क्या है World Heritage Day 2026 का थीम? जानिए कैसे हुई थी इस दिन की शुरुआत
विश्व धरोहर दिवस 2026 18 अप्रैल को “संघर्ष और आपदाओं में विरासत संरक्षण” थीम के साथ मनाया जा रहा है। यह दिन ऐतिहासिक स्थलों की सुरक्षा, सांस्कृतिक विरासत की अहमियत और वैश्विक जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से मनाया जाता है।

उत्तर प्रदेश के आगरा में स्थित ताजमहल
हर साल 18 अप्रैल को मनाया जाने वाला अंतरराष्ट्रीय स्तर का महत्वपूर्ण दिवस, ‘इंटरनेशनल डे फॉर मॉन्यूमेंट्स एंड साइट्स’ यानी विश्व धरोहर दिवस, इस बार एक अत्यंत संवेदनशील और प्रासंगिक विषय के साथ दुनिया का ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर रहा है। वर्ष 2026 में यह दिन “संघर्ष और आपदाओं के संदर्भ में जीवित विरासत के लिए आपातकालीन प्रतिक्रिया” थीम के साथ मनाया जा रहा है, जो उन ऐतिहासिक स्थलों और सांस्कृतिक विरासतों की सुरक्षा पर केंद्रित है जो युद्ध, प्राकृतिक आपदाओं या अन्य संकटों के कारण खतरे में हैं।
विश्व धरोहर दिवस की शुरुआत 18 अप्रैल 1982 को इंटरनेशनल काउंसिल ऑन मॉन्यूमेंट्स एंड साइट्स (ICOMOS) के प्रस्ताव से हुई थी, जिसे 1983 में यूनेस्को की 22वीं महासभा में आधिकारिक मान्यता दी गई। तब से लेकर आज तक, यह दिवस मानवता की सांस्कृतिक विविधता और ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण की आवश्यकता के प्रति जागरूकता बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बना हुआ है। वर्ष 2026 में इस दिवस को मनाते हुए 43 वर्ष पूरे हो चुके हैं, जो इस वैश्विक पहल की निरंतरता और महत्व को दर्शाता है।
इस दिन का उद्देश्य केवल ऐतिहासिक स्मारकों की सुंदरता को सराहना नहीं है, बल्कि उनकी संवेदनशीलता और संरक्षण की आवश्यकता को समझना भी है। यूनेस्को के ‘कन्वेंशन कंसर्निंग द प्रोटेक्शन ऑफ द वर्ल्ड कल्चरल एंड नेचुरल हेरिटेज’ के अनुसार, स्मारक वे संरचनाएं हैं जिनमें स्थापत्य कला, मूर्तिकला, चित्रकला, पुरातात्विक तत्व, शिलालेख और गुफा आवास जैसी विशेषताएं शामिल होती हैं, जो इतिहास, कला या विज्ञान के दृष्टिकोण से असाधारण सार्वभौमिक मूल्य रखती हैं।
इतिहास के पन्नों में झांकें तो 1964 में यूनेस्को द्वारा ‘इंटरनेशनल ईयर ऑफ द मॉन्यूमेंट’ की शुरुआत की गई थी, जिसका उद्देश्य वैश्विक स्तर पर स्मारकों और ऐतिहासिक स्थलों के महत्व को रेखांकित करना था। यह पहल इस विचार को मजबूत करती है कि स्मारक केवल पत्थरों की संरचनाएं नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक स्मृति, पहचान और सांस्कृतिक धरोहर के प्रतीक होते हैं।
दुनियाभर में इस अवसर पर संग्रहालयों और ऐतिहासिक स्थलों पर विशेष कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है, जिनमें कई स्थानों पर निःशुल्क प्रवेश, गाइडेड टूर, संगोष्ठियां और जनजागरूकता अभियान शामिल होते हैं। इन गतिविधियों का उद्देश्य आम नागरिकों और स्थानीय समुदायों को अपनी सांस्कृतिक विरासत के महत्व से जोड़ना और उसके संरक्षण में उनकी भागीदारी सुनिश्चित करना है।
आज के दौर में, जब कई ऐतिहासिक स्थल युद्ध, जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक आपदाओं के कारण खतरे में हैं, ऐसे में विश्व धरोहर दिवस का महत्व और भी बढ़ जाता है। यह दिन न केवल अतीत को सहेजने की याद दिलाता है, बल्कि भविष्य की पीढ़ियों के लिए हमारी सांस्कृतिक पहचान को सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी भी सौंपता है।

Manyaa Chaudhary
यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।
