जयपुर में इतिहास रचने वाली चित्रकला क्रांति: 1.8 लाख से अधिक विद्यार्थियों ने कैनवास पर उकेरा 'पंच गौरव' का गौरवशाली स्वरूप
जयपुर में जिला कलक्टर डॉ. जितेन्द्र कुमार सोनी के निर्देशन में 'पंच गौरव' चित्रकला प्रतियोगिता ने रचा इतिहास। 5,933 स्कूलों के 1.87 लाख से अधिक विद्यार्थियों ने आमेर दुर्ग, रत्नाभूषण और स्थानीय उत्पादों को कैनवास पर उकेरा। मुख्यमंत्री की मंशानुसार आयोजित इस भव्य कार्यक्रम का उद्देश्य जयपुर की सांस्कृतिक और सामाजिक विरासत का संरक्षण करना है। जानिए कैसे एक साथ चलीं 1.8 लाख कूंचियां।

जयपुर। गुलाबी नगरी की फिजां में मंगलवार को रंगों और रचनात्मकता का एक ऐसा अनूठा संगम देखने को मिला, जिसने कला और संस्कृति के संरक्षण की नई इबारत लिख दी है। मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा की दूरगामी सोच को धरातल पर उतारते हुए जयपुर जिला प्रशासन ने 'पंच गौरव' योजना के अंतर्गत एक विशाल जिला स्तरीय चित्रकला प्रतियोगिता का आयोजन किया, जिसमें जन-भागीदारी का एक अभूतपूर्व दृश्य सामने आया। जिला कलक्टर डॉ. जितेन्द्र कुमार सोनी के कुशल निर्देशन में आयोजित इस भव्य गतिविधि ने न केवल बच्चों की कला को मंच प्रदान किया, बल्कि जयपुर की विशिष्ट पहचान को भावी पीढ़ी के मानस पटल पर सदैव के लिए अंकित कर दिया।
इस महा-अभियान की विशालता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जिले के कुल 5 हजार 933 विद्यालयों में एक साथ कूंचियां चलीं और 1 लाख 87 हजार 222 विद्यार्थियों ने अपनी कल्पनाशीलता को कैनवास पर जीवंत किया। यह आयोजन मात्र एक प्रतियोगिता न रहकर एक उत्सव में तब्दील हो गया, जहां सरकारी और निजी शिक्षण संस्थानों के बीच कलात्मक सेतु का निर्माण हुआ। अतिरिक्त जिला कलक्टर (जयपुर प्रथम) श्रीमती विनीता सिंह के अनुसार, इस प्रतियोगिता में शैक्षिक जगत की सक्रियता उल्लेखनीय रही, जिसमें 2 हजार 999 राजकीय विद्यालयों के 94 हजार 784 छात्र-छात्राओं और 2 हजार 934 निजी विद्यालयों के 92 हजार 438 विद्यार्थियों ने अपनी कला का प्रदर्शन कर जयपुर की सांस्कृतिक एवं सामाजिक विरासत को सशक्त स्वर दिया।
मुख्य आयोजना अधिकारी डॉ. सुदीप कुमावत ने आयोजन की बारीकियों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि विद्यार्थियों ने 'पंच गौरव' की थीम को अपनी कूंची के माध्यम से बेहद भावनात्मक और आकर्षक ढंग से प्रस्तुत किया। नन्हे कलाकारों ने 'एक जिला–एक खेल' के तहत कबड्डी के मैदान की ऊर्जा, 'एक जिला–एक उपज' के रूप में आँवला की शुद्धता, और 'एक जिला–एक वनस्पति' के तौर पर लिसोड़ा की उपयोगिता को रंगों में ढाला। यही नहीं, 'एक जिला–एक उत्पाद' के रूप में जयपुर के विश्वप्रसिद्ध रत्नाभूषणों की चमक और 'एक जिला–एक पर्यटन स्थल' के रूप में विश्व धरोहर आमेर दुर्ग की भव्यता इन चित्रों में बोलती हुई नजर आई।
प्रशासन की इस प्रभावी पहल ने जिले के उत्पादों और ऐतिहासिक धरोहरों के प्रति जागरूकता की एक नई लहर पैदा की है। यह प्रतियोगिता केवल रिकॉर्ड बनाने के लिए नहीं, बल्कि भावी पीढ़ी में अपनी परंपराओं और विशिष्टताओं के संरक्षण हेतु संवेदनशीलता विकसित करने के उद्देश्य से सफल रही है। जिला प्रशासन का यह कदम जयपुर के समग्र विकास और सांस्कृतिक संवर्धन की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा, जो आने वाले समय में जिले की आर्थिक और सामाजिक पहचान को वैश्विक पटल पर और अधिक मजबूती प्रदान करेगा।

Pratahkal Bureau
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