अजमेर। राजस्थान केंद्रीय विश्वविद्यालय (CURAJ) और भारतीय शिक्षण मंडल (चित्तौड़ प्रांत) के संयुक्त तत्वावधान में मंगलवार, 31 मार्च 2026 को भारतीय शिक्षण मंडल का 57वाँ स्थापना दिवस समारोह अत्यंत भव्यता एवं दिव्यता के साथ संपन्न हुआ। इस गरिमामय अवसर पर अखिल भारतीय संगठन मंत्री श्री बी. आर. शंकरानंद मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जिन्होंने 'भारतीय शिक्षण बोध' पत्रिका का विमोचन करते हुए शिक्षा के माध्यम से राष्ट्र पुनर्निर्माण का आह्वान किया।

समारोह को संबोधित करते हुए श्री बी. आर. शंकरानंद ने स्पष्ट किया कि रामत्व का अर्थ केवल नाम जाप तक सीमित नहीं है, अपितु इसका वास्तविक उद्देश्य एक स्वस्थ व्यक्ति, सुदृढ़ कुटुंब और समर्थ राष्ट्र का निर्माण करना है। उन्होंने जोर देकर कहा कि वर्तमान समय की महती आवश्यकता शिक्षा को व्यापार के चंगुल से मुक्त कर मूल्यों के सृजन की साधना बनाना है। उनके अनुसार, भव्यता बाह्य दर्शन का विषय है जबकि दिव्यता अंतर्मन की अनुभूति है। उन्होंने राम नवमी के पावन पर्व पर स्थापना दिवस के संयोग को रेखांकित करते हुए कहा कि शिक्षा में 'रामत्व' को प्रतिस्थापित करना अनिवार्य है, क्योंकि 'रामकार्य' ही वास्तव में राष्ट्र निर्माण है।

मुख्य अतिथि ने अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में निर्भयता को मनुष्यता का प्रमुख लक्षण बताया। स्वामी विवेकानंद की कोलंबो से अल्मोड़ा तक की दिग्विजय यात्रा का संदर्भ देते हुए उन्होंने कहा कि ईर्ष्या और भय से मुक्ति पाकर ही शिक्षा आनंद का मार्ग प्रशस्त कर सकती है। उन्होंने शिक्षकों का आह्वान किया कि वे केवल उपदेशक न बनें, बल्कि स्वयं को एक आदर्श आचरण और उदाहरण के रूप में प्रस्तुत करें। आध्यात्मिक ज्ञान 'मैं कौन हूँ' के बोध पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि भौतिक और आध्यात्मिक ज्ञान का समन्वय ही विश्व को विनाश से बचा सकता है। उन्होंने 21वीं सदी में भारत को पुनः 'विश्वगुरु' बनाने हेतु अपनी जड़ों और भारतीय ज्ञान परंपरा (IKS) की ओर लौटने का मार्ग दिखाया।

विशिष्ट अतिथि प्रो. भारत शरण सिंह ने राजस्थान केंद्रीय विश्वविद्यालय के 'A++' ग्रेड मानकीकरण की सराहना करते हुए इसे संस्थान की दिव्यता का प्रमाण बताया। उन्होंने कहा कि गुरु केवल ज्ञानदाता नहीं होता, बल्कि वह शिष्य में 'तत्व' का संचार करता है। उन्होंने अजमेर के गौरवशाली इतिहास और दिल्ली के लौह स्तंभ जैसे वैज्ञानिक चमत्कारों का उल्लेख करते हुए युवाओं को राष्ट्र निर्माण हेतु तैयार रहने को कहा।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति एवं चित्तौड़ प्रांत के अध्यक्ष प्रो. आनंद भालेराव ने श्री शंकरानंद जी को पुनर्जागरण का अग्रदूत बताया। उन्होंने 'भारतीय शिक्षण बोध' पत्रिका की भूमिका पर चर्चा करते हुए कहा कि यह प्रकाशन समाज और शिक्षा व्यवस्था के सम्मुख गंभीर प्रश्न प्रस्तुत करेगा। उन्होंने घोषणा की कि विश्वविद्यालय ने अपने समस्त पाठ्यक्रमों में भारतीय ज्ञान परंपरा को सम्मिलित करने की ऐतिहासिक पहल की है।

इससे पूर्व कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन और भारतीय शिक्षण मंडल की परिपाठी के अनुसार संगठन गीत, मंत्र, ध्येय श्लोक एवं ध्येय वाक्य के साथ हुआ। प्रकाशन प्रमुख डॉ. अक्षांश भारद्वाज ने पत्रिका की भूमिका स्पष्ट की और चरित्र निर्माण पर आधारित एक प्रभावशाली एकल गीत प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का समापन क्षेत्रीय संयोजक प्रो. गजेंद्र पाल सिंह के आभार ज्ञापन और सामूहिक कल्याण मंत्र के साथ हुआ।

इस अवसर पर अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख डॉ. संजय पाठक, राजस्थान विश्वविद्यालय की कुलगुरु प्रो. अल्पना कटेजा, जोधपुर प्रांत के अध्यक्ष डॉ. कुलड़ी सिंह, कुलसचिव अमरदीप शर्मा, वित्त अधिकारी प्रदीप अग्रवाल सहित विभिन्न प्रांतों के पदाधिकारी, विभागाध्यक्ष, शोधार्थी एवं विद्यार्थी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

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