रंगों का संगम और बिना आग का स्वाद: विद्यार्थियों की रचनात्मकता ने बिखेरी बसंत और तिरंगे की अनूठी छटा
विद्यालय में आयोजित 'कुकिंग विदाउट फायर' प्रतियोगिता में कक्षा 6 से 9 के विद्यार्थियों ने बसंत पंचमी और तिरंगा थीम पर अपनी रचनात्मकता का प्रदर्शन किया। राधामोहन कचोलिया और मंजू शर्मा की उपस्थिति में बच्चों ने बिना आग के स्वादिष्ट व्यंजन बनाकर टीमवर्क, नेतृत्व और राष्ट्रीय एकता का संदेश दिया। जानिए कैसे स्वाद के साथ जुड़ी राष्ट्रभक्ति और नवाचार की यह अनूठी कहानी।

जयपुर। जब जज्बा और रचनात्मकता का मेल होता है, तो साधारण सी सामग्री भी कलाकृति बन जाती है। कुछ ऐसा ही नजारा हाल ही में आयोजित एक भव्य अंतर-कक्षा 'कुकिंग विदाउट फायर' प्रतियोगिता में देखने को मिला, जहाँ नन्हे हाथों ने बिना चूल्हा जलाए स्वाद और राष्ट्रभक्ति का ऐसा अनूठा संसार रचा कि देखने वाले दंग रह गए। कक्षा छह से नौ तक के विद्यार्थियों के लिए आयोजित इस समावेशी शिक्षण गतिविधि ने न केवल पाक कला के प्रति उनके कौशल को उभारा, बल्कि बसंत पंचमी की पीतवर्णीय आभा और तिरंगे के गौरवशाली रंगों से पूरे परिसर को सराबोर कर दिया।
इस गरिमामयी आयोजन की शोभा बढ़ाने के लिए विद्यालय सचिव राधामोहन कचोलिया, भवन मंत्री गोविंद मालपानी, तथा एमएमसी मेंबर्स कविता फोफलिया और अल्का खण्डेलवाल विशेष रूप से उपस्थित रहे। अतिथियों की उपस्थिति ने न केवल विद्यार्थियों का मनोबल बढ़ाया, बल्कि इस रचनात्मक पहल की महत्ता को भी रेखांकित किया। प्रतियोगिता के दौरान विद्यार्थियों को विभिन्न समूहों में विभाजित किया गया था, जिन्होंने अपनी कल्पनाशक्ति का परिचय देते हुए मिठाई, नमकीन और पेय श्रेणियों में एक से बढ़कर एक नवाचारी व्यंजन परोसे।
विद्यार्थियों की मेज पर सजे नारियल लड्डू, चॉकलेट मोदक, रसमलाई, डोनट्स, कस्टर्ड और पान लड्डू जैसे मिष्ठान्न जहाँ मुँह में मिठास घोल रहे थे, वहीं भेलपुरी, पपड़ी चाट, गोलगप्पे, सैंडविच और सलाद जैसे नमकीन व्यंजनों ने अपनी चटपटी प्रस्तुति से सबका मन मोह लिया। पेय पदार्थों में केसर मिल्क, मोजितो, ताजे ज्यूस और रंग-बिरंगे शरबतों ने बसंत की ताजगी का एहसास कराया। इन सभी व्यंजनों में सबसे खास बात यह रही कि विद्यार्थियों ने केवल स्वाद ही नहीं, बल्कि संविधान के मूल्यों और 'अनेकता में एकता' के संदेश को भी अपनी प्रस्तुति में पिरोया था। तिरंगे के तीन रंगों और बसंत के पीले रंग का सामंजस्य राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक समृद्धि का प्रतीक बनकर उभरा।
निर्णायक मंडल ने सूक्ष्मता से हर स्टाल का अवलोकन किया और पाया कि विद्यार्थियों ने पाक क्रिया के दौरान स्वच्छता, पोषक तत्वों की सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और कलात्मक प्रस्तुति का अनुकरणीय ध्यान रखा। प्रतियोगिता का समापन करते हुए प्राचार्या मंजू शर्मा ने इस आयोजन की सफलता पर हर्ष व्यक्त किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस प्रकार की गतिविधियों का मूल उद्देश्य केवल भोजन तैयार करना नहीं है, बल्कि समावेशी शिक्षा के माध्यम से विद्यार्थियों में टीमवर्क, नेतृत्व क्षमता, अनुशासन, सामंजस्य और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता जैसे जीवन कौशलों का बीजारोपण करना है। यह आयोजन बच्चों को एक जिम्मेदार और संवेदनशील नागरिक बनाने की दिशा में एक सशक्त कदम साबित हुआ।

Pratahkal Bureau
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