अजमेर मंडल में रेलवे ने 9 घंटे में बनाया नया पुल, यातायात बहाल
उत्तर पश्चिम रेलवे के मारवाड़-आबू रोड रेल मार्ग पर आउवा-भिंवालिया के बीच जर्जर पुल संख्या 605 को हटाकर रिकॉर्ड समय में अत्याधुनिक नया पुल तैयार किया गया।

अजमेर: भारतीय रेलवे ने उत्तर पश्चिम रेलवे के अजमेर मंडल में बुनियादी ढांचा विकास और यात्री सुरक्षा की दिशा में एक अभूतपूर्व और ऐतिहासिक कीर्तिमान स्थापित किया है। मारवाड़-आबू रोड रेल मार्ग पर स्थित एक पुराने और जर्जर हो चुके रेलवे पुल को तकनीकी दक्षता का परिचय देते हुए मात्र 9 घंटे से भी कम समय के भीतर पूरी तरह ध्वस्त कर उसकी जगह एक अत्याधुनिक नए पुल का निर्माण संपन्न कर दिया गया है। उत्तर पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी श्री अमित सुदर्शन ने इस गौरवपूर्ण उपलब्धि की आधिकारिक पुष्टि करते हुए बताया कि संरक्षित, सुरक्षित और निर्बाध रेल संचालन सुनिश्चित करने के लिए रेल पटरियों की समय-समय पर मरम्मत, रखरखाव तथा रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर में निरंतर सुधार व परिवर्तन करना अति आवश्यक होता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बुनियादी ढांचे के इसी सुधार और मरम्मत कार्यों को अमलीजामा पहनाने के लिए रेलवे द्वारा विभिन्न रेल खंडों में एक पूर्व निर्धारित समय अवधि के लिए रेल यातायात को पूर्णतः प्रतिबंधित यानी ब्लॉक करके निर्माण कार्यों को अत्यंत तीव्र गति से निष्पादित किया जाता है।
इस महत्वाकांक्षी परियोजना के अंतर्गत मारवाड़-आबू रोड रेल मार्ग पर आउवा और भिंवालिया स्टेशनों के मध्य स्थित ऐतिहासिक रेलवे पुल संख्या 605 को हटाकर नया पुल बनाने की तकनीकी प्रक्रिया दोपहर 12.45 बजे ट्रैफिक ब्लॉक लेकर शुरू की गई थी। रेलवे के दक्ष इंजीनियरों और श्रमिकों के अनुकरणीय समन्वय से इस पुराने ढांचे को ढहा दिया गया और बेहद चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में 9 घंटे से भी कम की रिकॉर्ड समयावधि में कुल 16 ब्लॉक सेगमेंट और 12 भारी-भरकम स्लैब सफलतापूर्वक स्थापित कर नए पुल का ढांचा खड़ा कर दिया गया। कार्य की गति और सटीकता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उसी रात ठीक 21.30 बजे ब्लॉक को पूर्णतः खाली कर दिया गया और इस बेहद महत्वपूर्ण रेल मार्ग को पुनः आधिकारिक रूप से रेल यातायात के लिए खोल दिया गया, जो उत्तर पश्चिम रेलवे के अजमेर मंडल के लिए एक अत्यंत सराहनीय और मील का पत्थर साबित होने वाली उपलब्धि है।
रेलवे प्रशासन ने इस कार्य के कारण रेल संचालन प्रतिबंधित रहने की अवधि के दौरान समय का बेहतरीन और योजनाबद्ध सदुपयोग किया तथा मुख्य पुल निर्माण के साथ-साथ रेल के मरम्मत और अनुरक्षण से जुड़े कई अन्य लंबित कार्यों को भी समानांतर रूप से पूरा कर लिया। इस दौरान सुमेरपुर जवाई बांध स्टेशन पर त्वरित कार्रवाई करते हुए 12 मीटर लंबे पैदल पुल के 10 गर्डर सफलतापूर्वक लगाए गए, साथ ही 4 वेल्डिंग के साथ 2 डब्ल्यूसीएमएस (WCMS) क्रॉसिंग भी स्थापित किए गए। इसी ब्लॉक अवधि में 8 वेल्डिंग के साथ 2 रेल और 1 एसईजे (SEJ) को पूरी तरह बदला गया, जबकि ट्रैक सुरक्षा को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से 11 नग ग्लू जॉइंट का पूरी तरह नवीनीकरण किया गया। इसके अतिरिक्त संरक्षा मानकों को परखने के लिए 10 नग एसईजे फ्लेंज का सघन यूएसएफडी (USFD) परीक्षण किया गया तथा यूटीवी (UTV) मशीनों द्वारा 8 रेल और 7 क्रॉसिंग का त्वरित परिवहन सुनिश्चित किया गया।
इस महाब्लॉक के दौरान अजमेर मंडल के मदार-मारवाड़ रेल खंड में भी कई महत्वपूर्ण तकनीकी और ट्रैक सुदृढ़ीकरण के कार्य युद्धस्तर पर पूरे किए गए, जिसके तहत ट्रैक के स्थायित्व के लिए 750 घन मीटर गिट्टी की अनलोडिंग की गई। इसके साथ ही एफआरएम (FRM) मशीन द्वारा कुल 1200 मीटर शोल्डर गिट्टी की गहराई से सफाई की गई और बीसीएम (BCM) मशीन द्वारा 380 मीटर रेल ट्रैक के डीप स्क्रीनिंग का कार्य बेहद कुशलता से पूरा किया गया। ट्रैक अलाइनमेंट को दुरुस्त करने के लिए यूनिमैट (UNIMAT) मशीन की सहायता से 2.8 टर्नआउट, 2 नग एसईजे और कुल 360 मीटर ट्रैक की टैंपिंग का कार्य भी सुचारू रूप से संपादित किया गया। रेलवे का हमेशा यह निरंतर प्रयास रहता है कि नियमित रेल संचालन में न्यूनतम अवरोध उत्पन्न करते हुए ऐसे सभी बड़े तकनीकी कार्यों को समय सीमा में पूरा किया जाए, जिससे देश के रेल यात्रियों को सदैव एक पूर्णतः संरक्षित, सुरक्षित, भरोसेमंद और सुविधाजनक यात्रा का सुखद अनुभव प्रदान किया जा सके।

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