उदयपुर/जयपुर। झीलों की नगरी उदयपुर आगामी 8 एवं 9 जनवरी को भारतीय सहकारिता आंदोलन के एक ऐतिहासिक पड़ाव की साक्षी बनने जा रही है। सहकारिता मंत्रालय, भारत सरकार के तत्वावधान में आयोजित होने वाली दो दिवसीय 'जोनल रिव्यू कॉन्फ्रेंस' में केंद्र और राज्यों के बीच सहकारिता के सामंजस्य और विकास की नई इबारत लिखी जाएगी। यह सम्मेलन केवल एक प्रशासनिक बैठक मात्र नहीं है, बल्कि 'सहकार से समृद्धि' के विजन को धरातल पर उतारने के लिए देश भर के नीति-निर्धारकों का एक महाकुंभ है, जिसमें सहकारिता क्षेत्र की प्रगति की सूक्ष्म समीक्षा के साथ-साथ भविष्य का रोडमैप तैयार किया जाएगा।

इस गरिमामयी कॉन्फ्रेंस के उद्घाटन सत्र का नेतृत्व सहकारिता मंत्रालय, भारत सरकार के सचिव डॉ. आशीष कुमार भूटानी करेंगे, जो अपने संबोधन से देश की सहकारी यात्रा को नई दिशा प्रदान करेंगे। वहीं, राजस्थान के मुख्य सचिव श्री वी. श्रीनिवास वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सत्र को संबोधित कर राज्य की सहभागिता और प्रतिबद्धता को रेखांकित करेंगे। कार्यक्रम की शुरुआत में सहकारिता मंत्रालय के संयुक्त सचिव (सीटीपी प्रभाग) द्वारा सहकारिता की वर्तमान स्थिति और लक्ष्यों पर एक व्यापक ओवरव्यू प्रस्तुतीकरण दिया जाएगा, जबकि राजस्थान की सहकारिता विभाग की शासन सचिव श्रीमती आनन्दी स्वागत उद्बोधन के माध्यम से अतिथियों का अभिनंदन करेंगी।

दो दिनों तक चलने वाले इस वैचारिक मंथन में कुल 12 सत्र आयोजित किए जाएंगे, जिनमें सहकारिता विभाग की शासन सचिव एवं रजिस्ट्रार, सहकारी समितियां श्रीमती आनन्दी के अनुसार, पैक्स (PACS) के कायाकल्प से लेकर आधुनिक बैंकिंग तक के सफर पर विस्तृत चर्चा होगी। सम्मेलन के पहले दिन प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (पैक्स), एआरडीबी और आरसीएस कार्यालयों के कंप्यूटरीकरण की प्रगति जांची जाएगी। साथ ही, विश्व के सबसे बड़े अन्न भंडारण प्रोजेक्ट और नवीन मत्स्य व डेयरी समितियों के गठन जैसे महत्वाकांक्षी विषयों पर संवाद होगा। सहकारी बैंकिंग को सशक्त करने हेतु एनयूसीएफडीसी, सहकार सारथी और डिजिटल भुगतान जैसे आधुनिक वित्तीय साधनों पर भी विशेष ध्यान केंद्रित किया जाएगा।

सम्मेलन का एक महत्वपूर्ण पक्ष राष्ट्रीय स्तर पर गठित तीन बहुराज्यीय समितियों—बीबीएसएसएल, एनसीओएल एवं एनसीईएल की सदस्यता और 'श्वेत क्रांति 2.0' की समीक्षा करना है। श्रीमती आनन्दी ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय सहकारी डेटाबेस (NCD) के सुदृढ़ीकरण और बहु-राज्य सहकारी समितियों (MSCS) के सुधारों पर राज्यों के अनुभवों को साझा करना इस वार्ता का मुख्य केंद्र होगा। महिलाओं, युवाओं और वंचित वर्गों को सहकारिता से जोड़ने के लिए क्षमता निर्माण और नेतृत्व विकास पर भी गंभीर विमर्श किया जाएगा, ताकि सहकारिता आंदोलन अधिक समावेशी बन सके।

कॉन्फ्रेंस के दूसरे दिन का मुख्य आकर्षण ‘सहकार से समृद्धि-पैक्स अहैड’ विषय रहेगा, जिसमें स्टार्टअप इकोसिस्टम, मॉडल सहकारी गांव और आधुनिक सप्लाई चेन एकीकरण जैसे भविष्योन्मुखी विषयों पर चर्चा होगी। पूर्वोत्तर राज्यों की चुनौतियों और वहां की 'बेस्ट प्रेक्टिसेज' पर भी एक विशेष सत्र समर्पित रहेगा। 'सहकार संवाद' के जरिए सफल सहकारी संस्थाओं की प्रेरक कहानियों को साझा किया जाएगा, जिससे अन्य राज्य भी नवाचारों को अपना सकें। 9 जनवरी को समापन सत्र के पश्चात, सभी प्रतिभागी राजसमन्द एवं उदयपुर जिलों में स्थित सहकारी संस्थाओं और एफपीओ का भ्रमण कर जमीनी हकीकत और सफल मॉडल्स का प्रत्यक्ष अवलोकन करेंगे। अंतरराष्ट्रीय सहकारिता वर्ष-2025 की पूर्व तैयारी और मीडिया रणनीति पर चर्चा के साथ यह सम्मेलन भारतीय सहकारिता को वैश्विक पटल पर मजबूती से स्थापित करने का मार्ग प्रशस्त करेगा।

Pratahkal Newsroom

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