जयपुर, 18 अप्रैल 2026। भाजपा की राष्ट्रीय सचिव डॉ. अलका गुर्जर ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम के प्रति विपक्षी दलों के नकारात्मक रुख पर प्रहार करते हुए उनके दोहरे चरित्र को सार्वजनिक किया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि महिला सशक्तिकरण का दावा करने वाले दलों का असली चेहरा अब देश के सामने आ चुका है, जिनके लिए नारी शक्ति का उत्थान केवल चुनावी भाषणों तक ही सीमित है।

डॉ. गुर्जर ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि जो दल दशकों तक महिला आरक्षण बिल की चर्चा करते रहे, जब उसे वास्तविकता में बदलने का ऐतिहासिक समय आया तो वही दल सदन में हंगामा कर बाधा बने। उन्होंने विपक्षी दलों पर प्रहार करते हुए कहा कि देश की नारी शक्ति को सशक्त और निर्णय लेने वाली मुख्यधारा में शामिल होते देख विपक्ष असहज हो गया है, यही कारण है कि जिम्मेदारी निभाने के बजाय विपक्ष ने सदन से बहिर्गमन का रास्ता चुना।

भाजपा राष्ट्रीय सचिव ने आरोप लगाया कि विपक्ष को महिलाओं के वोट तो चाहिए, लेकिन संसद और विधानसभाओं में उनकी प्रभावी भागीदारी स्वीकार नहीं है। 'पहले परिवार, फिर अन्य' की संकीर्ण सोच रखने वाले ये राजनीतिक दल कभी नहीं चाहते कि देश की बेटियां सशक्त होकर नीति निर्धारण के स्तर तक पहुंचें। उन्होंने कहा कि महिला हितैषी होने का ढोंग करने वाले इन दलों को 33 प्रतिशत आरक्षण मिलने से लोकतंत्र खतरे में नजर आने लगा है। वास्तविकता यह है कि विपक्ष को महिला आरक्षण से नहीं, बल्कि इस क्रांतिकारी कदम का श्रेय वर्तमान सरकार को मिलने से गहरी आपत्ति है।

डॉ. अलका गुर्जर ने आगे कहा कि एक तरफ ये दल महिला सम्मेलनों का ढोंग करते हैं और दूसरी ओर संसद में उनके हितों से जुड़े विधेयकों का विरोध करते हैं, जो इनके दोहरे चरित्र का प्रत्यक्ष प्रमाण है। विपक्ष को भय है कि यदि गांव, गरीब और सामान्य परिवारों की महिलाएं संसद तक पहुंचेंगी, तो उनकी परिवारवाद की राजनीति सदैव के लिए कमजोर हो जाएगी। उन्होंने आगाह किया कि देश की जागरूक मातृशक्ति विपक्ष के इस विरोधाभासी रवैये को भली-भांति समझ चुकी है और आने वाले समय में लोकतांत्रिक प्रक्रिया के माध्यम से इसका करारा जवाब देगी।

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