राजस्थान स्वास्थ्य सेवाओं का उन्नयन: 15वें वित्त आयोग से मिले ₹2700 करोड़
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के प्रयासों से 4 माह में रिकॉर्ड बजट जारी, एनएचएम और पीएम अभीम योजनाओं में राजस्थान ने स्थापित किए नए कीर्तिमान।

जयपुर। मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा के सतत प्रयासों और दूरदर्शी विजन के फलस्वरूप राजस्थान की स्वास्थ्य सेवाओं के उन्नयन की दिशा में अभूतपूर्व सफलता प्राप्त हुई है। राज्य में स्वास्थ्य ढांचे को सुदृढ़ बनाने के लिए केंद्र प्रवर्तित योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से प्रदेश को रिकॉर्ड धनराशि जारी की गई है। विगत पांच वर्षों के आंकड़ों पर दृष्टि डालें तो 15वें वित्त आयोग के तहत राजस्थान को प्राप्त कुल 4 हजार 300 करोड़ रुपये में से लगभग 2 हजार 700 करोड़ रुपये की विशाल राशि केवल पिछले चार महीनों में ही मुख्यमंत्री के विशेष प्रयासों से हासिल हुई है। यह उपलब्धि न केवल राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है, बल्कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) और पीएम अभीम (प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत हेल्थ इन्फ्रास्ट्रक्चर मिशन) जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं के क्रियान्वयन में भी राजस्थान ने नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत वर्ष 2025-26 के लिए केंद्र सरकार द्वारा स्वीकृत 2 हजार 383 करोड़ रुपये के लक्ष्य के विरुद्ध 2 हजार 398 करोड़ रुपये की राशि जारी की गई है, जो कुल स्वीकृत बजट का 100.61 प्रतिशत है। इसके साथ ही पीएम अभीम योजना के तहत भी प्रदेश को अब तक की सर्वाधिक 243 करोड़ रुपये की राशि प्राप्त हुई है। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री श्री गजेन्द्र सिंह खींवसर ने इस सफलता पर हर्ष व्यक्त करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री के कुशल नेतृत्व में प्रदेश का चिकित्सा विभाग प्राथमिक स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने, हेल्थ एंड वेलनेस सेंटरों के विस्तार और डायग्नोस्टिक सुविधाओं को गांव-गांव तक पहुँचाने के लिए पूरी निष्ठा से कार्य कर रहा है। इसी सक्रियता का परिणाम है कि केंद्र सरकार से मिलने वाली सहायता में विगत वर्षों की तुलना में भारी वृद्धि दर्ज की गई है।
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख शासन सचिव श्रीमती गायत्री राठौड़ ने वित्तीय विवरण साझा करते हुए बताया कि 15वें वित्त आयोग की राशि का उपयोग ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में स्वास्थ्य अवसंरचना के व्यापक विस्तार हेतु किया जा रहा है। इसमें भवन विहीन उप-स्वास्थ्य केंद्रों, पीएचसी एवं सीएचसी निर्माण के लिए 2 हजार 604.63 करोड़, ब्लॉक स्तर की सार्वजनिक स्वास्थ्य इकाइयों हेतु 145.38 करोड़ तथा ग्रामीण जांच सेवाओं के सुदृढ़ीकरण हेतु 764.14 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। इसके अतिरिक्त हेल्थ एंड वेलनेस सेंटरों के लिए 495 करोड़ और शहरी क्षेत्रों में प्राथमिक स्वास्थ्य एवं डायग्नोस्टिक सुविधाओं के लिए करोड़ों रुपये व्यय किए जा रहे हैं। आंकड़ों के अनुसार, एनएचएम के तहत व्यय प्रतिशत में भी निरंतर सुधार हुआ है, जो वर्ष 2021-22 के 72 प्रतिशत से बढ़कर वर्ष 2025-26 में 98 प्रतिशत के उच्च स्तर पर पहुंच गया है।
स्वास्थ्य सेवाओं के इस कायाकल्प पर प्रकाश डालते हुए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के मिशन निदेशक डॉ. अमित यादव ने बताया कि इन वित्तीय संसाधनों से प्रदेश के हजारों स्वास्थ्य केंद्रों का न केवल निर्माण हुआ है बल्कि उनका आधुनिक उन्नयन भी सुनिश्चित किया गया है। अब प्रदेश के सुदूर गांव-कस्बों तक गुणवत्तापूर्ण डायग्नोस्टिक सेवाएं उपलब्ध हैं। ब्लॉक स्तर पर स्थापित पब्लिक हेल्थ यूनिट्स से महामारी नियंत्रण और रोग प्रबंधन की क्षमता में क्रांतिकारी वृद्धि हुई है, जो अंततः राजस्थान को एक स्वस्थ और समृद्ध प्रदेश बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी।

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