जयपुर में ग्रामीण सशक्तिकरण की नई क्रांति: राजीविका और MNIT के बीच ऐतिहासिक समझौता
जयपुर में राजस्थान ग्रामीण आजीविका विकास परिषद् (राजीविका) और एमएनआईटी के बीच एक महत्वपूर्ण एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए। राज्य मिशन निदेशक नेहा गिरि और डॉ. प्रियंका हरजूले की उपस्थिति में हुई इस साझेदारी का उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं के सशक्तिकरण हेतु योजनाओं का वैज्ञानिक मूल्यांकन और शोध आधारित विकास सुनिश्चित करना है, जिससे प्रदेश में सतत आजीविका के नए अवसर पैदा होंगे।

जयपुर। राजस्थान की ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक तकदीर बदलने और स्वयं सहायता समूहों को आधुनिकता की नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए राजधानी जयपुर में एक बड़े अध्याय की शुरुआत हुई है। प्रदेश में महिला सशक्तिकरण को साक्ष्य-आधारित और वैज्ञानिक आधार प्रदान करने के उद्देश्य से राजस्थान ग्रामीण आजीविका विकास परिषद् (राजीविका) और देश के प्रतिष्ठित मालवीय राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एमएनआईटी), जयपुर के बीच एक अत्यंत महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। मंगलवार को हुए इस समझौते ने राज्य में ग्रामीण विकास की कार्यप्रणाली को एक नई दिशा देने का संकल्प दोहराया है।
इस साझेदारी का मुख्य केंद्र बिंदु आगामी वर्ष में विभिन्न सर्वेक्षणों और सूक्ष्म अध्ययन कार्यों का निष्पादन करना है। यह महज एक कागजी औपचारिकता नहीं, बल्कि अकादमिक विशेषज्ञता और जमीनी अनुभवों के मिलन की एक ऐसी पहल है जो भविष्य में नीतिगत निर्णयों की गुणवत्ता को नई धार प्रदान करेगी। राजीविका द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं और कार्यक्रमों के प्रभावी मूल्यांकन के लिए अब एमएनआईटी के शोध और विश्लेषण का सहयोग लिया जाएगा, जिससे योजनाओं की संरचना में न केवल सुधार होगा बल्कि उनके क्रियान्वयन में आने वाली चुनौतियों को भी वैज्ञानिक ढंग से दूर किया जा सकेगा।
राजधानी में आयोजित इस गरिमामयी एमओयू हस्ताक्षर कार्यक्रम के दौरान राजीविका की ओर से राज्य मिशन निदेशक श्रीमती नेहा गिरि और एमएनआईटी की ओर से सहायक प्रोफेसर डॉ. प्रियंका हरजूले उपस्थित रहीं। इन दोनों संस्थानों के शीर्ष प्रतिनिधित्व ने इस बात पर जोर दिया कि यह समन्वय तथ्यपरक और परिणामोन्मुखी कार्यप्रणाली को सुदृढ़ करने में मील का पत्थर साबित होगा। इस आधिकारिक गठबंधन से यह सुनिश्चित होगा कि योजनाओं का लाभ अंतिम छोर पर बैठी महिला तक पारदर्शी और प्रभावी तरीके से पहुंचे।
विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीकी संस्थान और ग्रामीण विकास परिषद का यह साथ राज्य में स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी लाखों महिलाओं के लिए सतत आजीविका के नए द्वार खोलेगा। यह साझेदारी न केवल साक्ष्य-आधारित विकास को बढ़ावा देगी, बल्कि राजस्थान के ग्रामीण परिवेश में एक ऐसे मजबूत आर्थिक ढांचे का निर्माण करेगी जो पूरी तरह से शोध और आधुनिक मानदंडों पर आधारित होगा। इस दूरदर्शी पहल ने यह स्पष्ट कर दिया है कि राजस्थान अब ग्रामीण विकास के क्षेत्र में पारंपरिक तरीकों के साथ-साथ वैज्ञानिक दृष्टिकोण को अपनाकर एक स्वर्णिम भविष्य की ओर कदम बढ़ा रहा है।

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