जयपुर। गुलाबी नगरी के उन विशेष योग्यजनों के लिए एक सुखद और जीवन बदलने वाली खबर सामने आई है, जो मांसपेशीय दुर्विकास (मस्कुलर डिस्ट्रॉफी) जैसी गंभीर शारीरिक चुनौती से जूझ रहे हैं। राजस्थान सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग ने इन दिव्यांगजनों की आत्मनिर्भरता की राह में आ रही बाधाओं को दूर करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। विभाग की इस पहल के तहत अब जिले के पात्र विशेष योग्यजनों को निःशुल्क इलेक्ट्रिक पावर व्हीलचेयर प्रदान की जाएगी, जिससे उनकी गतिशीलता के साथ-साथ उनके आत्मविश्वास को भी नए आयाम मिलेंगे।

इस कल्याणकारी योजना की विस्तृत जानकारी साझा करते हुए सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के उप निदेशक डॉ जितेंद्र कुमार सेठी ने बताया कि यह कदम मस्कुलर डिस्ट्रॉफी से पीड़ित व्यक्तियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने और उन्हें दैनिक कार्यों के लिए दूसरों पर निर्भरता कम करने के उद्देश्य से उठाया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि गतिशीलता ही स्वतंत्रता की पहली सीढ़ी है, और इलेक्ट्रिक व्हीलचेयर के माध्यम से ये विशेष योग्यजन न केवल स्वयं विचरण कर सकेंगे बल्कि अपनी क्षमताओं का बेहतर प्रदर्शन भी कर पाएंगे।

योजना की पात्रता और तकनीकी बारीकियों पर प्रकाश डालते हुए डॉ जितेंद्र कुमार सेठी ने सूचित किया कि जयपुर जिले के ऐसे मूल निवासी इस सुविधा का लाभ उठा सकते हैं जिनके पास पीला या नीला श्रेणी का यूडीआईडी (UDID) दिव्यांग प्रमाण पत्र उपलब्ध है। पीली श्रेणी के अंतर्गत 40 से 79 प्रतिशत तक की दिव्यांगता और नीली श्रेणी में 80 प्रतिशत या उससे अधिक की दिव्यांगता वाले आवेदकों को इसमें प्राथमिकता दी जाएगी। प्रशासन ने आवेदन की प्रक्रिया को सरल रखते हुए इसे जिला एवं ब्लॉक स्तरीय कार्यालयों के माध्यम से सुलभ बनाया है।

इच्छुक आवेदकों को इस स्वर्णिम अवसर का लाभ उठाने के लिए 15 जनवरी 2026 तक का समय दिया गया है। आवेदन पत्र के साथ अभ्यर्थियों को अपने मूल निवास प्रमाण पत्र, दिव्यांगता प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र, आधार एवं जन आधार कार्ड, जाति प्रमाण पत्र, और जन्म तिथि के प्रमाण के साथ-साथ नवीन स्वप्रमाणित फोटो संलग्न करना अनिवार्य होगा। यदि आवेदक पेंशनभोगी है, तो उन्हें पीपीओ की प्रति भी जमा करानी होगी। समयबद्धता का ध्यान रखते हुए सभी दस्तावेज निर्धारित तिथि तक विभागीय कार्यालय में प्रस्तुत करने होंगे।

प्रशासन की यह पहल केवल एक उपकरण वितरण कार्यक्रम मात्र नहीं है, बल्कि यह उन परिवारों के चेहरों पर मुस्कान लाने का एक प्रयास है जो वर्षों से अपनों की गतिहीनता को देख रहे थे। 15 जनवरी की समयसीमा इन विशेष योग्यजनों के जीवन में एक नए सवेरे की दस्तक दे सकती है, जहां बिजली की रफ्तार वाली ये व्हीलचेयर उनके सपनों को हकीकत में बदलने का माध्यम बनेंगी। जयपुर जिला प्रशासन का यह मानवीय दृष्टिकोण निश्चित रूप से समावेशी समाज के निर्माण में एक मील का पत्थर साबित होगा।

Pratahkal Newsroom

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