5 Day Banking: पांच दिवसीय कार्य सप्ताह लागू करने के लिए बैंककर्मियों का देशव्यापी विरोध
ईंधन बचत और राष्ट्रहित का हवाला देकर बैंक संगठनों ने काली पट्टी बांधकर जताया विरोध, केंद्र सरकार से की त्वरित निर्णय लेने की मांग।

जयपुर। वैश्विक युद्ध संकट के बीच देश में ईंधन की बचत और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखते हुए भारत सरकार से बैंकों में तत्काल प्रभाव से पांच दिवसीय कार्य सप्ताह (Five Day Banking) लागू करने की घोषणा करने की मांग बेहद तेज हो गई है। ऑल इंडिया बैंक एम्प्लॉईज एसोसिएशन के जनरल कौंसिल सदस्य, ऑल इंडिया कोआपरेटिव बैंक एम्पलाईज फेडरेशन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष तथा राजस्थान प्रदेश बैंक एम्पलाईज यूनियन के प्रान्तीय उप महासचिव व प्रमुख बैंक कर्मचारी नेता सूरज भान सिंह आमेरा ने इस संबंध में केंद्र सरकार से त्वरित निर्णय लेने का आह्वान किया है। वर्तमान में वैश्विक युद्ध संकट के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी अस्थिरता देखी जा रही है, जिससे आपूर्ति श्रृंखला बाधित होने के साथ-साथ देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर भी भारी दबाव बढ़ा है। इसी गंभीर संकट को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से ईंधन बचत और विदेशी मुद्रा संचय करने का विशेष आह्वान किया है, जिसके समर्थन में अब देश का पूरा बैंकिंग सेक्टर उठ खड़ा हुआ है।
यूएफबीयू के संयोजक महेश मिश्रा ने इस राष्ट्रीय मुहिम को आगे बढ़ाते हुए कहा कि देश की 1,29,500 शहरी और ग्रामीण बैंक शाखाओं में पूरी निष्ठा से कार्यरत सभी 16,50,000 राष्ट्रभक्त बैंक कर्मचारी और अधिकारी प्रधानमंत्री व भारत सरकार के इस राष्ट्रहित के संदेश का पूर्ण समर्थन करते हैं और इसमें अपनी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना चाहते हैं। बैंक कर्मचारी नेताओं ने याद दिलाया कि इससे पूर्व भी वैश्विक कोविड महामारी और नोटबंदी जैसे बड़े राष्ट्रीय आह्वान के समय इस वर्क फोर्स ने सरकार के साथ फ्रंट लाइन वॉरियर्स बनकर राष्ट्रहित में अग्रिम पंक्ति में रहकर कार्य किया है। बैंक नेता सूरज भान सिंह आमेरा ने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का “ईंधन बचाओ” संदेश केवल एक साधारण नारा नहीं बल्कि एक राष्ट्र धर्म है, और देश के बैंकों में पांच दिन का कार्य सप्ताह लागू करना इस दिशा में सबसे अहम, प्रभावी और व्यावहारिक कदम साबित होगा।
ईंधन बचत की दिशा में ठोस कदम उठाने की वकालत करते हुए देश के बैंक कर्मचारी और अधिकारी सामूहिक रूप से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत सरकार के वित्त मंत्रालय से यह मांग कर रहे हैं कि बैंकिंग क्षेत्र में इस व्यवस्था को बिना किसी देरी के लागू किया जाए। आमेरा के अनुसार, वर्तमान ईंधन संकट के दौर में पांच दिवसीय कार्य सप्ताह पूरी तरह से प्रासंगिक और आवश्यक हो चुका है। इससे देशभर के लाखों बैंककर्मियों का प्रतिदिन होने वाला आवागमन बंद होगा, जिससे पेट्रोल-डीजल की भारी बचत होगी जो इस राष्ट्रीय संकट के समय बेहद महत्वपूर्ण है। इसके साथ ही, साप्ताहिक एक अतिरिक्त अवकाश मिलने से सड़कों पर वाहनों का उपयोग घटेगा, जिससे प्रदूषण में भारी कमी आएगी और कार्बन उत्सर्जन को भी कम किया जा सकेगा। सहकार नेता आमेरा ने इस मांग के पक्ष में मजबूत प्रशासनिक और कानूनी तर्क देते हुए बताया कि अंतरराष्ट्रीय मानक के अनुसार विश्व के अधिकांश देशों सहित स्वयं भारत के रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI), बीमा क्षेत्र, नाबार्ड, सेबी, केंद्र व राज्य सरकार के विभिन्न विभागों और सरकारी उपक्रमों में पहले से ही 5 दिन का कार्य सप्ताह पूरी तरह लागू है। ऐसे में बैंकिंग क्षेत्र को भी इसी के अनुरूप लाना समय की मांग है। इससे बैंककर्मियों को पर्याप्त विश्राम मिलेगा जिससे उनकी कार्यक्षमता में वृद्धि होगी और ग्राहकों को और बेहतर सेवा मिल सकेगी। आज के आधुनिक डिजिटल बैंकिंग, नेट और मोबाइल बैंकिंग तथा एटीएम के युग में सप्ताह में 5 दिन बैंक शाखाएं खुला रहना आम उपभोक्ताओं और ग्राहकों के लिए भी पूरी तरह पर्याप्त है।
इस मांग को लेकर देशव्यापी स्तर पर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया है। संयोजक महेश मिश्रा ने बताया कि पांच दिन का बैंक सप्ताह लागू करने की मांग को लेकर आज देशभर के सभी बैंक कर्मियों ने अपनी-अपनी बैंक शाखाओं में काली पट्टी, ब्लैक बैज धारण कर और काली ड्रेस पहनकर काम किया तथा सरकार के समक्ष अपना कड़ा विरोध व्यक्त किया। बैंकिंग संगठनों ने सरकार से राष्ट्रहित में पुरजोर अपील की है कि युद्ध जैसे इस वैश्विक संकटकाल में ईंधन बचाने हेतु देशहित को सर्वोपरि रखा जाए और इस मांग पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेते हुए देश के सभी बैंकों में पांच दिवसीय कार्य सप्ताह लागू करने की आधिकारिक घोषणा की जाए।

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