राजस्थान एक जिला एक उत्पाद नीति 2024: स्थानीय उत्पादों को मिलेगी ग्लोबल पहचान
राजस्थान एक जिला एक उत्पाद नीति 2024: स्थानीय उत्पादों को मिलेगी ग्लोबल पहचान

मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार स्थानीय विकास को सुदृढ़ करने की दिशा में निरंतर निर्णायक कदम उठा रही है। इसी क्रम में 'एक जिला एक उत्पाद' (ओडीओपी) नीति-2024 के माध्यम से राजस्थान के प्रत्येक जिले की विशिष्ट सांस्कृतिक और शिल्पगत पहचान को वैश्विक स्तर पर स्थापित किया जा रहा है। यह महत्वाकांक्षी नीति न केवल स्थानीय उत्पादों, कारीगरों और उद्यमियों को सशक्त बना रही है, बल्कि प्रदेश में रोजगार सृजन और आर्थिक विकास के नए प्रतिमान भी स्थापित कर रही है। मुख्यमंत्री के इस विजन से गांवों में उद्यमिता को अभूतपूर्व बढ़ावा मिल रहा है और स्थानीय कौशल को अंतरराष्ट्रीय मंच उपलब्ध हो रहा है।
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा वर्ष 2047 तक 'विकसित भारत' के निर्माण के संकल्प को दोहराते हुए, मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा ने हर गांव, तहसील और जिले के समग्र स्थानीय विकास पर विशेष जोर दिया है। प्रधानमंत्री के 'वोकल फॉर लोकल' और 'सबका साथ-सबका विकास' के मंत्र को आत्मसात करते हुए यह नीति 'लोकल से ग्लोबल' के सपने को साकार कर रही है। ओडीओपी नीति के अंतर्गत राज्य के प्रत्येक जिले में एक विशिष्ट उत्पाद का चयन किया गया है ताकि स्थानीय संसाधनों और पारंपरिक कौशल का सर्वोत्तम उपयोग सुनिश्चित हो सके। इस नीति का मूल उद्देश्य प्रत्येक जिले की अद्वितीय पहचान को संरक्षित रखते हुए वहां के प्रमुख उत्पादों को प्रोत्साहित करना और उद्यमियों को तकनीकी सहयोग, वित्तीय सहायता एवं वैश्विक बाजार तक सुलभ पहुंच प्रदान करना है।
उद्यमियों को सशक्त बनाने के लिए राज्य सरकार द्वारा व्यापक वित्तीय एवं तकनीकी सहायता का प्रावधान किया गया है। नीति के अनुसार, नए लघु एवं सूक्ष्म ओडीओपी उद्यम स्थापित करने हेतु परियोजना लागत का अधिकतम 25 प्रतिशत (अधिकतम 25 लाख रुपये तक) मार्जिन मनी सब्सिडी के रूप में दिया जा रहा है। सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों के तकनीकी उन्नयन के लिए नवीनतम तकनीक एवं सॉफ्टवेयर के अधिग्रहण पर 50 प्रतिशत तक (अधिकतम 5 लाख रुपये) की वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है। इसके अतिरिक्त, उत्पादों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने हेतु राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय गुणवत्ता प्रमाणपत्रों तथा बौद्धिक संपदा अधिकारों (आईपीआर) पर होने वाले व्यय के लिए 3 लाख रुपये तक की सीमा में 75 प्रतिशत पुनर्भरण का लाभ दिया जा रहा है।
डिजिटल युग की आवश्यकताओं को देखते हुए, उत्पादों की मार्केटिंग और ब्रांडिंग पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उद्यमियों को ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से जोड़ने के लिए दो वर्ष तक प्रति वर्ष 1 लाख रुपये तक 75 प्रतिशत पुनर्भरण देय है। साथ ही, कैटलॉगिंग सेवाओं और ई-कॉमर्स वेबसाइटों के विकास हेतु 60 प्रतिशत (अधिकतम 75 हजार रुपये) तक की सहायता दी जा रही है। नीति के अंतर्गत उद्योगों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में भाग लेने पर भी पुनर्भरण सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। अब तक अनेक लाभार्थियों को सहायता राशि वितरित की जा चुकी है, जिससे प्रदेश में निवेश और उत्पादन इकाइयों के उन्नयन को नई गति मिली है। प्रशिक्षण कार्यक्रमों और विभिन्न प्रदर्शनियों के माध्यम से राजस्थान के स्थानीय

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