जयपुर/उदयपुर, 22 दिसंबर।

कृषि को भारतीय जीवन की आत्मा बताते हुए राजस्थान के राज्यपाल एवं कुलाधिपति श्री हरिभाऊ बागडे ने कहा कि दीक्षांत समारोह विद्यार्थियों के जीवन का केवल एक पड़ाव नहीं, बल्कि नए दायित्वों और संभावनाओं की शुरुआत है। उन्होंने जोर देकर कहा कि देश की समृद्धि का मार्ग कृषि से होकर ही जाता है और युवा पीढ़ी के कंधों पर विकसित भारत 2047 के सपने को साकार करने की जिम्मेदारी है।

उदयपुर स्थित आरएनटी मेडिकल कॉलेज सभागार में महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के 19वें दीक्षांत समारोह की अध्यक्षता करते हुए राज्यपाल श्री बागडे ने कहा कि कृषि भारतीय सभ्यता का आधार रही है और आज भी देश की दो-तिहाई से अधिक आबादी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इसी पर निर्भर है। उन्होंने इस बात पर विशेष प्रसन्नता व्यक्त की कि विश्वविद्यालय की उपाधियों और स्वर्ण पदकों में अधिकांश हिस्सेदारी छात्राओं की रही, जो यह दर्शाता है कि अवसर मिलने पर बेटियां हर क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकती हैं। कृषि शिक्षा में छात्राओं की बढ़ती भागीदारी को उन्होंने भविष्य के लिए शुभ संकेत बताया।

राज्यपाल ने अनाज उत्पादन में रसायनों की बढ़ती भूमिका पर चिंता जताते हुए कहा कि रासायनिक तत्वों की अधिकता से स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ रही हैं। उन्होंने बिना रसायन के अन्न उत्पादन की दिशा में ठोस प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया और कहा कि राज्य में कई किसान ऐसे उदाहरण प्रस्तुत कर रहे हैं, जो बिना फर्टिलाइजर के खेती कर रहे हैं। उन्होंने याद दिलाया कि जहां 1980 के दशक तक देश को अनाज आयात करना पड़ता था, वहीं आज भारत के अनाज भंडार भरे हुए हैं, जो कृषि क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धि का प्रतीक है।

दीक्षांत समारोह में राज्यपाल द्वारा विभिन्न संकायों के कुल 1,181 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं, जबकि 44 मेधावी छात्रों को स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय द्वारा विकसित नई एवं उन्नत कृषि किस्मों का भी लोकार्पण किया गया, जो भविष्य में किसानों की आय और उत्पादन बढ़ाने में सहायक होंगी।

समारोह को संबोधित करते हुए कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने युवाओं से केवल नौकरी के पीछे न भागने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि ‘भारत कृषि संकल्प यात्रा’ के माध्यम से पहली बार कृषि वैज्ञानिक प्रयोगशालाओं से निकलकर सीधे खेतों तक पहुंचे हैं, जिससे किसानों को फर्टिलाइजर के सही उपयोग की जानकारी मिल रही है। उन्होंने अंधाधुंध रसायनों के प्रयोग को नियंत्रित करने और बायो फर्टिलाइजर को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर दिया।

समारोह का समापन इस संदेश के साथ हुआ कि गांवों की समृद्धि से ही देश की प्रगति संभव है और कृषि नवाचार, वैज्ञानिक सोच तथा युवाओं की सक्रिय भागीदारी भारत को आत्मनिर्भर और समृद्ध राष्ट्र बनाने की दिशा में निर्णायक भूमिका निभाएगी।

Pratahkal Newsroom

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