जयपुर। अखिल भारतीय साहित्य परिषद, जयपुर विभाग के तत्वावधान में रविवार, 22 मार्च 2026 की संध्या मानसरोवर स्थित आयोजन स्थल पर “राष्ट्र साधना के 100 वर्ष” विषयक एक भव्य एवं ऐतिहासिक काव्य संध्या संपन्न हुई। मां भारती और मां शारदे के चित्रों के समक्ष दीप प्रज्वलन के साथ इस गरिमामयी आयोजन का शुभारंभ हुआ, जिसने संपूर्ण गुलाबी नगरी को देशभक्ति के अनूठे रंग में सराबोर कर दिया। स्वागत सत्कार की औपचारिकताओं के पश्चात बांसवाड़ा से पधारे कवि बृज मोहन तूफान ने अपनी ओजपूर्ण वाणी में 'जय हो देवी शारदे मां, हमें ऐसा वर दे मां' पंक्तियों के साथ सरस्वती वंदना प्रस्तुत कर कार्यक्रम को आध्यात्मिक ऊंचाई प्रदान की।

कार्यक्रम के संयोजक रवि पारीक ने आयोजन की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि जयपुर में परिषद द्वारा आयोजित यह अपनी तरह का पहला भव्य समागम था, जिसमें देश के विभिन्न कोनों से आए राष्ट्रभक्त रचनाकारों ने अपनी लेखनी से राष्ट्र चेतना का शंखनाद किया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित सिविल लाइन जयपुर के विधायक गोपाल शर्मा ने आद्यंत अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। उन्होंने कवियों का अभिनंदन करते हुए रेखांकित किया कि भारतीय काव्य परंपरा की आत्मा में सदैव से राष्ट्रीयता और संस्कृति का वास रहा है।

काव्य प्रवाह को गति देते हुए दिल्ली के डॉ. प्रवीण आर्य ने 'जननी जन्मभूमि का वंदन आओ कर ले हम, वंदे मातरम' के माध्यम से मातृभूमि की अर्चना की, तो वहीं धौलाना (उत्तर प्रदेश) के दास आरोही ने 'हम समर लड़ा करते खुद से खुद को बुद्ध बनाने को' पंक्तियों से भारतीय संस्कारों की गहराई को छुआ। वीर रस के विख्यात राष्ट्रीय कवि विनीत चौहान ने अपनी कड़कती आवाज में 'हम भारत की पुण्य धरोहर, अलबेले प्रणवीर हैं' पढ़कर श्रोताओं के भीतर राष्ट्रभक्ति का प्रचंड ज्वार उत्पन्न कर दिया। बीकानेर की कवयित्री मोनिका गौड़ ने 'हर ललना है दुर्गा का अवतार वंदे मातरम' के माध्यम से नारी शक्ति और संघ की साधना का महिमामंडन किया।

बाड़मेर के प्रसिद्ध राजस्थानी कवि गोरधन सिंह सोढा 'जहरीला' ने विभाजन की त्रासदी और उसके पश्चात के मोहभंग की पीड़ा को अपनी मातृभाषा में अत्यंत मार्मिक ढंग से प्रस्तुत किया। कोटपुतली के नवनीत गौड़ ने मां भारती के साधकों को अपने सरस मुक्तकों से शब्द सुमन अर्पित किए, जबकि उदयपुर के कवि सुरेंद्र सिंह राव ने 'प्रचारक है यह तो संघ का, है संस्कृति का रखवाला' पंक्तियों द्वारा राष्ट्र निर्माण में प्रचारकों के निस्वार्थ त्याग को रेखांकित किया। इसी क्रम में बांसवाड़ा के बृजमोहन तूफान ने अपनी छंदमुक्त कविता में स्वयंसेवक के परोपकारी स्वरूप का चित्रण किया और चित्तौड़गढ़ के कवि कृष्णार्जुन पार्थभक्ति ने राजस्थान के शौर्य को नमन करते हुए कहा कि 'यहां हर कदम पर बलिदान मिलेगा, कण-कण में भगवान मिलेगा।'

कोटा के कवि राजेंद्र गौड़ ने भारत की 'विश्व गुरु' की संकल्पना को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया, जिसे श्रोताओं की भारी सराहना मिली। महाराष्ट्र से आए कवि प्रवीण श्रीराम देशमुख ने मराठी भाषा में संघ के संस्कारों और समाज सेवा के संकल्प को 'बंधुत्व जागवूनी दावेन संघ सरीता' पंक्तियों से जीवंत किया। जयपुर के प्रख्यात गीतकार विकास तिवारी 'प्रज्ञेय' ने संघ के शताब्दी वर्ष पर अपना विशेष आह्वान गीत 'भारत ने भारत में फिर से जीना सीखा' प्रस्तुत कर वर्तमान समय की चुनौतियों और आशाओं को स्वर दिया। उन्होंने प्रचारक के संघर्ष को 'चल पड़ा प्रचारक, व्रत की ज्योति जलाए' पंक्तियों में पिरोकर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। अंत में नर्मदापुरम (मध्य प्रदेश) के कवि सौरभ सूर्य ने छत्रपति शिवाजी और महाराणा प्रताप के शौर्य प्रसंगों से राष्ट्रभक्ति का स्वर बुलंद किया।

स्वागताध्यक्ष पं. देवी शंकर शर्मा ने देर रात तक डटे रहे सुधी श्रोताओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि भारत माता के जयकारों के बीच यह आयोजन संघ साधना के शताब्दी वर्ष के संकल्पों को सिद्ध करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा। कार्यक्रम का कुशल मंच संचालन डॉ. विनीत चौहान ने किया। यह काव्य संध्या न केवल साहित्यिक उत्कृष्टता का प्रमाण बनी, बल्कि इसने राष्ट्र के प्रति सामूहिक उत्तरदायित्व की भावना को भी सुदृढ़ किया।

Ruturaj Ravan

Ruturaj Ravan

यह प्रातःकाल मल्टीमीडिया में वेबसाइट मैनेजर और सोशल मीडिया एक्जीक्यूटिव के रूप में कार्यरत हैं, और पिछले तीन वर्षों से पत्रकारिता व डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इससे पूर्व उन्होंने दैनिक प्रहार में वेबसाइट प्रबंधन और सोशल मीडिया के लिए रचनात्मक कंटेंट निर्माण और रणनीतियों में अनुभव अर्जित किया। इन्होंने कोल्हापुर के छत्रपति शिवाजी महाराज विश्वविद्यालय से स्नातक और हैदराबाद के सत्या इंस्टीट्यूट से उच्च शिक्षा पूरी की। इन्हें SEO मैनेजमेंट, सोशल मीडिया और उससे संबंधित रणनीतियाँ तैयार करने में व्यापक अनुभव है।

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