बांदरसिंदरी/अजमेर। राजस्थान केंद्रीय विश्वविद्यालय के प्रांगण में आज राष्ट्रभक्ति की एक ऐसी लहर उमड़ी, जिसने न केवल नेताजी सुभाष चंद्र बोस की गौरवगाथा को जीवंत कर दिया, बल्कि आधुनिक भारत के निर्माण का नया रोडमैप भी तैयार किया। नेताजी की जयंती के पावन अवसर पर आयोजित 'भव्य एवं दिव्य' कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कुलपति प्रो. आनंद भालेराव ने एक ऐसा विमर्श रखा, जिसने राष्ट्रनिर्माण की परिभाषा को वैचारिक धरातल पर नई ऊंचाई दी। उन्होंने नेताजी के ऐतिहासिक आह्वान को आज के संदर्भ में परिभाषित करते हुए कहा कि यदि आज नेताजी हमारे बीच होते, तो उनका नारा होता— "तुम मुझे संकल्प और प्रतिबद्धता दो, मैं तुम्हें विकसित भारत दूँगा।"

कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ कुलपति प्रो. आनंद भालेराव द्वारा नेताजी की प्रतिमा पर भावपूर्ण पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया। इस दौरान समूचा परिसर देशभक्ति के नारों और नेताजी के आदर्शों की गूँज से सराबोर रहा। अपने संबोधन में कुलपति ने नेताजी के उस सिद्धांत को रेखांकित किया जहाँ विचार, बंदूक की शक्ति से ऊपर होते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि राष्ट्र का असली निर्माण हथियारों से नहीं, बल्कि उन शिक्षित और अनुशासित नागरिकों से होता है, जिनका चरित्र राष्ट्र के प्रति समर्पित हो। प्रो. भालेराव ने नेतृत्व और प्रबंधन के सूक्ष्म अंतर को स्पष्ट करते हुए कहा कि जो नेतृत्व संघर्ष से डरकर समझौते की भाषा बोलता है, वह केवल प्रबंधन है, लेकिन नेताजी का नेतृत्व अटूट सिद्धांतों और बलिदान की पराकाष्ठा था।

विश्वविद्यालय की भूमिका को राष्ट्रधर्म से जोड़ते हुए कुलपति ने कहा कि आज की शिक्षा प्रणाली, चाहे वह नई शिक्षा नीति (NEP-2020) हो, NAAC का मूल्यांकन हो या NIRF रैंकिंग, ये सभी नेताजी के उस दूरदर्शी विज़न की आधुनिक कड़ियाँ हैं, जिसमें उन्होंने स्वतंत्रता के बाद सक्षम और दक्ष संस्थानों के माध्यम से भारत को चलाने का स्वप्न देखा था। उन्होंने युवाओं का आह्वान किया कि वे ज्ञान को केवल करियर नहीं बल्कि राष्ट्रसेवा का माध्यम बनाएं।

यह अवसर विश्वविद्यालय के लिए त्रिवेणी संगम के समान रहा। नेताजी की जयंती के साथ-साथ बसंत पंचमी के शुभ अवसर पर कुलपति द्वारा माँ सरस्वती की विधिवत प्राण प्रतिष्ठा और पूजा-अर्चना संपन्न की गई। इसी कड़ी में कुलपति प्रो. आनंद भालेराव के सफल कार्यकाल के चार वर्ष पूर्ण होने पर विश्वविद्यालय परिवार द्वारा उनका भव्य स्वागत किया गया, जिसमें शिक्षकों और विद्यार्थियों ने अपने विचार साझा कर उनके नेतृत्व की सराहना की।

कार्यक्रम के समापन सत्र में विश्वविद्यालय के शिक्षकों, अधिकारियों और विद्यार्थियों ने नेताजी की प्रतिमा पर श्रद्धासुमन अर्पित किए। उप कुलसचिव मनीष भोमिया ने नेताजी के महान बलिदान को नमन करते हुए सभी आगंतुकों का धन्यवाद ज्ञापित किया। पूरे गौरवमयी कार्यक्रम का सफल संचालन जनसंपर्क अधिकारी अनुराधा मित्तल द्वारा किया गया। यह आयोजन केवल एक समारोह नहीं, बल्कि विश्वविद्यालय की उस प्रतिबद्धता का प्रमाण रहा जहाँ महापुरुषों के विचार आने वाली पीढ़ियों के मार्गदर्शक बनते हैं।

Pratahkal Bureau

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