अजमेर। राजस्थान केंद्रीय विश्वविद्यालय के प्रांगण में पिछले तीन दिनों से उमड़ रहा उत्साह और प्रतिभा का सैलाब गुरुवार को एक यादगार और दिव्य परिणति पर पहुँचा। स्वामी विवेकानंद जयंती और राष्ट्रीय युवा दिवस के पावन उपलक्ष्य में आयोजित वार्षिक खेल एवं सांस्कृतिक उत्सव 'सृजन 2026' का रंगारंग समापन एक ऐसी सांस्कृतिक संध्या के साथ हुआ, जिसने उपस्थित जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया। कुलपति प्रो. आनंद भालेराव के कुशल और प्रेरणादायी नेतृत्व में आयोजित इस महोत्सव ने न केवल शैक्षणिक उत्कृष्टता, बल्कि युवाओं की सांस्कृतिक और खेल प्रतिभा को भी एक नया फलक प्रदान किया।

इस महाकुंभ की भव्यता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें 34 सांस्कृतिक और 20 से अधिक खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया, जिनमें 1000 से अधिक छात्र-छात्राओं ने पूरे दमखम के साथ पंजीकरण कराया। तीन दिनों तक चले इस उत्सव में विद्यार्थियों ने वाद-विवाद, निबंध लेखन, एक्सटेम्पोर, काव्य पाठ और प्रश्नोत्तरी जैसी साहित्यिक गतिविधियों से अपनी बौद्धिक क्षमता का लोहा मनवाया। वहीं दूसरी ओर, योगासन, लोककला, शास्त्रीय नृत्य, और बॉलीवुड एकल व समूह नृत्य की प्रस्तुतियों ने परिसर को कला के रंगों से सराबोर कर दिया। संगीत की महफिल में शास्त्रीय गायन से लेकर वेस्टर्न म्यूजिक और वाद्य यंत्रों की गूँज ने दर्शकों को बांधे रखा। कलात्मक विधाओं में रंगोली, मेहंदी, फोटोग्राफी और पेंटिंग के जरिए विद्यार्थियों ने अपनी रचनात्मकता दिखाई, तो एकांकी नाटक, स्किट और मिमिक्री के माध्यम से सामाजिक सरोकारों पर गहरा कटाक्ष किया।

मैदानों पर भी रोमांच की कोई कमी नहीं रही। एथलेटिक्स, कबड्डी, वॉलीबॉल, बास्केटबॉल, क्रिकेट, शतरंज, टेबल टेनिस, बैडमिंटन, कैरम और फुटबॉल जैसी स्पर्धाओं में खिलाड़ियों ने अदम्य खेल भावना का परिचय दिया। समापन समारोह को और अधिक जीवंत बनाने के लिए आयोजित हास्य-व्यंग्य कवि सम्मेलन में राजस्थान के विख्यात कवियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। कवि कमल माहेश्वरी, गजेन्द्र कविया, दामोदर दधीच और संजीव सजल ने अपनी तीखी और सारगर्भित रचनाओं से न केवल श्रोताओं को गुदगुदाया, बल्कि समसामयिक सामाजिक विषयों पर सोचने को मजबूर कर दिया। पूरा सभागार देर तक तालियों और ठहाकों से गूँजता रहा।

समारोह के अंतिम पड़ाव पर कुलपति प्रो. आनंद भालेराव ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए इसे एक भावनात्मक अनुभव बताया। उन्होंने विशेष रूप से साझा किया कि अपने कार्यकाल में पहली बार उन्होंने किसी छात्र कार्यक्रम में लगातार तीन घंटे का समय बिताया, जो विश्वविद्यालय के युवाओं की ऊर्जा और समर्पण का प्रमाण है। उन्होंने जोर देकर कहा कि 'सृजन' जैसे आयोजन विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास का आधार हैं, जिनसे उनमें टीम भावना, नेतृत्व क्षमता और सकारात्मक प्रतिस्पर्धा विकसित होती है। समारोह में एक विशेष डाक्यूमेंट्री के माध्यम से पूरे आयोजन की यात्रा को दिखाया गया, जबकि अंतरिम प्रस्तुति में देश की विविध सांस्कृतिक परंपराओं को नृत्यों के जरिए सजीव किया गया।

इस पूरे महोत्सव के सफल क्रियान्वयन में सांस्कृतिक समिति की अध्यक्ष डॉ. हेमलता मंगलानी और खेलकूद समिति के अध्यक्ष डॉ. संजय गर्ग ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिन्होंने प्रतियोगिताओं का विस्तृत प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। साथ ही, क्लब समन्वयक डॉ. जया कृतिका ओझा, डॉ. धनपति शौग्क्रापम, डॉ. भावना सैनी, डॉ. टी. संगीता, डॉ. संजीब पात्रा, डॉ. अंकुर जांगिड़ और दिलीप रायचंदानी के अथक योगदान ने 'सृजन 2026' को सफलता की नई ऊंचाइयों पर पहुँचाया। यह उत्सव न केवल पुरस्कारों के वितरण के साथ समाप्त हुआ, बल्कि विद्यार्थियों के दिलों में अनुशासन, रचनात्मकता और गौरव की एक अमिट छाप छोड़ गया।

Pratahkal Bureau

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