आबूपर्वत की सुरम्य वादियों और पौराणिक विरासत को अब एक नई वैश्विक पहचान मिलने जा रही है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने आबूपर्वत विकास समिति की बैठक की अध्यक्षता करते हुए आबूराज के सर्वांगीण विकास के लिए एक महत्वाकांक्षी ब्लूप्रिंट को हरी झंडी दी है। सरकार की ओर से इस पहाड़ी क्षेत्र में शहरी विकास, बेहतर सड़क संपर्क, आधुनिक पार्किंग और सुगम आवागमन जैसी विश्वस्तरीय सुविधाएं विकसित करने का निर्णय लिया गया है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि आबूराज का यह विकास ‘विकास भी, विरासत भी’ के मूल मंत्र के अनुरूप होगा, जिसमें क्षेत्र की पर्यावरणीय और आध्यात्मिक विशिष्टताओं का संरक्षण सर्वोच्च प्राथमिकता पर रहेगा।

बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने नक्की झील के जीर्णोद्धार, प्रकाश व्यवस्था में सुधार और सीवरेज सिस्टम को सुदृढ़ करने के लिए अधिकारियों को विशेष दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने आबूपर्वत को पूरी तरह से अतिक्रमण मुक्त और स्वच्छ बनाने पर जोर देते हुए निर्माण सामग्री के आवागमन की मॉनिटरिंग और ऑनलाइन कार्यप्रणाली में पारदर्शिता लाने के आदेश दिए। राज्य सरकार आबूराज को एक आदर्श ‘क्लीन-ग्रीन’ और आध्यात्मिक केंद्र के रूप में स्थापित करने के लिए 100 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं पर कार्य करेगी। इसमें विवेकानंद पार्क का सौंदर्यीकरण, गुरु शिखर का सुदृढ़ीकरण, अर्बुदा माता और दत्तात्रेय मंदिर का विकास, नमो उद्यान का निर्माण और ई-वाहनों को बढ़ावा देना प्रमुख है। मुख्यमंत्री ने संभागीय आयुक्त और मुख्य सचिव को इन कार्यों की निरंतर निगरानी करने का दायित्व सौंपा है, ताकि निर्धारित समय सीमा में आबूपर्वत का कायाकल्प किया जा सके।

Next Story