विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस 2026 हर वर्ष 7 जून को मनाया जाता है, जिसकी थीम “From burden to solutions – safe food everywhere” है। यह दिवस सुरक्षित, स्वच्छ और पौष्टिक भोजन के महत्व को रेखांकित करते हुए खाद्य जनित बीमारियों की रोकथाम, वैश्विक सहयोग और खाद्य सुरक्षा प्रणालियों को मजबूत बनाने पर जोर देता है।

विश्व स्वास्थ्य और पोषण से जुड़े मुद्दों पर वैश्विक स्तर पर बढ़ती चिंता के बीच हर वर्ष 7 जून को मनाया जाने वाला विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय पहल के रूप में सामने आया है। यह दिवस सुरक्षित, स्वच्छ और पौष्टिक भोजन के महत्व को रेखांकित करता है और मानव स्वास्थ्य की रक्षा के लिए खाद्य सुरक्षा प्रणालियों को मजबूत बनाने की दिशा में वैश्विक समुदाय को एकजुट करता है। संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा वर्ष 2018 में इसे आधिकारिक मान्यता दी गई थी और पहली बार इसे वर्ष 2019 में वैश्विक स्तर पर मनाया गया।

विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस 2026 की थीम “From burden to solutions – safe food everywhere” निर्धारित की गई है, जो सुरक्षित भोजन से जुड़े जोखिमों को कम करने और व्यावहारिक समाधानों को बढ़ावा देने पर केंद्रित है। यह थीम इस बात पर जोर देती है कि खाद्य सुरक्षा केवल एक चुनौती नहीं, बल्कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण और वैश्विक सहयोग के माध्यम से समाधान योग्य विषय है।

इस वैश्विक अभियान का नेतृत्व विश्व स्वास्थ्य संगठन और संयुक्त राष्ट्र खाद्य एवं कृषि संगठन संयुक्त रूप से करते हैं। ये दोनों प्रमुख अंतरराष्ट्रीय संस्थान मिलकर खाद्य सुरक्षा मानकों को बेहतर बनाने, दूषित भोजन से उत्पन्न खतरों को कम करने और दुनिया भर में स्वास्थ्य सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में कार्य करते हैं।

इस दिवस का मुख्य उद्देश्य खाद्य जनित बीमारियों की रोकथाम, स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ाना, भोजन के सुरक्षित भंडारण और पकाने की विधियों को प्रोत्साहित करना तथा खेत से लेकर उपभोक्ता तक खाद्य सुरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाना है। इसके साथ ही सरकारों, उद्योगों, किसानों और उपभोक्ताओं के बीच साझा जिम्मेदारी की भावना को भी बढ़ावा दिया जाता है।

वैश्विक आंकड़ों के अनुसार, हर वर्ष लगभग 60 करोड़ लोग असुरक्षित भोजन के कारण बीमार पड़ते हैं, जबकि करीब 4.2 लाख लोगों की मृत्यु खाद्य जनित बीमारियों से जुड़ी मानी जाती है। इनमें पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चे सबसे अधिक जोखिम में रहते हैं। असुरक्षित भोजन न केवल स्वास्थ्य को प्रभावित करता है, बल्कि आर्थिक उत्पादकता और स्वास्थ्य सेवाओं पर भी गंभीर दबाव डालता है।

खाद्य तब असुरक्षित माना जाता है जब उसमें हानिकारक बैक्टीरिया जैसे साल्मोनेला और ई. कोलाई, वायरस जैसे हेपेटाइटिस ए, परजीवी, रासायनिक अवशेष जैसे कीटनाशक या भारी धातुएं, अथवा प्लास्टिक और कांच जैसे भौतिक कण मौजूद हों। यह स्थिति उत्पादन, प्रसंस्करण, भंडारण, परिवहन और उपभोग के किसी भी चरण में उत्पन्न हो सकती है।

घरेलू स्तर पर भी खाद्य सुरक्षा के लिए कई महत्वपूर्ण उपाय बताए गए हैं, जिनमें भोजन बनाने और खाने से पहले हाथ धोना, भोजन को पूरी तरह पकाना, उचित तापमान पर भंडारण करना, कच्चे और पके भोजन को अलग रखना, स्वच्छ बर्तनों और पानी का उपयोग करना तथा एक्सपायरी डेट की जांच करना शामिल है। विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस इस तथ्य को स्पष्ट करता है कि सुरक्षित भोजन केवल एक स्वास्थ्य आवश्यकता नहीं, बल्कि एक वैश्विक जिम्मेदारी है, जिसमें हर स्तर पर सावधानी और सहयोग आवश्यक है। यह दिवस मानव स्वास्थ्य की सुरक्षा और एक सुरक्षित भविष्य के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण संदेश देता है।

Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

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