच संचालन श्री सुनील नारनौलिया द्वारा किया गया।

महोत्सव के प्रथम टॉक शो 'शिक्षा बराबरी का अधिकार या एलिट का बिजनेस: वर्तमान परिदृश्य में शिक्षा की दिशा क्या होनी चाहिए' में सेवानिवृत्त आईएएस श्री बीएल नवल, एडवोकेट डॉ. महेंद्र कुमार आनंद, श्री एमएल परिहार और श्री गोपाल लखन ने महत्वपूर्ण भागीदारी निभाई। चर्चा के दौरान वक्ताओं ने अधिकारों के प्रति सजगता और बदलते समय के अनुरूप शिक्षा के नए विकल्पों को अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया। इसके पश्चात आयोजित द्वितीय सत्र 'आज भी आरक्षण: सोल्यूशन या सिस्टम की फेलियर का प्रूफ' में श्री बीएल आर्या, श्री भंवर मेघवंशी, श्री बीएल बैरवा और श्री महेश चौधरी ने तर्क दिया कि जब समाज में भेदभाव का आधार सामाजिक है, तो आरक्षण का आधार केवल आर्थिक कैसे हो सकता है।

समानता के अधिकार पर केंद्रित तीसरे सत्र 'कौन जात हो भाई: समानता हक़ है' में श्री सत्यवीर सिंह, श्री विनोद वर्मा रलवाता और डॉ. मुकेश कुमार वर्मा के साथ प्रख्यात लेखक श्री बच्चा लाल उन्मेष ने शिरकत की। श्री उन्मेष ने कोरोना काल की एक मार्मिक घटना का जिक्र करते हुए अपनी कविता 'कौन जात हो भाई' का पाठ किया, जिसने श्रोताओं को झकझोर दिया। सत्र के अंत में श्री सत्यवीर सिंह ने जातिगत श्रेष्ठता के अहंकार को त्यागकर 'जात को जमात' में बदलने का संदेश दिया। महोत्सव के विशेष आकर्षण 'युवा संसद' में नई पीढ़ी के मुद्दों की गूंज सुनाई दी, जिसने इस आयोजन को बौद्धिक और सामाजिक रूप से अत्यंत प्रभावशाली बना दिया।

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