जयपुर, 21 मई। मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा की घोषणाओं के अनुरूप राज्य में माटी कला को नई पहचान और गति प्रदान करने के उद्देश्य से जयपुर के बिचून औद्योगिक क्षेत्र में 'माटी कला सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' की स्थापना की जाएगी। यह केंद्र माटी कलाकारों को आधुनिक तकनीकों का प्रशिक्षण देने के साथ ही उनके लिए रोजगार के नवीन अवसर सृजित करने में मील का पत्थर साबित होगा।

श्रीयादे माटी कला बोर्ड के अध्यक्ष श्री प्रहलाद राय टाक ने गुरुवार को उद्योग भवन में आयोजित प्रेस वार्ता में बताया कि राज्य सरकार पारंपरिक कला को बढ़ावा देने और माटी कलाकारों के उत्थान के लिए निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने साझा किया कि विगत दो वर्षों में बोर्ड को पिछले दस वर्षों की तुलना में अधिक बजट प्राप्त हुआ है, जिससे इस क्षेत्र में नई संभावनाएं विकसित हुई हैं। प्रस्तावित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के माध्यम से कलाकारों के कौशल उन्नयन का कार्य किया जाएगा, वहीं प्रदेशभर के माटी कलाकारों एवं कामगारों के आर्टिजन कार्ड बनाने के लिए बोर्ड द्वारा विशेष शिविरों का आयोजन सुनिश्चित किया जाएगा।

श्री टाक ने प्रजापत-कुम्हार समाज की आराध्या एवं कुलदेवी श्रीयादे माता के पैनोरमा निर्माण की घोषणा के लिए मुख्यमंत्री का आभार जताते हुए कहा कि इससे माटी कलाकार समाज में नई ऊर्जा का संचार हुआ है। राज्य बजट घोषणा वर्ष 2026-27 की कार्ययोजना पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने बताया कि इस वर्ष 5 हजार विद्युत चालित चाक एवं मिट्टी गूंथने की मशीनों का वितरण किया जाएगा, जो उत्पादन क्षमता एवं गुणवत्ता में आमूलचूल वृद्धि करेंगे। इसके अतिरिक्त, इस वर्ष 100 माटी कला प्रशिक्षकों को तैयार करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिन्हें राज्य से बाहर विभिन्न स्थानों पर विशेष प्रशिक्षण दिलाया जाएगा। उल्लेखनीय है कि गत वर्ष भी 25 कलाकारों को उत्तर प्रदेश के खुर्जा में विशेष प्रशिक्षण प्रदान किया गया था।

प्रेस वार्ता के उपरांत, बोर्ड अध्यक्ष श्री प्रहलाद राय टाक एवं उद्योग एवं वाणिज्य आयुक्त श्री नीलाभ सक्सेना ने उद्योग भवन परिसर में पक्षियों के लिए परिण्डे लगाकर प्रदेशवासियों से भीषण गर्मी में मूक पक्षियों के लिए परिण्डे लगाने की अपील की।

बोर्ड की उपलब्धियों पर चर्चा करते हुए बताया गया कि मुख्यमंत्री द्वारा विमोचित पुस्तक ‘माटी राजस्थान री’ में बोर्ड के पिछले दो वर्षों के कार्यों का विवरण दर्ज है। साथ ही, प्रदेश की विभिन्न माटी कला विधाओं में उत्कृष्ट कार्य करने वाले 45 कलाकारों को ‘माटी के लाल’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। वर्तमान में बोर्ड आवा-कजावा पद्धति से कार्य करने वाले कामगारों के लिए वर्ष 2016 की गाइडलाइन की पालना हेतु विभिन्न विभागों से समन्वय कर रहा है। इसके साथ ही, माटी कलाकारों के बच्चों को छात्रवृत्ति एवं स्कूटी योजना का लाभ दिलाने के लिए सरकार को प्रस्ताव भेजा जाएगा। उद्योग भवन में निर्मित होने वाली ‘एक जिला-एक उत्पाद’ वॉल में माटी कला उत्पादों को स्थान दिया जाएगा और एमएसएमई पॉलिसी के माध्यम से मेलों एवं प्रदर्शनियों का आयोजन कर मिट्टी के बर्तनों के उपयोग के प्रति व्यापक जागरूकता फैलाई जाएगी।

Pratahkal Newsroom

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