कृषि विश्वविद्यालय कोटा का दीक्षांत समारोह: राज्यपाल ने दिया आत्मनिर्भरता का मंत्र
राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने कोटा में 358 छात्र-छात्राओं को उपाधियां प्रदान कीं और आधुनिक तकनीक के माध्यम से किसानों को सशक्त बनाने पर जोर दिया।

कोटा स्थित सिआम ऑडिटोरियम में आयोजित कृषि विश्वविद्यालय के नवम् दीक्षांत समारोह के दौरान मंच से संबोधित करते राज्यपाल एवं कुलाधिपति श्री हरिभाऊ बागडे।
जयपुर/कोटा, 13 मई। राजस्थान के राज्यपाल एवं कुलाधिपति श्री हरिभाऊ बागडे ने कृषि को भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ बताते हुए आह्वान किया है कि कृषि शिक्षा के माध्यम से उत्पादकता बढ़ाकर ही खाद्य सुरक्षा के लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है। बुधवार को कोटा स्थित राज्य कृषि प्रबंध संस्थान (सिआम) ऑडिटोरियम में आयोजित कृषि विश्वविद्यालय, कोटा के नवम् दीक्षांत समारोह की अध्यक्षता करते हुए राज्यपाल ने विद्यार्थियों को उन्नत बीज और आधुनिक तकनीक के माध्यम से किसानों को आत्मनिर्भर बनाने का गुरुमंत्र दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि देश की बहुसंख्यक आबादी की आजीविका कृषि और पशुपालन पर टिकी है, इसलिए ग्रामीण विकास और रोजगार सृजन के जरिए 'विकसित भारत' के दृष्टिकोण को साकार करने में कृषि शिक्षा की भूमिका सर्वोपरि है।
समारोह को संबोधित करते हुए कुलाधिपति ने पदक एवं डिग्री प्राप्तकर्ताओं के उज्ज्वल भविष्य की कामना की और उनसे अपने ज्ञान व अनुसंधान का उपयोग राष्ट्र निर्माण में करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि हमारे कृषि विश्वविद्यालयों को आधुनिक विज्ञान, नवीनतम तकनीकों और व्यावहारिक समाधानों के ऐसे सशक्त केंद्रों के रूप में विकसित होना चाहिए, जहां किसानों को सरल, सुलभ और वैज्ञानिक जानकारी मिल सके। श्री बागडे ने जोर देकर कहा कि विकसित भारत की परिकल्पना विकसित कृषि के बिना अधूरी है, जिसके लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म, ड्रोन तकनीक, एआई और डेटा एनालिटिक्स जैसी विधाओं का समावेश अनिवार्य है। उन्होंने युवाओं को नौकरी खोजने वाले के बजाय स्टार्टअप्स, फूड प्रोसेसिंग और जैविक खेती जैसे क्षेत्रों में उतरकर 'रोजगार प्रदाता' बनने के लिए प्रेरित किया।
इस अवसर पर राज्यपाल ने विश्वविद्यालय की विभिन्न विकास परियोजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास भी किया। इनमें पीएम-राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत अनुसंधान केन्द्र कोटा की खरपतवार नियंत्रण प्रयोगशाला और यांत्रिक कृषि फार्म की बीज प्रौद्योगिकी प्रयोगशाला का शिलान्यास, तथा कोटा अनुसंधान केन्द्र के बीज विधायन संयंत्र एवं कृषि महाविद्यालय उम्मेदगंज के अकादमिक भवन का लोकार्पण प्रमुख रहा। साथ ही 'कैनोपी मेनेजमेंट ऑफ फ्रूटक्रॉप' एवं 'सोयाबीन के जादुई फायदे-एक बीज कई व्यंजन' नामक पुस्तकों का विमोचन भी संपन्न हुआ। समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित कृषि एवं उद्यानिकी मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने डिग्री धारकों को समाज और राष्ट्र हित में काम करने की सीख देते हुए बताया कि राजस्थान में 55-60 प्रतिशत कृषि योग्य भूमि होने के बावजूद केवल 35-40 प्रतिशत क्षेत्र ही सिंचित है, जो बड़ी चुनौती है।
समारोह के अंतिम चरण में राज्यपाल ने कृषि, उद्यानिकी एवं वानिकी संकायों के कुल 358 अभ्यर्थियों को उपाधियां प्रदान कीं। मेधावी छात्र-छात्राओं को कुल 14 स्वर्ण पदक वितरित किए गए, जिनमें 3 स्नातक और 6 स्नातकोत्तर अभ्यर्थियों को मिले पदकों के साथ एक 'कुलगुरु स्वर्ण पदक' और एक 'कुलाधिपति स्वर्ण पदक' भी शामिल था। यह गरिमामयी समारोह न केवल अकादमिक उपलब्धि का प्रतीक बना, बल्कि राजस्थान में आधुनिक और तकनीक-आधारित कृषि क्रांति के संकल्प को भी नई ऊर्जा दे गया।

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