खेजड़ी संरक्षण अधिनियम के प्रारूप पर मंथन, राजस्थान सरकार ने तेज किए प्रयास
संसदीय कार्य एवं विधि मंत्री जोगाराम पटेल की अध्यक्षता में गठित समिति ने विभिन्न राज्यों के कानूनों का अध्ययन कर सशक्त विधेयक तैयार करने पर चर्चा की।

जयपुर में आयोजित उच्च स्तरीय बैठक के दौरान राज्य वृक्ष खेजड़ी के संरक्षण हेतु प्रस्तावित अधिनियम के कानूनी प्रावधानों पर चर्चा करते मंत्री जोगाराम पटेल एवं अन्य सदस्य।
जयपुर, 11 मार्च 2026। राज्य वृक्ष खेजड़ी के संरक्षण और पर्यावरण संतुलन को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से राज्य सरकार द्वारा सख्त कानून लाने की दिशा में प्रयास तेज कर दिए गए हैं। इसी क्रम में जयपुर स्थित राजकीय आवास पर संसदीय कार्य एवं विधि मंत्री श्री जोगाराम पटेल की अध्यक्षता में गठित समिति की द्वितीय बैठक आयोजित की गई, जिसमें प्रस्तावित खेजड़ी संरक्षण अधिनियम के प्रारूप पर विस्तार से चर्चा करते हुए गहन मंथन किया गया।
उच्च स्तरीय बैठक में सम्मिलित हुए कई महत्वपूर्ण प्रतिनिधि
बैठक में वन एवं पर्यावरण विभाग के राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री संजय शर्मा, उद्योग राज्यमंत्री श्री के.के. बिश्नोई, विधायक श्री पब्बाराम बिश्नोई, पूर्व विधायक श्री बिहारी लाल बिश्नोई सहित विधि विभाग के अधिकारी तथा अन्य वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे। इस महत्वपूर्ण बैठक में खेजड़ी वृक्षों के संरक्षण से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। राज्य सरकार का उद्देश्य ऐसा मजबूत कानून तैयार करना है, जिससे खेजड़ी वृक्षों की अवैध कटाई पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित हो सके तथा प्रदेश की पारिस्थितिकी और पर्यावरणीय विरासत को सुरक्षित रखा जा सके।
राजस्थान की संस्कृति और अर्थव्यवस्था का आधार है खेजड़ी
प्रभारी मंत्री एवं संसदीय कार्य तथा विधि मंत्री श्री जोगाराम पटेल ने कहा कि "राज्य वृक्ष खेजड़ी राजस्थान की संस्कृति, पर्यावरण और ग्रामीण जीवन का अभिन्न हिस्सा है। प्रदेश की मरुस्थलीय पारिस्थितिकी में इसका अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। खेजड़ी वृक्ष न केवल पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में सहायक है, बल्कि पशुधन के लिए चारे की उपलब्धता तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसलिए इसके संरक्षण के लिए राज्य सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है।" उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में पर्यावरण संरक्षण तथा जनभावनाओं को ध्यान में रखते हुए खेजड़ी वृक्षों के संरक्षण के लिए प्रभावी एवं सशक्त कानूनी प्रावधान सुनिश्चित करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।
विभिन्न राज्यों के कानूनों का तुलनात्मक अध्ययन और भावी रणनीति
श्री पटेल ने बताया कि बैठक में अधिनियम के प्रस्तावित प्रारूप को लेकर विस्तृत चर्चा की गई तथा विभिन्न राज्यों में लागू वृक्ष संरक्षण संबंधी कानूनों का तुलनात्मक अध्ययन भी प्रस्तुत किया गया। समिति द्वारा वृक्ष संरक्षण के लिए तैयार किए जाने वाले प्रारूप विधेयक के विभिन्न प्रावधानों पर गहन मंथन किया गया तथा प्रत्येक बिंदु पर विस्तार से विचार-विमर्श करते हुए संभावित प्रावधानों पर सुझाव दिए गए। श्री पटेल ने कहा कि राज्य सरकार की यह पहल प्रदेश में पर्यावरण संरक्षण को सुदृढ़ बनाने तथा राज्य वृक्ष खेजड़ी के संरक्षण की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।
आगामी 22 मार्च को होगी समिति की अगली महत्वपूर्ण बैठक
बैठक में समिति द्वारा सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि आगामी बैठक में विधेयक का प्रारूप प्रस्तुत किया जाएगा, ताकि उसे अंतिम रूप देने की दिशा में आगे की प्रक्रिया पूरी की जा सके। पर्यावरण संरक्षण व जनभावनाओं को ध्यान में रखते हुए तैयार किए जा रहे इस सशक्त विधेयक को लेकर समिति की अगली बैठक 22 मार्च 2026 को आयोजित की जाना प्रस्तावित है, जिससे आने वाली पीढ़ियों के लिए राजस्थान की प्राकृतिक और पारिस्थितिक विरासत को सुरक्षित रखा जा सके।

Pratahkal Bureau
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