अखिल भारतीय साहित्य परिषद की संगोष्ठी: 'आत्मबोध से विश्वबोध' पर चर्चा
जयपुर में साहित्य परिक्रमा के विशेषांक पर आयोजित संगोष्ठी में संगठन मंत्री मनोज कुमार ने भारतबोध और सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण पर विचार साझा किए।

जयपुर एयरपोर्ट के पास स्थित थ्योरी लाइफ कैफे में अखिल भारतीय साहित्य परिषद, जयपुर की ओर से एक महत्वपूर्ण संगोष्ठी का आयोजन किया गया। यह आयोजन परिषद के प्रतिष्ठित साहित्यिक उपक्रम "साहित्य परिक्रमा" के नव विशेषांक 'आत्म बोध से विश्वबोध' पर केंद्रित परिचर्चा के रूप में संपन्न हुआ।
मुख्य वक्ता का उद्बोधन और वैचारिक यात्रा
इस संगोष्ठी में मुख्य वक्ता के रूप में अखिल भारतीय साहित्य परिषद के अखिल भारतीय संगठन मंत्री श्री मनोज कुमार उपस्थित रहे। उन्होंने अपने उद्बोधन में आत्मबोध से विश्वबोध तक की यात्रा को विस्तार से समझाया:
- "आत्म बोध से विश्वबोध की महान यात्रा के बीच महत्वपूर्ण पड़ाव ’भारतबोध’ है।"
- "वस्तुत: यह भारत बोध ही हमारे सनातन का दायित्व बोध है।"
- विश्व कल्याण के लिए भारत का सशक्त होना आवश्यक है।
साहित्यिक परंपराएं और औपनिवेशिक प्रहार
भारतीय जीवन मूल्यों और परंपराओं पर बात रखते हुए श्री मनोज कुमार ने निम्नलिखित बिंदु साझा किए:
- सदियों से हमारे यहां साहित्य संवाद की परंपरा के केंद्र मेले रहे हैं।
- हाल ही में केरल में आयोजित 'माघ कुंभ मेले' की चर्चा करते हुए उन्होंने इसे भारत की चेतना का साक्षात प्रमाण बताया।
- "औपनिवेशिक काल में भारत विरोधी शक्तियों ने इन मेलों का उन्मूलन करके हमारी शाश्वत परम्पराओं पर कुठाराघात किया और भारत की चेतना को कुचलने का प्रयास किया।"
- हमारा दायित्व है कि हम अपनी गौरवशाली परंपराओं को फिर से प्रचलन में लाएं।
आधुनिक परिदृश्य और 'शत्रु बोध' की आवश्यकता
वैश्विक अर्थव्यवस्था और राष्ट्र की आंतरिक सुरक्षा पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा:
- डॉलर के घटते महत्व के बीच भारतीय यूपीआई (UPI) विश्व की तेजी से लोकप्रिय हो रही लेन-देन पद्धति है।
- कुछ अराष्ट्रीय तत्व भारतीयता को खंडित करने का दुस्साहस कर रहे हैं इसलिए हमें ’शत्रुबोध’ भी होना चाहिए।
परिचर्चा एवं गणमान्य जनों की उपस्थिति
इस परिचर्चा में प्रदेश भर के कई गणमान्य विद्वानों ने पत्रिका में प्रकाशित 36 विभिन्न आलेखों पर अपने विचार प्रकट किये। कार्यक्रम का विवरण इस प्रकार है:
- प्रस्तावना: विकास तिवारी द्वारा रखी गई।
- संचालन: 'साहित्य परिक्रमा' पत्रिका के संपादक डॉ. इंदुशेखर ‘तत्पुरुष’ ने किया।
- प्रमुख उपस्थिति: क्षेत्रीय संगठन मंत्री विपिन चंद्र पाठक, अध्यक्ष अनाराम जी, और कई लेखक व साहित्यकार उपस्थित रहे।

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