डॉ. भीमराव अम्बेडकर विधि विश्वविद्यालय का तृतीय दीक्षांत समारोह 27 मई को
राज्यपाल हरिभाऊ बागडे की अध्यक्षता में होने वाले इस समारोह में ब्लॉकचेन तकनीक और 24 सुरक्षा मानकों से युक्त हाईटेक डिग्रियां बांटी जाएंगी।

। राजस्थान की राजधानी जयपुर स्थित राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर में आगामी 27 मई को सुबह 11 बजे डॉ. भीमराव अम्बेडकर विधि विश्वविद्यालय का तृतीय दीक्षांत समारोह बेहद भव्य और ऐतिहासिक स्तर पर आयोजित होने जा रहा है। माननीय राज्यपाल एवं कुलाधिपति श्री हरिभाऊ बागडे की अध्यक्षता में आयोजित होने वाले इस गरिमामयी समारोह के मुख्य अतिथि माननीय केन्द्रीय राज्य मंत्री विधि एवं न्याय (स्वतंत्र प्रभार) श्री अर्जुन राम मेघवाल होंगे, जबकि विशिष्ट अतिथि के रूप में राजस्थान सरकार के माननीय उप मुख्यमंत्री एवं उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. प्रेम चंद बैरवा उपस्थित रहेंगे। विश्वविद्यालय के सलाहकार जनसम्पर्क विक्रम राठौड़ ने इस संबंध में विस्तृत जानकारी साझा की है।
इस दीक्षांत समारोह के गौरवपूर्ण अवसर पर विभिन्न संकायों के स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर के उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को उनकी बेमिसाल शैक्षिक उपलब्धियों के लिए माननीय राज्यपाल द्वारा उपाधियाँ एवं स्वर्ण पदक प्रदान किए जाएंगे। इस तृतीय दीक्षांत समारोह की महत्ता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें डॉ. भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय के प्रबन्ध मण्डल एवं विद्या परिषद के माननीय सदस्यगण, राजस्थान राज्य के अन्य विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलगुरु गण, लोकभवन के वरिष्ठ अधिकारीगण तथा विश्वविद्यालय के समस्त अधिष्ठाता, विभागाध्यक्ष एवं कुलसचिव प्रत्यक्ष तौर पर सम्मिलित होंगे। इनके अतिरिक्त विभिन्न सम्बद्ध महाविद्यालयों के चेयरमैन, निदेशक व प्राचार्य, विश्वविद्यालय के समस्त अधिकारी एवं कर्मचारीगण, संकाय सदस्य, देश-प्रदेश के प्रख्यात शिक्षाविद, उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थी व उनके गौरवान्वित अभिभावकगण, प्रशासनिक अधिकारीगण, समाज के गणमान्य नागरिक, मीडिया के प्रतिनिधिगण एवं आमंत्रित विशिष्ठ अतिथिगण भी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज करवाकर इस ऐतिहासिक पल के साक्षी बनेंगे।
विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक डॉ. नीरज जैन ने तकनीकी और सांख्यिकीय आंकड़ों की घोषणा करते हुए बताया कि इस तृतीय दीक्षांत समारोह के दौरान कुल 9 स्वर्ण पदक प्रदान किए जाएंगे। इसके साथ ही 16,748 छात्र एवं 8,510 छात्राओं सहित कुल 25,258 विद्यार्थियों को डिग्रियों का ऐतिहासिक वितरण संपन्न किया जाएगा। इसी पावन दिन माननीय राज्यपाल द्वारा दीक्षांत समारोह के मंच से ही डिजीलॉकर पर सभी 25,258 डिग्रियां डिजिटल रूप में अपलोड करने के महत्वाकांक्षी कार्य का विधिवत शुभारम्भ भी किया जाएगा।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) एवं डिजिटल दौर के इस वर्तमान युग में छात्रों की उपाधि में किसी भी प्रकार की और किसी भी स्तर पर होने वाली हेरफेर या जालसाजी की आशंका को जड़मूल से समाप्त करने के उद्देश्य से विश्वविद्यालय ने अभूतपूर्व कदम उठाए हैं। इसके तहत उपाधि को विश्व की नवीनतम व बेहद सुरक्षित 'ब्लॉकचेन तकनीक' के माध्यम से पूर्ण रूप से सुरक्षित और संधारित किया गया है, जिससे उपाधि जारी होने के पश्चात् छात्रों के उपाधि डाटा में किसी भी प्रकार का फेरबदल करना सर्वथा असम्भव हो चुका है। छात्रों की इस डिग्री का भौतिक व डिजिटल सत्यापन अब कोई भी नियोक्ता, अकादमिक संस्थान व छात्र स्वयं विश्वविद्यालय के पोर्टल पर मात्र एक पंजीकरण के उपरांत सिर्फ एक क्लिक में कर सकेंगे।
