जयपुर में उमड़ा आस्था का सैलाब: राम कथा में संतों का महामिलन, जगद्गुरु रामभद्राचार्य के जन्मोत्सव पर दिखा अद्भुत दृश्य
जयपुर के नींदड़ में आयोजित राम कथा के आठवें दिन जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य के ७७वें जन्मोत्सव पर संतों का विराट मिलन हुआ। श्री अमरापुर स्थान के संत मोहन लाल जी और संत नवीन जी ने जगद्गुरु से आशीर्वाद लिया। इस भव्य समारोह में स्वामी कृष्णानंद जी और आचार्य रामचंद्र दास जी की गरिमामय उपस्थिति रही। पढ़िए इस आध्यात्मिक समागम की पूरी रिपोर्ट।

जयपुर। गुलाबी नगरी और छोटी काशी के नाम से विख्यात जयपुर की पावन धरा इन दिनों भक्ति के चरम उत्कर्ष की साक्षी बन रही है। सीकर रोड स्थित नींदड़ में आयोजित भव्य राम कथा के आठवें दिन का दृश्य तब ऐतिहासिक हो गया जब जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य जी महाराज के ७७वें जन्मोत्सव के पावन अवसर पर संतों का एक विराट और पारस्परिक अद्भुत मिलन हुआ। आस्था, समर्पण और सनातन संस्कृति के इस समागम ने न केवल भक्तों को भावविभोर किया, बल्कि जयपुर की धरती पर आध्यात्मिक एकजुटता का एक नया अध्याय भी लिख दिया।
इस गरिमामय समारोह में आस्था और भक्ति के प्रतिष्ठित केंद्र श्री अमरापुर स्थान के पूज्य संत श्री मोहन लाल जी (संत मोनूराम जी) एवं संत नवीन जी का आगमन हुआ। यहाँ उन्हें प्रखर विद्वान जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य जी महाराज, गौसेवा मिशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष पूज्य स्वामी कृष्णानंद जी महाराज और तुलसी पीठ चित्रकूट के उत्तराधिकारी आचार्य रामचंद्र दास जी महाराज का विशेष सानिध्य एवं आशीर्वाद प्राप्त हुआ। संतों के इस मिलन ने वातावरण को पूरी तरह दिव्य ऊर्जा से सराबोर कर दिया, जहाँ केवल ज्ञान और सेवा की चर्चा चहुंओर व्याप्त रही।
श्रद्धा के इस महाकुंभ में संत श्री मोहन लाल जी महाराज ने जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य जी महाराज को हिंदू धर्म का पारंपरिक 'राम नाम' का दुपट्टा ओढ़ाकर उनका अभिनंदन किया और उनसे मंगलमय आशीर्वाद प्राप्त किया। इसके साथ ही श्री अमरापुर दरबार के संतों द्वारा जगद्गुरु को 'पावन श्री अमरापुर दर्शन' पुस्तक भेंट की गई। प्रत्युत्तर में जगद्गुरु ने भी आत्मीय स्नेह प्रकट करते हुए संत श्री का अभिवादन दुपट्टा पहनाकर किया। इस आध्यात्मिक विनिमय के दौरान पूज्य संत मोहन लाल जी ने जगद्गुरु को 'सतनाम साक्षी' का दुपट्टा पहनाकर गुरुवर के प्रति अपनी अगाध श्रद्धा व्यक्त की।
गौरतलब है कि इस विराट आयोजन में पूर्व में बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री और योगगुरु बाबा रामदेव महाराज भी दर्शन हेतु पधार चुके हैं, जिससे इस कथा की महत्ता और भी बढ़ गई है। संतों का यह पारस्परिक मिलन केवल एक औपचारिक भेंट नहीं, बल्कि भारतीय परंपराओं और सनातन मूल्यों को सुदृढ़ करने वाला एक ऐतिहासिक क्षण सिद्ध हुआ है। जयपुर के नींदड़ में उमड़ा यह जनसैलाब और संतों का आशीर्वाद, समाज में शांति और धर्म के मार्ग पर चलने की एक नई प्रेरणा जागृत कर गया है।

Pratahkal Bureau
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