विश्व तंबाकू निषेध दिवस 2026 के अवसर पर WHO द्वारा “Unmasking the appeal – countering nicotine and tobacco addiction” थीम के तहत वैश्विक अभियान चलाया जा रहा है। यह लेख तंबाकू के दुष्प्रभावों, WHO की ऐतिहासिक पहल, FCTC संधि, विज्ञापन प्रतिबंध पर विस्तृत जानकारी प्रस्तुत करता है।

हर वर्ष 31 मई को पूरी दुनिया में विश्व तंबाकू निषेध दिवस (World No Tobacco Day) मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य तंबाकू के उपयोग से होने वाले गंभीर स्वास्थ्य खतरों के प्रति जन-जागरूकता फैलाना है। यह दिन न केवल तंबाकू सेवन के दुष्परिणामों को उजागर करता है, बल्कि तंबाकू उद्योग की उन व्यावसायिक रणनीतियों पर भी प्रकाश डालता है, जिनके माध्यम से यह उत्पादों की लत को बढ़ावा देता है। इसी क्रम में विश्व स्वास्थ्य संगठन World Health Organization (WHO) द्वारा चलाए जा रहे वैश्विक अभियान के तहत यह दिन स्वास्थ्य के अधिकार और आने वाली पीढ़ियों की सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जाता है।

वर्ष 2026 के लिए विश्व तंबाकू निषेध दिवस की आधिकारिक थीम “Unmasking the appeal – countering nicotine and tobacco addiction” निर्धारित की गई है। इस थीम का केंद्र तंबाकू और निकोटिन उत्पादों की आकर्षक पैकेजिंग और भ्रामक मार्केटिंग रणनीतियों का पर्दाफाश करना है, जिनके जरिए उद्योग युवाओं और नए उपभोक्ताओं को अपनी ओर आकर्षित करता है। WHO का यह अभियान स्पष्ट रूप से इस बात पर जोर देता है कि तंबाकू उद्योग किस प्रकार अपने उत्पादों को आकर्षक बनाकर सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर चुनौती पैदा करता है।

विश्व तंबाकू निषेध दिवस की शुरुआत वर्ष 1987 में विश्व स्वास्थ्य संगठन के सदस्य देशों द्वारा की गई थी, जब विश्व स्वास्थ्य सभा ने एक प्रस्ताव पारित कर वैश्विक स्तर पर तंबाकू महामारी और इससे होने वाली रोकी जा सकने वाली मौतों पर ध्यान केंद्रित किया। प्रारंभ में 7 अप्रैल 1988 को ‘विश्व धूम्रपान निषेध दिवस’ के रूप में इसे मनाने का प्रस्ताव दिया गया था, जिसका उद्देश्य धूम्रपान करने वालों को 24 घंटे के लिए तंबाकू उत्पादों से दूर रहने के लिए प्रेरित करना था।

इसके बाद वर्ष 1988 में विश्व स्वास्थ्य सभा ने एक और प्रस्ताव पारित कर इसे हर वर्ष 31 मई को विश्व तंबाकू निषेध दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया। तभी से WHO प्रत्येक वर्ष इस दिन को एक अलग थीम के साथ वैश्विक स्वास्थ्य अभियान के रूप में आगे बढ़ा रहा है।

वर्ष 1998 में WHO ने तंबाकू मुक्त पहल (Tobacco Free Initiative) की स्थापना की, जिसका उद्देश्य वैश्विक स्तर पर तंबाकू नियंत्रण नीतियों को मजबूत करना और देशों के बीच सहयोग बढ़ाना था। इसी पहल के तहत वर्ष 2003 में WHO फ्रेमवर्क कन्वेंशन ऑन टोबैको कंट्रोल (FCTC) को अपनाया गया, जो तंबाकू नियंत्रण के लिए एक अंतरराष्ट्रीय संधि के रूप में कार्य करता है।

वर्ष 2008 में WHO ने तंबाकू विज्ञापन, प्रचार और प्रायोजन पर वैश्विक प्रतिबंध की अपील की। उस वर्ष की थीम “Tobacco-free youth” थी, जिसका मुख्य उद्देश्य युवाओं को लक्षित करने वाली तंबाकू विज्ञापन रणनीतियों पर रोक लगाना था। WHO के अनुसार, उद्योग अपने उपभोक्ता आधार को बनाए रखने के लिए युवाओं को लगातार आकर्षित करने का प्रयास करता है, जिसके लिए फिल्मों, इंटरनेट, होर्डिंग और पत्रिकाओं जैसे माध्यमों का उपयोग किया जाता है।

वर्ष 2015 में इस दिवस का फोकस तंबाकू सेवन से जुड़े स्वास्थ्य जोखिमों और अवैध तंबाकू व्यापार को समाप्त करने पर केंद्रित रहा। वहीं वर्ष 2017 में “A threat to development” थीम के तहत तंबाकू उद्योग को वैश्विक विकास के लिए एक बाधा के रूप में दर्शाया गया, जो स्वास्थ्य, अर्थव्यवस्था और सामाजिक विकास पर नकारात्मक प्रभाव डालता है।

प्रत्येक वर्ष WHO इस दिवस के लिए एक विशेष थीम निर्धारित करता है, जो अगले वर्ष की वैश्विक तंबाकू नियंत्रण रणनीतियों की दिशा तय करती है। इसके साथ ही प्रचार सामग्री जैसे पोस्टर, ब्रोशर, प्रेस विज्ञप्तियाँ और डिजिटल अभियान तैयार कर दुनिया भर में जागरूकता फैलाने का प्रयास किया जाता है। डिजिटल माध्यमों जैसे वीडियो और पॉडकास्ट का उपयोग भी समय के साथ इस अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है।

Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

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