जयपुर। राजस्थान की राजधानी में आयोजित एक भव्य समारोह में ऊर्जा संरक्षण की दिशा में उत्तर पश्चिम रेलवे ने अपनी सफलता का परचम लहराते हुए प्रदेश के अन्य संस्थानों को पीछे छोड़ दिया है। राजस्थान सरकार के राजस्थान नवीकरणीय ऊर्जा निगम लिमिटेड (आरआरईसीएल) द्वारा 20 जनवरी 2026 को आयोजित 'राजस्थान ऊर्जा संरक्षण पुरस्कार (आरईसीए)-2023' समारोह में रेलवे ने विभिन्न श्रेणियों में प्रथम स्थान प्राप्त कर अपनी तकनीकी दक्षता और पर्यावरणीय प्रतिबद्धता को सिद्ध कर दिया है। इस प्रतिष्ठित आयोजन में ऊर्जा की बचत और नवाचारों के लिए रेलवे के स्टेशनों, अस्पतालों और कार्यशालाओं को सर्वोच्च सम्मान से नवाजा गया।

इस वर्ष के पुरस्कारों में 'भवन (रेलवे स्टेशन)' श्रेणी के भीतर अलवर रेलवे स्टेशन ने अपनी उत्कृष्टता का लोहा मनवाते हुए प्रथम पुरस्कार पर कब्जा जमाया है, जबकि प्रदेश के सबसे व्यस्त स्टेशनों में से एक जयपुर रेलवे स्टेशन को द्वितीय स्थान प्राप्त हुआ। इसी श्रेणी में जोगी मगरा रेलवे स्टेशन को उनके प्रयासों के लिए रिकग्निशन पुरस्कार से सम्मानित किया गया। यह उपलब्धि दर्शाती है कि रेलवे न केवल यात्रियों को सुविधाएं दे रहा है, बल्कि ऊर्जा प्रबंधन के क्षेत्र में भी देश के अग्रणी संस्थानों में शामिल हो गया है।

चिकित्सा और औद्योगिक क्षेत्र में भी रेलवे का प्रदर्शन अद्वितीय रहा। 'भवन (अस्पताल)' श्रेणी में जोधपुर स्थित मंडलीय रेलवे अस्पताल को उसकी उत्कृष्ट ऊर्जा-कुशल प्रणालियों के लिए प्रथम पुरस्कार प्रदान किया गया। वहीं, 'लार्ज स्केल इंडस्ट्रीज (सामान्य)' श्रेणी में रेलवे कैरेज वर्कशॉप्स का दबदबा पूरी तरह कायम रहा। बीकानेर रेलवे कैरेज वर्कशॉप ने इस श्रेणी में प्रथम स्थान हासिल किया, जबकि अजमेर वर्कशॉप को द्वितीय और जोधपुर वर्कशॉप को तृतीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया। औद्योगिक इकाइयों में ऊर्जा की खपत को नियंत्रित कर उत्पादन क्षमता बढ़ाना रेलवे की एक बड़ी रणनीतिक जीत मानी जा रही है।

उत्तर पश्चिम रेलवे के मुख्य जन सम्पर्क अधिकारी श्री शशि किरण ने इन पुरस्कारों पर हर्ष व्यक्त करते हुए बताया कि यह सफलता महाप्रबन्धक श्री अमिताभ के कुशल नेतृत्व एवं मार्गदर्शन का परिणाम है। श्री अमिताभ की दूरगामी सोच के तहत उत्तर पश्चिम रेलवे ने विद्युत भार को अनुकूलित करने, ऊर्जा खपत की निरंतर डिजिटल निगरानी करने और आरईसीए के कड़े दिशानिर्देशों व मूल्यांकन मानदंडों को धरातल पर उतारने में सफलता पाई है। इन पहलों के कारण न केवल बिजली के बिलों में कमी आई है, बल्कि परिचालन दक्षता में सुधार के साथ-साथ पर्यावरणीय स्थिरता की दिशा में एक ठोस कदम उठाया गया है। यह उपलब्धियां राजस्थान के अन्य सरकारी बुनियादी ढांचों के लिए एक प्रेरणा स्रोत बन गई हैं।

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Pratahkal Newsroom

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