हर वर्ष 27 मार्च को विश्वभर में रंगमंच का जश्न मनाया जाता है। यह दिन, जिसे विश्व रंगमंच दिवस (World Theatre Day – WTD) कहा जाता है, 1962 में अंतरराष्ट्रीय रंगमंच संस्थान (International Theatre Institute – ITI) द्वारा स्थापित किया गया था। यह दिन न केवल रंगमंच के महत्व को दर्शाता है, बल्कि कला के माध्यम से शांति और वैश्विक भाईचारे के संदेश को भी व्यापक रूप से फैलाता है।

विश्व रंगमंच दिवस की शुरुआत 1961 में हुई, जब ITI के फिनिश केंद्र के अध्यक्ष अरवी किविमा ने हेलसिंकी और फिर वियना में आयोजित 9वें विश्व कांग्रेस में इस पहल का प्रस्ताव रखा। यह प्रस्ताव स्कैंडिनेवियाई केंद्रों के समर्थन के साथ सर्वसम्मति से स्वीकार किया गया और इसके बाद से 27 मार्च को हर वर्ष अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह उत्सव मनाया जाने लगा।

इस अवसर पर विभिन्न राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय रंगमंच कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इनमें सबसे महत्वपूर्ण पहलुओं में से एक है अंतरराष्ट्रीय संदेश (World Theatre Day International Message), जिसमें विश्व स्तर के प्रसिद्ध रंगमंच कलाकार या साहित्यकार रंगमंच और शांति के विषय पर अपने विचार साझा करते हैं। पहला संदेश 1962 में फ्रांस के प्रसिद्ध लेखक और रंगमंच कलाकार जीन कोक्तो (Jean Cocteau) द्वारा लिखा गया था।

2023 में यह संदेश मिस्र की प्रसिद्ध अभिनेत्री समीहा आयूब को सौंपा गया, जो मुख्यतः रंगमंच में सक्रिय हैं, लेकिन सिनेमा और टेलीविजन की दुनिया में भी अपनी पहचान रखती हैं। वर्तमान में, 2024 में विश्व रंगमंच दिवस अपनी 62वीं वर्षगांठ मना चुका है। इस अवसर पर संदेश “कला ही शांति है” (Art is Peace), नॉर्वे के लेखक और नाटककार जॉन फॉस (Jon Fosse) द्वारा लिखा गया, जिसने वैश्विक समुदाय के संदर्भ में रंगमंच की मूलभूत और सार्वभौमिक मान्यताओं को गहराई से रेखांकित किया।

और अब, वर्ष 2026 का विश्व रंगमंच दिवस 27 मार्च को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मनाया जाएगा। इस वर्ष के अंतरराष्ट्रीय संदेश के लेखक हैं विलेम डाफो (Willem Dafoe, USA), जो अभिनेता और रंगमंच निर्माता के रूप में विश्वभर में प्रसिद्ध हैं। हर वर्ष की तरह, ITI की कार्यकारी परिषद ने इस वर्ष भी किसी उत्कृष्ट रंगमंच हस्ती को संदेश लिखने के लिए चुना है, जो कला और मानवता के संदेश को विश्व स्तर पर साझा करती है।

विश्व रंगमंच दिवस केवल कलाकारों के लिए नहीं, बल्कि पूरी मानवता के लिए प्रेरणा का स्रोत है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि कला न केवल मनोरंजन का माध्यम है, बल्कि यह समाज में शांति, सहिष्णुता और वैश्विक भाईचारे के मूल्यों को स्थापित करने की शक्ति भी रखती है।

Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

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