बांदरसिंदरी (अजमेर)। चिकित्सा और विज्ञान के क्षेत्र में राजस्थान के हाथ आज एक ऐसी बड़ी सफलता लगी है जो आने वाले समय में लाखों जिंदगियों को बचाने का आधार बनेगी। राजस्थान केंद्रीय विश्वविद्यालय (CURAJ) के स्कूल ऑफ लाइफ साइन्सिस में अत्याधुनिक 'मलेरिया परजीवी इन विट्रो कल्चर सुविधा' (Biosafety Level–2) प्रयोगशाला का भव्य उद्घाटन किया गया। यह केवल एक लैब की शुरुआत नहीं है, बल्कि वैश्विक स्तर पर पैर पसारते जानलेवा मलेरिया और दवाओं के प्रति विकसित हो रहे उसके प्रतिरोध (Resistance) के खिलाफ युद्ध का एक नया मोर्चा है। विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति प्रो. आनंद भालेराव ने इस उच्च-स्तरीय अनुसंधान केंद्र का आधिकारिक लोकार्पण किया, जो न केवल राजस्थान बल्कि देश के शोध मानचित्र पर विश्वविद्यालय की स्थिति को और अधिक सुदृढ़ करेगा।

यह अत्याधुनिक प्रयोगशाला सीधे तौर पर आईसीएमआर (ICMR) द्वारा वित्त पोषित एक महत्वपूर्ण परियोजना "ए नोवेल मल्टी-टार्गेटिंग अप्रोच टू डेवलप रेसिस्टेंस-इम्यून एंटीमलेरियल्स" को गति प्रदान करेगी। इस प्रोजेक्ट की कमान प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर डॉ. धनेश्वर प्रूस्ति और को-प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर डॉ. तरुण भट्ट संभाल रहे हैं। यह लैब "प्लाज़्मोडियम फ़ैल्सीपेरम" जैसे जटिल परजीवियों के कल्चर, नई दवाओं के परीक्षण और दवाओं के प्रति उनके बदलते व्यवहार के गहन अध्ययन में मील का पत्थर साबित होगी। उद्घाटन समारोह के दौरान विज्ञान और तकनीक के संगम को दर्शाती डॉ. निधि पारीक द्वारा संपादित पुस्तक "आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस इन माइक्रोबायोलॉजी" का भी विमोचन किया गया, जो सूक्ष्म जीव विज्ञान के क्षेत्र में एआई के बढ़ते प्रभाव को रेखांकित करती है।

समारोह को संबोधित करते हुए कुलपति प्रो. आनंद भालेराव ने स्कूल ऑफ लाइफ साइन्सिस की सराहना करते हुए कहा कि यह विभाग विश्वविद्यालय के लिए बौद्धिक संपदा और शोध अनुदानों के मामले में एक अनमोल स्तंभ बनकर उभरा है। उन्होंने बीएसएल-2 लैब को एक ऐसी संस्थागत संपत्ति बताया जो वर्तमान ही नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के शोधकर्ताओं के लिए भी मार्ग प्रशस्त करेगी। पुस्तक विमोचन पर उन्होंने लेखिका की मेहनत को सराहते हुए कहा कि अकादमिक लेखन के लिए जिस निरंतरता और बौद्धिक प्रतिबद्धता की आवश्यकता होती है, वह इस कार्य में स्पष्ट झलकती है। उन्होंने "यावत् चन्द्रदिवाकरौ तावत्" के ध्येय वाक्य के साथ आशा व्यक्त की कि यह संस्थान सूर्य और चंद्रमा की उपस्थिति तक राष्ट्र निर्माण और शोध में अपना योगदान देता रहेगा।

इससे पूर्व, डॉ. धनेश्वर प्रूस्ति ने मलेरिया की भयावहता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि वर्ष 2024 में वैश्विक स्तर पर 2.8 करोड़ से अधिक मामले और 6 लाख से अधिक मौतें दर्ज की गई हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि मलेरिया विरोधी दवाओं के प्रति परजीवियों में बढ़ती प्रतिरोधक क्षमता एक गंभीर वैश्विक चुनौती है। यह लैब डीबीटी (DBT) मानकों के अनुरूप एक सुरक्षित वातावरण प्रदान करेगी, जहां प्रतिरोधी और क्लिनिकल स्ट्रेन पर शोध कर नई औषधियों की खोज की जा सकेगी। वहीं, डॉ. निधि पारीक ने अपनी पुस्तक की महत्ता बताते हुए कहा कि एआई के माध्यम से महामारी की निगरानी और दवा खोज की प्रक्रिया अब और अधिक सटीक हो सकेगी। कार्यक्रम का सफल संचालन डीन प्रभारी प्रो. प्रदीप वर्मा के स्वागत भाषण से शुरू होकर डॉ. हेमंत दाइमा के धन्यवाद ज्ञापन के साथ संपन्न हुआ।

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Pratahkal Bureau

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