क्या मिडिल ईस्ट में मचेगा तांडव? ईरान और अमेरिका के बीच दिखे आर-पार की लड़ाई के संकेत
ईरान-अमेरिका तनाव 2026: डोनाल्ड ट्रंप की सैन्य हस्तक्षेप की धमकी पर अयातुल्ला खामेनेई का कड़ा पलटवार। तेहरान ने कहा- 'हम युद्ध नहीं चाहते लेकिन जवाब देने को तैयार हैं'। ईरान में 84 घंटों से इंटरनेट बंद और प्रदर्शनों के बीच विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने निष्पक्ष वार्ता की रखी शर्त। जानें क्या मिडिल ईस्ट महायुद्ध की ओर बढ़ रहा है।

पश्चिम एशिया एक बार फिर बारूद के ढेर पर खड़ा नजर आ रहा है। ईरान में जारी देशव्यापी अशांति और प्रदर्शनों के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की 'सैन्य हस्तक्षेप' की खुली धमकी ने वैश्विक कूटनीति में हड़कंप मचा दिया है। सोमवार, 12 जनवरी 2026 को ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई और विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने वॉशिंगटन को 'आर-पार' की चेतावनी देते हुए स्पष्ट कर दिया है कि तेहरान युद्ध की चाहत तो नहीं रखता, लेकिन किसी भी सैन्य दुस्साहस का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है।
ट्रंप का अल्टीमेटम और ईरान की 'निष्पक्ष' बातचीत की शर्त :
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को तेहरान को आगाह किया था कि यदि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हिंसक कार्रवाई नहीं रुकी, तो अमेरिका सैन्य हस्तक्षेप कर सकता है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने तेहरान में विदेशी राजदूतों के सम्मेलन में कहा:
- युद्ध की तैयारी: "इस्लामी गणराज्य युद्ध नहीं चाहता, लेकिन हम अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए युद्ध के लिए पूरी तरह सुसज्जित और तैयार हैं।"
- समान अधिकार वाली वार्ता: ईरान ने बातचीत के रास्ते बंद नहीं किए हैं, लेकिन अराघची ने शर्त रखी है कि संवाद 'निष्पक्ष' और 'आपसी सम्मान' पर आधारित होना चाहिए, न कि धमकियों पर।
- संवाद का माध्यम: ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने पुष्टि की है कि विदेश मंत्री और अमेरिकी राष्ट्रपति के विशेष दूत के बीच संवाद का चैनल फिलहाल खुला है।
खामेनेई का हुंकार: 'तानाशाहों जैसा होगा अंजाम'
ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने देश के नाम अपने संबोधन में डोनाल्ड ट्रंप पर तीखा हमला बोला। उन्होंने ट्रंप की तुलना फिरौन, निमरूद और रजा शाह जैसे ऐतिहासिक तानाशाहों से करते हुए कहा कि घमंड के चरम पर बैठे इन शासकों की तरह ट्रंप का भी पतन निश्चित है।
दूसरी ओर, तेहरान की सड़कों पर सरकार समर्थकों ने हजारों की संख्या में उतरकर शक्ति प्रदर्शन किया। ईरान की संसद के अध्यक्ष ने अमेरिका और उसके सहयोगी इजरायल को सीधी चेतावनी दी है कि यदि ईरान पर कोई आंच आई, तो अमेरिकी सेना और इजरायली ठिकाने उनके निशाने पर होंगे।
ग्राउंड जीरो: इंटरनेट ब्लैकआउट और आंतरिक अशांति
महंगाई के विरोध में दो हफ्ते पहले शुरू हुए प्रदर्शनों ने अब हिंसक रूप ले लिया है, जिसमें सैकड़ों लोगों की जान जाने की खबर है। अराघची का आरोप है कि इन प्रदर्शनों को जानबूझकर हिंसक बनाया गया ताकि अमेरिका को हस्तक्षेप का बहाना मिल सके। वर्तमान स्थिति यह है कि:
- ईरान में पिछले 84 घंटों से अधिक समय से इंटरनेट सेवाएं पूरी तरह ठप हैं।
- लोग टेलीफोन के माध्यम से भी एक-दूसरे से संपर्क करने में असमर्थ हैं, जिससे सूचनाओं का प्रवाह रुक गया है।
- सरकार का दावा है कि हालात अब पूरी तरह नियंत्रण में हैं, जबकि अंतरराष्ट्रीय समुदाय मानवाधिकारों के हनन पर चिंता जता रहा है।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
