अंबेडकर विधि विश्वविद्यालय दीक्षांत समारोह: राज्यपाल और कानून मंत्री ने बांटी डिग्रियां
जयपुर में डॉ. भीमराव अंबेडकर विधि विश्वविद्यालय के तृतीय दीक्षांत समारोह में 25 हजार से अधिक विद्यार्थियों की डिग्रियां डिजी लॉकर में लाइव की गईं।

जयपुर स्थित डॉ. भीमराव अंबेडकर विधि विश्वविद्यालय के तृतीय दीक्षांत समारोह में मंच से विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए राजस्थान के राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागडे।
राजस्थान की राजधानी जयपुर स्थित डॉ. भीमराव अंबेडकर विधि विश्वविद्यालय के तृतीय दीक्षांत समारोह में बुधवार को संवैधानिक मूल्यों, राष्ट्रहित और सामाजिक न्याय का संदेश प्रमुखता से उभरा। समारोह में राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागडे, केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्री Arjun Ram Meghwal और उप मुख्यमंत्री एवं उच्च शिक्षा मंत्री Prem Chand Bairwa ने विद्यार्थियों को डिग्रियां और पदक प्रदान किए।
समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागडे ने कहा कि विधि शिक्षा प्रत्यक्ष रूप से समाज से जुड़ी शिक्षा है और इसका उपयोग जरूरतमंदों, पीड़ितों तथा वंचित वर्ग के कल्याण के लिए किया जाना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों से राष्ट्र और समाज हित को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का आह्वान करते हुए कहा कि विधि शिक्षा में उच्च संवैधानिक मूल्यों के साथ राजस्थान को अग्रणी बनाया जाना चाहिए।
राज्यपाल ने कहा कि दीक्षांत समारोह विद्यार्थियों के अर्जित ज्ञान के संस्कार का उत्सव है। उन्होंने तैत्तिरीय उपनिषद् का उल्लेख करते हुए कहा कि प्राचीन गुरुकुल परंपरा में शिक्षा पूर्ण होने पर गुरु अपने शिष्यों को सत्य के मार्ग पर चलने, धर्म का आचरण करने और ज्ञान का अहंकार न करने का उपदेश देते थे। उन्होंने कहा कि वर्तमान दीक्षांत समारोह भी उसी परंपरा का आधुनिक स्वरूप है।
डॉ. भीमराव अंबेडकर का स्मरण करते हुए राज्यपाल ने वर्ष 1938 में बॉम्बे विधानसभा में दिए गए उनके वक्तव्य का उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि “मैं चाहता हूं कि समस्त लोग पहले भारतीय हों, और अंततः भारतीय हों तथा भारतीय के सिवाय और कुछ भी नहीं हों।” राज्यपाल ने कहा कि विधि शिक्षा का मूल भाव भी यही होना चाहिए कि सबसे पहले हम भारतीय हैं, उसके बाद किसी वर्ग, जाति या समुदाय से आते हैं। देश सर्वोच्च है।
उन्होंने कहा कि स्वतंत्र भारत के प्रथम कानून मंत्री के रूप में डॉ. बाबा साहेब अंबेडकर ने वंचित वर्गों के अधिकारों की रक्षा करने और ऊंच-नीच के भेद को समाप्त कर समानता स्थापित करने वाले अनेक कानून पारित करवाए। राज्यपाल ने डीडवाना के बच्छराज व्यास का स्मरण करते हुए कहा कि वे कभी कोई मुकदमा नहीं हारे। इसकी प्रमुख वजह यह थी कि वे पक्षकारों को गंभीरता से लेते थे, प्रकरण के सभी पहलुओं का गहराई से अध्ययन करते थे और संविधान से जुड़े मूल्यों के गहन जानकार थे।
राज्यपाल ने कहा कि विधि शिक्षा में भारतीय सभ्यता, संस्कृति और शब्द संपदा को गंभीरता से अपनाकर आगे बढ़ने पर सभी क्षेत्रों में सफलता प्राप्त की जा सकती है। उन्होंने विरोध के नाम पर गाली-गलौज की परंपरा को संविधान विरोधी बताते हुए कहा कि बोले गए शब्द कभी वापस नहीं आते, इसलिए बोलने में सदैव सजगता रखनी चाहिए।
केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि डॉ. अंबेडकर केवल विधि विशेषज्ञ ही नहीं थे, बल्कि वे महान अर्थशास्त्री, मनोवैज्ञानिक, लेखक और अनेक विषयों के गहन जानकार थे। उन्होंने बताया कि डॉ. अंबेडकर वर्ष 1927 में बॉम्बे विधान परिषद के सदस्य बने थे और स्वतंत्र भारत के पहले कानून मंत्री भी रहे। उन्होंने कहा कि उन्हें गर्व है कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें उसी परंपरा में देश का कानून मंत्री बनाया है।
श्री मेघवाल ने विश्वविद्यालय से डॉ. अंबेडकर के व्यक्तित्व के विविध आयामों पर व्याख्यानमाला आयोजित करने का आग्रह किया ताकि नई पीढ़ी उन्हें केवल एकांगी दृष्टिकोण से नहीं, बल्कि समग्र बौद्धिक व्यक्तित्व के रूप में समझ सके।
उन्होंने कहा कि अंग्रेजों ने भारतीय नागरिकों को दंडित करने की मंशा से दंड संहिता कानून बनाए थे, जबकि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की मंशा देश के नागरिकों को न्याय दिलाने की है। इसी उद्देश्य से पुराने कानूनों को बदलकर भारतीय न्याय संहिता लागू करने की पहल की गई है। उन्होंने बताया कि वर्ष 1952 में कोलंबिया विश्वविद्यालय ने डॉ. अंबेडकर को उनके समग्र ज्ञान के आधार पर विशेष सम्मान प्रदान किया था और उन्हें “सिंबल ऑफ नॉलेज” की उपाधि दी गई थी। उन्होंने विद्यार्थियों से डॉ. अंबेडकर के ज्ञान और आदर्शों से प्रेरणा लेकर जीवन में सफलता प्राप्त करने का आह्वान किया।
उप मुख्यमंत्री एवं उच्च शिक्षा मंत्री प्रेमचंद बैरवा ने कहा कि विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में कानून और न्याय की शिक्षा की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि राजस्थान में वैश्विक स्तर की शिक्षा उपलब्ध कराने की दिशा में निरंतर पहल की जा रही है। उन्होंने विद्यार्थियों से विधि शिक्षा के माध्यम से भारत को दुनिया की अग्रणी महाशक्ति बनाने में योगदान देने का आह्वान किया।
समारोह के दौरान राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागडे, केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल और उप मुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा ने विद्यार्थियों को डिग्रियां और पदक प्रदान किए। राज्यपाल ने दीक्षा प्राप्त 25 हजार से अधिक विद्यार्थियों की डिग्रियां डिजी लॉकर में कंप्यूटर का बटन दबाकर लाइव भी कीं।
इससे पूर्व विश्वविद्यालय की कुलगुरु डॉ. निष्ठा जसवाल ने स्वागत उद्बोधन देते हुए विश्वविद्यालय की उपलब्धियों की विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की। तृतीय दीक्षांत समारोह संवैधानिक मूल्यों, विधि शिक्षा और राष्ट्र निर्माण के संदेश के साथ संपन्न हुआ, जहां विद्यार्थियों को केवल डिग्री ही नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के प्रति उत्तरदायित्व का भी संदेश दिया गया।

Pratahkal Bureau
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