जयपुर में देश की सुरक्षा और संस्कृति का संगम: 17वें आदिवासी युवा आदान-प्रदान कार्यक्रम का भव्य शंखनाद
जयपुर के अमेठी विश्वविद्यालय में 16 से 22 जनवरी तक 17वें आदिवासी युवा आदान-प्रदान कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। पंकज यादव के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम में नक्सल प्रभावित 8 जिलों के 220 युवा भाग लेंगे। राज्यपाल और शीर्ष अधिकारियों संग संवाद के माध्यम से इन युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ने और 'एक भारत श्रेष्ठ भारत' की भावना को सशक्त करने की यह एक बड़ी राष्ट्रीय पहल है।

जयपुर। गुलाबी नगरी के अमेठी विश्वविद्यालय के प्रांगण में कल से भारत की एकता और अखंडता की एक नई इबारत लिखी जाएगी। युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय (माय भारत) और गृह मंत्रालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित होने जा रहे 17वें आदिवासी युवा आदान-प्रदान कार्यक्रम का आगाज 16 जनवरी से होने जा रहा है। यह सात दिवसीय आयोजन 22 जनवरी तक चलेगा, जिसका मुख्य ध्येय सुदूर वनांचलों में रहने वाले आदिवासी युवाओं को देश की मुख्यधारा से जोड़ना और उन्हें 'विकसित भारत' के संकल्प का भागीदार बनाना है।
इस महत्वपूर्ण राष्ट्रीय समागम का नेतृत्व जिला युवा अधिकारी पंकज यादव कर रहे हैं, जिनके निर्देशन में अमेठी विश्वविद्यालय का आधुनिक परिसर इन दिनों लघु भारत की छवि प्रस्तुत कर रहा है। कार्यक्रम की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित छत्तीसगढ़, झारखंड, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और ओडिशा जैसे राज्यों के अति-संवेदनशील 8 जिलों से 220 युवा शिरकत कर रहे हैं। कंधमाल, कालाहांडी, वेस्ट सिंहभूम, बालाघाट, गढ़चिरौली, दंतेवाड़ा, कांकेर और सुकमा जैसे क्षेत्रों से आए इन युवाओं का चयन सीआरपीएफ, बीएसएफ और एसएसबी जैसे अर्धसैनिक बलों द्वारा बड़ी बारीकी से किया गया है, ताकि हिंसा की छाया से दूर इन युवाओं को प्रगति के उजाले से परिचित कराया जा सके।
यह केवल एक भ्रमण मात्र नहीं है, बल्कि सात दिनों तक चलने वाली एक सघन कार्यशाला है। इन युवाओं को राजस्थान के महामहिम राज्यपाल महोदय के साथ सीधे संवाद का दुर्लभ अवसर प्राप्त होगा। साथ ही, वे लोकसभा सांसदों और मंत्रियों के साथ बैठकर नीति-निर्माण की प्रक्रियाओं को समझेंगे। जयपुर के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक वैभव का साक्षात्कार करने के साथ-साथ ये युवा राजस्थान के प्रेरक व्यक्तित्वों, आईएएस और आईपीएस अधिकारियों से करियर और जीवन कौशल के गुर सीखेंगे। सांस्कृतिक संध्याओं में जब दंतेवाड़ा का ढोल जयपुर की धरती पर गूंजेगा, तो 'एक भारत श्रेष्ठ भारत' की परिकल्पना धरातल पर साकार होती नजर आएगी। कौशल विकास और सरकारी योजनाओं की जानकारी के माध्यम से इन युवाओं में वह आत्मविश्वास भरने का प्रयास किया जा रहा है, जो उन्हें अपने क्षेत्रों में जाकर विकास का दूत बनाएगा। यह आयोजन न केवल उनकी सांस्कृतिक धरोहर को संजोने का माध्यम बनेगा, बल्कि उन्हें राष्ट्रीय एकता के सूत्र में पिरोकर एक सशक्त और समृद्ध भारत की नींव रखेगा।

Pratahkal Bureau
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