संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा 3 मई को विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस के रूप में घोषित किया गया है, जिसे दुनिया भर में “वर्ल्ड प्रेस डे” के रूप में भी मनाया जाता है। इस दिवस का उद्देश्य प्रेस की स्वतंत्रता के महत्व के प्रति वैश्विक जागरूकता बढ़ाना और सरकारों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार का सम्मान एवं संरक्षण सुनिश्चित करने के उनके दायित्व की याद दिलाना है। यह अधिकार 1948 की मानवाधिकारों की सार्वभौम घोषणा के अनुच्छेद 19 में निहित है। साथ ही यह दिन 1991 में नामीबिया के विंडहोक में अफ्रीकी पत्रकारों द्वारा तैयार विंडहोक घोषणा की वर्षगांठ का भी प्रतीक है, जिसने स्वतंत्र प्रेस के सिद्धांतों को मजबूत आधार प्रदान किया।

विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर 2018 में संयुक्त राष्ट्र सभ्यताओं के गठबंधन (UNAOC) द्वारा प्रायोजित एक सम्मेलन को रद्द कर दिया गया था। इसी वर्ष कई मीडिया संगठनों ने प्रेस की स्वतंत्रता के समर्थन में एक व्यापक विज्ञापन अभियान भी चलाया था, जबकि काबुल में मारे गए पत्रकारों को श्रद्धांजलि देते हुए उनकी स्मृति को भी सम्मानपूर्वक याद किया गया।

यूनेस्को इस अवसर पर हर वर्ष UNESCO/Guillermo Cano World Press Freedom Prize प्रदान करता है, जो किसी ऐसे व्यक्ति, संगठन या संस्था को दिया जाता है जिसने अत्यंत जोखिमों के बावजूद प्रेस स्वतंत्रता की रक्षा और संवर्धन में उल्लेखनीय योगदान दिया हो। यह पुरस्कार 1997 में स्थापित किया गया था और इसका चयन 14 स्वतंत्र मीडिया विशेषज्ञों की एक निर्णायक समिति की अनुशंसा पर किया जाता है।


नामांकन क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय गैर-सरकारी संगठनों तथा यूनेस्को के सदस्य देशों द्वारा प्रस्तुत किए जाते हैं। यह पुरस्कार कोलंबियाई पत्रकार गुइलेर्मो कैनो इसाज़ा के सम्मान में रखा गया है, जिनकी 17 दिसंबर 1986 को बोगोटा में उनके समाचार पत्र “एल एस्पेक्टाडोर” के कार्यालय के सामने गोली मारकर हत्या कर दी गई थी, क्योंकि उनकी लेखनी ने शक्तिशाली ड्रग माफियाओं को चुनौती दी थी।

यूनेस्को प्रत्येक वर्ष विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस पर एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का भी आयोजन करता है, जिसमें मीडिया पेशेवरों, प्रेस स्वतंत्रता संगठनों और संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों को एक मंच पर लाकर वैश्विक प्रेस स्वतंत्रता की स्थिति का मूल्यांकन किया जाता है और चुनौतियों के समाधान पर विचार किया जाता है। यह सम्मेलन विभिन्न विषयों पर केंद्रित रहता है, जिनमें सुशासन, आतंकवाद की मीडिया कवरेज, दंडमुक्ति और संघर्षोत्तर समाजों में मीडिया की भूमिका जैसे मुद्दे शामिल होते हैं।

वर्ष 2026 के लिए विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस की थीम “शेपिंग ए फ्यूचर एट पीस: प्रमोटिंग प्रेस फ्रीडम फॉर ह्यूमन राइट्स, डेवलपमेंट एंड सिक्योरिटी” निर्धारित की गई है। यह विषय स्वतंत्र पत्रकारिता की भूमिका को शांति निर्माण, आर्थिक पुनरुद्धार और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के कारण फैल रही भ्रामक सूचनाओं की चुनौती से जोड़कर देखता है। इस वैश्विक सम्मेलन का आयोजन 4 से 5 मई 2026 के बीच जाम्बिया के लुसाका में किया जाएगा, जिसमें सूचना हेरफेर के खिलाफ पत्रकारिता की अखंडता को मजबूत करने, एआई के प्रभावों के प्रबंधन और संघर्ष क्षेत्रों में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा जैसे मुद्दों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।


UNESCO की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2012 के बाद से वैश्विक स्तर पर प्रेस स्वतंत्रता में सबसे तीव्र गिरावट दर्ज की गई है, जो इस आयोजन की गंभीरता और प्रासंगिकता को और अधिक बढ़ा देती है। विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस न केवल पत्रकारिता की स्वतंत्रता का प्रतीक है, बल्कि यह वैश्विक लोकतांत्रिक मूल्यों, मानवाधिकारों और सूचनात्मक पारदर्शिता की रक्षा के लिए निरंतर सतर्कता की आवश्यकता को भी रेखांकित करता है।

Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

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