इस दीक्षांत समारोह में प्रदान की जाने वाली भौतिक उपाधि की सुरक्षा और मुद्रण की विशेषताएं अंतरराष्ट्रीय स्तर की हैं। उपाधि के मुद्रण हेतु जिस विशेष कागज का उपयोग किया गया है, वह आगामी 100 वर्ष तक पूरी तरह से यथावत और सुरक्षित रहेगा। यह विशिष्ट कागज ना तो पानी में गलेगा और ना ही इसे हाथों से फाड़ा जा सकेगा, क्योंकि यह पूरी तरह से नमीं प्रूफ व रासायनिक प्रतिरोध सुरक्षित है। इसके अलावा, उपाधि मुद्रण हेतु प्रयोग में ली गई विशेष स्याही को किसी भी रसायन या साधन से मिटाया नहीं जा सकता है। यह उपाधि अंतरराष्ट्रीय स्तर के कुल 24 गोपनीय सुरक्षा मानकों से सुसज्जित की गई है। इसके साथ ही, जैसे ही विद्यार्थियों को उपाधि जारी होगी, उसे उसी दिन तत्काल डिजीलॉकर पर भी अपलोड कर दिया जावेगा। इन ऐतिहासिक और तकनीकी सुधारों के बल पर डॉ. भीमराव अम्बेडकर विधि विश्वविद्यालय ना केवल राजस्थान राज्य का प्रथम ऐसा विश्वविद्यालय बन गया है, अपितु सम्पूर्ण भारतवर्ष के चुनिंदा श्रेष्ठ विश्वविद्यालयों की अग्रिम पंक्ति में शीर्ष स्थान पर शामिल हो गया है। विश्वविद्यालय ने हमेशा यथासमय परीक्षाओं के गरिमामयी आयोजन एवं समय पर परिणामों की सटीक घोषणा कर शैक्षणिक जगत में अपनी एक विशिष्ट साख स्थापित की है।
विश्वविद्यालय की कुलगुरु प्रो. (डॉ.) निष्ठा जसवाल ने इस ऐतिहासिक मोड़ पर संस्थान के विजन को रेखांकित करते हुए कहा कि परम पूज्य बाबासाहब डॉ. भीमराव अम्बेडकर के न्याय, समानता और संवैधानिक मूल्यों से गहरे प्रेरित यह विधि विश्वविद्यालय सम्पूर्ण राजस्थान प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण, समावेशी एवं व्यावहारिक विधि शिक्षा को निरंतर बढ़ावा देने के उद्देश्य से पूरी तरह समर्पित है। विश्वविद्यालय का प्रमुख और अंतिम लक्ष्य ऐसे कुशल, संवेदनशील और उत्तरदायी विधि-विशेषज्ञों की फौज तैयार करना है, जो देश की न्याय व्यवस्था को सुदृढ़ करने के साथ-साथ समाज में विधि के शासन यानी 'रुल ऑफ़ लॉ' को हर स्तर पर सशक्त बना सकें।
डॉ. भीमराव अम्बेडकर विधि विश्वविद्यालय का मुख्य उद्देश्य एक ऐसे न्यायपूर्ण, समतामूलक और सशक्त समाज के निर्माण में अपना महती योगदान देना है, जहां विधि का शासन हमेशा सर्वोपरि रहे और समाज के अंतिम पायदान पर खड़े प्रत्येक नागरिक को न्याय सुलभ हो सके। यह विश्वविद्यालय अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप तैयार किए गए आधुनिक विधि पाठ्यक्रम, अनुभवी संकाय और अत्याधुनिक संसाधनों के माध्यम से देश में विधि शिक्षा के क्षेत्र में नए मानक व उत्कृष्टता स्थापित करने के अपने पवित्र लक्ष्य को लेकर दृढ संकल्पित है। कुलगुरु ने इस अवसर पर उन सभी हितधारकों के प्रति गहरा आभार व्यक्त किया, जिन्होंने डॉ. भीमराव अम्बेडकर विधि विश्वविद्यालय को उच्च शिक्षा के राष्ट्रीय मानचित्र पर वैश्विक पहचान दिलाने में अपनी महत्वपूर्ण और सक्रिय भूमिका निभाई है।

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