जयपुर /जोधपुर, 20 मार्च। राज्यपाल सचिवालय, लोकभवन, राजस्थान द्वारा जारी सूचना के अनुसार राज्यपाल एवं कुलाधिपति श्री हरिभाऊ बागडे ने कृषि विश्वविद्यालय, जोधपुर के सप्तम दीक्षांत समारोह को संबोधित किया। राज्यपाल श्री बागडे ने इस अवसर पर कहा कि "दीक्षांत केवल उपाधि प्रदान करने का अवसर नहीं, बल्कि यह विद्यार्थियों के नव जीवन में प्रवेश का महत्वपूर्ण क्षण है।" उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा का उल्लेख करते हुए बताया कि दीक्षांत को 'समावर्तन संस्कार' के रूप में जाना जाता था, जिसमें विद्यार्थी को समाज के लिए समर्पित जीवन जीने का संदेश दिया जाता था। राज्यपाल ने विश्वविद्यालय में अर्जित ज्ञान के प्रकाश को समाज के प्रत्येक कोने तक पहुँचाने को विद्यार्थियों का मुख्य दायित्व बताया और उनसे अपनी शिक्षा का उपयोग राष्ट्र और समाज के विकास के लिए करने तथा जीवन में लक्ष्य निर्धारित कर सतत प्रयास करते रहने का आह्वान किया। उन्होंने शिक्षा को “जीवन का आलोक पथ” बताते हुए कहा कि यही वह माध्यम है जिससे व्यक्ति स्वयं के साथ-साथ समाज और विश्व को भी प्रकाशित करने की क्षमता प्राप्त करता है।

कृषि अर्थव्यवस्था की रीढ़ और आधुनिक तकनीक का समावेश

राज्यपाल ने अपने संबोधन में रेखांकित किया कि कृषि भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और देश की बड़ी आबादी इससे जुड़ी हुई है। उन्होंने विश्वविद्यालय से यह अपेक्षा की कि वह कृषि एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में नवाचार आधारित शोध को बढ़ावा दे, जिससे स्थानीय जलवायु के अनुरूप उन्नत खेती को प्रोत्साहन मिल सके। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि "आज कृषि में नई चुनौतियों के समाधान के लिए आधुनिक तकनीकों, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, ड्रोन एवं रोबोटिक्स का उपयोग अत्यंत आवश्यक है।" एआई के विवेकपूर्ण उपयोग पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि इसका उपयोग कृषि उन्नयन और अनुसंधान में किया जाना चाहिए, जिससे किसानों की उत्पादकता और आय में वृद्धि हो सके। उन्होंने ‘जय जवान, जय किसान, जय विज्ञान और जय अनुसंधान’ के मंत्र को अपनाने का आह्वान करते हुए कृषि विकास के लिए शोध एवं नवाचार को प्राथमिकता देना आवश्यक बताया।

प्राकृतिक खेती, जल संरक्षण और सांस्कृतिक विरासत

प्राकृतिक खेती की आवश्यकता पर बल देते हुए राज्यपाल ने कहा कि रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की सेहत प्रभावित हो रही है। उन्होंने प्राकृतिक खेती को अपनाने और इसके प्रति जागरूकता बढ़ाने का आह्वान किया। जल संरक्षण को आज की सबसे बड़ी आवश्यकता बताते हुए उन्होंने संदेश दिया कि "पानी की बचत ही उसका उत्पादन है।" राज्यपाल ने कहा कि पारंपरिक कृषि ज्ञान, स्थानीय किसानों के अनुभव और आधुनिक विज्ञान के समन्वय से ही टिकाऊ कृषि प्रणाली विकसित की जा सकती है। उन्होंने सिंधु घाटी सभ्यता से लेकर वैदिक कृषि परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि "भारत में कृषि केवल आर्थिक गतिविधि नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक व्यवस्था का आधार रही है।"

विश्वविद्यालय की उपलब्धियां और नवाचारों की सराहना

राज्यपाल ने विश्वविद्यालय को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा ‘ए’ ग्रेड मिलने पर बधाई दी। उन्होंने वैज्ञानिकों द्वारा विकसित उन्नत फसल किस्मों, कृषि मशीनरी परीक्षण केंद्र की स्थापना, बाजरे की देशी किस्मों के संरक्षण तथा मेहंदी कटाई मशीन जैसे नवाचारों को सराहनीय बताया। मिलेट्स यानी मोटे अनाज के बढ़ते वैश्विक महत्व का उल्लेख करते हुए उन्होंने इस दिशा में और अधिक कार्य करने का आह्वान किया। समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि "दीक्षांत समारोह केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि यह प्रत्येक विद्यार्थी के जीवन में एक महत्वपूर्ण संकल्प का क्षण होता है।" उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि यह सफलता शिक्षकों के मार्गदर्शन, मेहनत और अभिभावकों के त्याग का परिणाम है, अतः अब युवाओं का दायित्व है कि वे अपने ज्ञान का उपयोग राष्ट्र के प्रति उत्तरदायित्व निभाने में करें।

लोकार्पण, विमोचन और उपाधि वितरण

इस अवसर पर राज्यपाल द्वारा सावंत कुआं, बावड़ी स्थित डेयरी एवं खाद प्रौद्योगिकी महाविद्यालय तथा प्रौद्योगिकी एवं कृषि अभियांत्रिकी महाविद्यालय के छात्रावासों का लोकार्पण किया गया तथा विश्वविद्यालय के विभिन्न प्रकाशनों का विमोचन भी किया गया। समारोह के मुख्य आकर्षण के रूप में कुल 403 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं और कुल 15 विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक प्रदान किए गए, जो उनकी शैक्षणिक उत्कृष्टता का प्रमाण हैं।

Pratahkal Bureau

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