ब्यावर में 17 वर्षों बाद आचार्य महाश्रमण का ऐतिहासिक मंगल प्रवेश: इच्छाओं के शमन और संयम का दिया संदेश
ब्यावर में 17 साल बाद तेरापंथ धर्मसंघ के आचार्य महाश्रमण का धवल सेना के साथ ऐतिहासिक मंगल प्रवेश हुआ। अहमदाबाद चातुर्मास के बाद ब्यावर पहुंचे आचार्य श्री ने जवाहर भवन की धर्म सभा में इच्छाओं के त्याग और संयमित जीवन का संदेश दिया। इस भव्य स्वागत समारोह में शहर के गणमान्य नागरिकों सहित भारी संख्या में जैन समाज के श्रद्धालु मौजूद रहे।

ब्यावर। आध्यात्मिक ऊर्जा और श्रद्धा के सैलाब के बीच जैन श्वेतांबर तेरापंथ धर्मसंघ के 11वें अधिशास्ता, शांतिदूत आचार्य महाश्रमण ने शनिवार की सुबह सवेरे ब्यावर की धरा पर कदम रखा। अहमदाबाद में वर्षावास चातुर्मास की सफलतापूर्वक संपन्नता के बाद, धवल सेना के साथ बर के रास्ते ब्यावर पहुंचे आचार्य श्री का स्वागत किसी उत्सव से कम नहीं था। लगभग 17 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद अपने आराध्य के आगमन पर समूचा ब्यावर शहर "ओउम् अर्हम्" और जैन धर्म के गगनभेदी जयकारों से गुंजायमान हो उठा, जिससे वातावरण पूरी तरह धर्ममय हो गया।
शहर की सीमा पर आचार्य महाश्रमण प्रवास व्यवस्था समिति, श्री जैन श्वेतांबर तेरापंथ सभा, युवक परिषद और महिला मंडल के पदाधिकारियों सहित बड़ी संख्या में जैन धर्मावलंबियों ने उनकी भव्य अगवानी की। धवल सेना की गरिमामयी उपस्थिति और आचार्य श्री के ओजस्वी व्यक्तित्व ने श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया। एक दिवसीय प्रवास के इस महत्वपूर्ण अवसर पर स्थानीय जवाहर भवन में एक विशेष धर्म सभा का आयोजन किया गया, जहाँ आचार्य श्री ने अपने अमृत वचनों से श्रावक-श्राविकाओं का मार्ग प्रशस्त किया।
धर्म सभा को संबोधित करते हुए आचार्य महाश्रमण ने जीवन के गूढ़ रहस्यों को सरल शब्दों में पिरोते हुए कहा कि मानवीय इच्छाएं आकाश की भांति अनंत हैं, जिनका कभी अंत नहीं होता। उन्होंने जोर देकर कहा कि अभिलाषा ही मनुष्य के दुखों का मूल कारण है, इसलिए यदि सुखी जीवन व्यतीत करना है तो इच्छाओं का शमन करना अनिवार्य है। आचार्य श्री ने उपस्थित जनसमूह को नैतिकता, मैत्रीभाव और सादगीपूर्ण जीवन जीने का संकल्प दिलाया। उन्होंने कहा कि संयम ही वह मार्ग है जो व्यक्ति को सच्ची शांति की ओर ले जाता है। प्रवचन के पश्चात आचार्य श्री ने सभी श्रद्धालुओं को मांगलिक प्रदान कर आशीर्वाद दिया।
इस ऐतिहासिक धर्म सभा और स्वागत समारोह के दौरान समाज के गणमान्य नागरिक और प्रमुख व्यक्तित्व उपस्थित रहे। आयोजन में मुख्य रूप से गौतम गोखरू, धनराज रांका, मनीष रांका, रमेशचंद श्रीश्रीमाल, शेर सिंह मरलेचा, महेंद्र दुग्गङ, नौरत दुग्गङ, मुकेश रांका, कमलेश श्रीश्रीमाल, कमल छाजेङ, पुखराज बङौला, सुनीता सकलेचा, चंद्रकांता दुग्गङ, कनकराज सांखला, प्रकाश चंद चौपङा, राजेश रांका, अशोक रांका और पीयूष दक सहित अनेक श्रद्धालु मौजूद थे। 17 साल बाद हुए इस प्रवास ने ब्यावर के तेरापंथ समाज में नई चेतना का संचार किया है, जो आने वाले लंबे समय तक आध्यात्मिक चर्चाओं का केंद्र बना रहेगा।

Pratahkal Bureau
प्रातःकाल ब्यूरो, प्रातःकाल न्यूज़ की वह समर्पित संपादकीय टीम है, जो सटीक, सामयिक और निष्पक्ष समाचार पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा ब्यूरो राजनीति, समाज, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय मामलों में सत्यापित रिपोर्टिंग, गहन विश्लेषण और जिम्मेदार पत्रकारिता पर अपना ध्यान केंद्रित करता है।
