जयपुर में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब: मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने जगद्गुरु रामभद्राचार्य के जन्मोत्सव पर टेका मत्था, कहा- 'राम हमारे रोम-रोम में'
जयपुर के नींदड़ में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने जगद्गुरु स्वामी श्री रामभद्राचार्य जी के जन्मोत्सव कार्यक्रम में शिरकत कर आशीर्वाद लिया। रामभक्ति और सामाजिक सरोकारों से ओत-प्रोत इस आयोजन में मुख्यमंत्री ने दिव्यांगों की सहायता की और स्वच्छताकर्मियों का सम्मान किया। जानिए कैसे जयपुर की धरा पर गूंजे वेद मंत्र और राम नाम के स्वर, जिसमें विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी सहित कई दिग्गज शामिल हुए।

जयपुर की धरा बुधवार को भक्ति और शक्ति के अद्भुत संगम की साक्षी बनी, जब प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा ने नींदड़ में आयोजित जगद्गुरु स्वामी श्री रामभद्राचार्य जी महाराज के जन्मोत्सव कार्यक्रम में शिरकत की। अपनी धर्मपत्नी के साथ कार्यक्रम में पहुंचे मुख्यमंत्री ने जगद्गुरु का पावन आशीर्वाद लिया और उन्हें जन्मदिवस की भावपूर्ण शुभकामनाएं प्रेषित कीं। इस भव्य आयोजन में न केवल अध्यात्म की गूंज सुनाई दी, बल्कि सामाजिक सरोकारों की एक नई इबारत भी लिखी गई। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए अत्यंत भावुक और ओजस्वी शब्दों में कहा कि भगवान श्रीराम भारत की आत्मा हैं और वे हमारे रोम-रोम में बसते हैं। उन्होंने जयपुर में आयोजित हो रही श्रीराम कथा को एक 'पुनीत संयोग' करार देते हुए कहा कि हनुमान चालीसा के पवित्र स्वर और वेद मंत्रों की गूंज ने पूरे वातावरण को दिव्यता से सराबोर कर दिया है।
मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने जगद्गुरु रामभद्राचार्य जी के व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए उन्हें इस आधुनिक युग का महान विद्वान, तपस्वी और अनन्य रामभक्त बताया। उन्होंने कहा कि जगद्गुरु ने अपनी कठोर तपस्या के बल पर न केवल देश बल्कि संपूर्ण विश्व में भारतीय संस्कृति की ध्वजा को फहराया है। चित्रकूट की पावन धरा से लेकर सात समंदर पार तक, जगद्गुरु ने अपनी अमृतमयी वाणी से श्रीराम कथा के माध्यम से ज्ञान की ज्योति जलाई है। मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से तुलसी पीठ की स्थापना का उल्लेख करते हुए कहा कि रामायण और हिंदी साहित्य के संरक्षण के लिए जगद्गुरु द्वारा किया गया कार्य अद्वितीय और वंदनीय है। उन्होंने प्रभु श्रीराम के चरित्र को मानवता का सर्वोच्च आदर्श बताते हुए युवाओं से मर्यादा, सत्य और धर्म के पथ पर चलने का आह्वान किया।
यह कार्यक्रम केवल धार्मिक उद्घोष तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें मानवीय संवेदनाओं के विविध रंग भी देखने को मिले। मुख्यमंत्री ने रामानंद मिशन की ओर से दिव्यांग छात्र-छात्राओं को सहायक उपकरण वितरित कर उनके जीवन में संबल प्रदान करने का प्रयास किया। इसके साथ ही, सामाजिक जिम्मेदारी का निर्वहन करते हुए उन्होंने युवाओं को सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक करने के लिए हेलमेट सौंपे और स्वच्छता के प्रहरियों, यानी स्वच्छताकर्मियों का सार्वजनिक अभिनंदन कर उन्हें सम्मानित किया। इस गरिमामयी समारोह में मुख्यमंत्री ने साध्वी ऋतंभरा का श्रीफल और दुपट्टा भेंट कर भव्य स्वागत किया। कार्यक्रम में सत्ता और संगठन के साथ-साथ संत समाज की भी व्यापक उपस्थिति रही। विधानसभा अध्यक्ष श्री वासुदेव देवनानी, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री श्री अविनाश गहलोत, सांसद श्री मदन राठौड़ और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के क्षेत्र प्रचारक श्री निंबाराम सहित अनेक गणमान्य व्यक्तियों और साधु-संतों की उपस्थिति ने इस जन्मोत्सव को ऐतिहासिक बना दिया। यह आयोजन न केवल एक संत के प्रति सम्मान का प्रतीक था, बल्कि राजस्थान की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक चेतना को पुनर्जीवित करने वाला एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुआ।

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