डॉ. अम्बेडकर मैमोरियल वेलफेयर सोसायटी, राजस्थान के तत्वावधान में आयोजित अम्बेडकर-फुले विचार क्रांति महोत्सव के दूसरे दिन रविवार को वैचारिक मंथन का प्रवाह जारी रहा। झालाना स्थित रमाबाई कॉन्फ्रेंस हॉल में आयोजित इस कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने महिला सुरक्षा कानूनों की प्रभावशीलता और सोशल जस्टिस के बजट प्रावधानों पर गंभीर चर्चा की। 'महिला सुरक्षा कानून कमजोर या क्रियान्वयन की कमी' विषय पर बोलते हुए पूर्व न्यायिक सेवा अधिकारी रजनी बृजेश ने समाज की विडंबना पर प्रहार करते हुए कहा कि यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि हमारे देश में एक बेटी का जन्म भी कानूनी संरक्षण के साये में होता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि महिला सुरक्षा हेतु कठोर कानूनी प्रावधान मौजूद हैं, किंतु धरातल पर जागरूकता का अभाव एक बड़ी बाधा है। उन्होंने आह्वान किया कि महिलाओं के प्रति सामाजिक दृष्टिकोण में परिवर्तन की शुरुआत परिवार के स्तर से होनी चाहिए, जहाँ उनके अधिकारों को सुनिश्चित किया जाए।

न्यायिक विमर्श को आगे बढ़ाते हुए बताया गया कि अन्याय के विरुद्ध महिलाओं की चुप्पी तोड़ना अनिवार्य है, जिसके लिए तालुका स्तर पर स्थापित न्यायिक सेवा प्राधिकरण नि:शुल्क सहायता प्रदान कर रहे हैं। सत्र में एएसपी अनुकृति उज्जेनिया ने सामाजिक कुरीतियों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि महिलाएं आज भी बाल विवाह, दहेज प्रथा, पर्दा प्रथा और उत्पीड़न की बेड़ियों से पूर्णतः मुक्त नहीं हो पाई हैं। उन्होंने संविधान प्रदत्त अधिकारों को समानता लाने और कमजोर वर्गों को संरक्षण देने का प्रमुख आधार बताया। इस सत्र का कुशल संचालन सुमनलता कांटीवाल और प्रीति मौर्य द्वारा किया गया।

महोत्सव के द्वितीय चरण में 'सोशल जस्टिस और बजट' विषय पर केंद्रित चर्चा में दलित अधिकार केन्द्र के निदेशक एडवोकेट सतीश कुमार, उप निदेशक चंदा लाल बैरवा और राजस्थान उच्च न्यायालय के पूर्व अतिरिक्त महाधिवक्ता डॉ. गणेश परिहार ने महत्वपूर्ण विचार साझा किए। इस दौरान अनुसूचित जाति उप योजना, जनजाति उप योजना तथा अनुसूचित जाति-जनजाति विशेष विकास निधि अधिनियम 2022 के तकनीकी व व्यावहारिक पहलुओं पर प्रकाश डाला गया। एडवोकेट सतीश कुमार ने अधिकारों की प्राप्ति हेतु कानून की महत्ता पर बल देते हुए जनसंख्या के अनुपात में बजट आवंटन और उसके पारदर्शी व्यय की मांग की। डॉ. गणेश परिहार ने सरकारी योजनाओं के फीडबैक और निरंतर मॉनिटरिंग की आवश्यकता जताई, वहीं चंदा लाल बैरवा ने बजट आवंटन की प्रक्रिया में अनुसूचित जाति-जनजाति के जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही तय करने का सुझाव दिया। वरिष्ठ पत्रकार सुनील नारनौलिया ने इस सत्र का मॉडरेशन किया। सोसायटी के अध्यक्ष सत्यवीर सिंह ने आगामी कार्यक्रमों की रूपरेखा साझा करते हुए बताया कि सोमवार को यूजीसी, संविधान और स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान पर चर्चा होगी, जिसका समापन 14 अप्रैल को अंबेडकर जयंती के अवसर पर एक विशाल आमसभा के साथ होगा

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