नई दिल्ली: पश्चिम एशिया के अशांत समरक्षेत्र में गहराते संघर्ष की गूँज अब भारतीय बाजारों के उन कोनों तक पहुँचने लगी है, जिसकी कल्पना शायद ही किसी ने की थी। अमेरिका और इजरायल के ईरान के साथ बढ़ते युद्ध ने जहाँ पहले से ही भारत की एलपीजी आपूर्ति और सिलेंडर की कीमतों को प्रभावित कर रखा था, वहीं अब देश का विशाल कंडोम उद्योग भी इसकी चपेट में आता दिख रहा है। व्यापारिक मार्गों पर मंडराते युद्ध के बादलों ने कच्चे माल की आपूर्ति श्रृंखला को इस कदर बाधित किया है कि आने वाले दिनों में कंडोम की कीमतों में भारी वृद्धि की आशंका प्रबल हो गई है।

भारत का कंडोम उद्योग, जिसका बाजार मूल्य लगभग 860 मिलियन डॉलर यानी 8,000 करोड़ रुपये से अधिक है, वर्तमान में एक गंभीर संकट के मुहाने पर खड़ा है। एचएलएल लाइफकेयर, क्यूपिड लिमिटेड और मैनकाइंड फार्मा जैसे दिग्गज निर्माताओं ने इस बात की पुष्टि की है कि होर्मुज जलडमरूमध्य के पास व्यापारिक मार्गों में आए व्यवधान के कारण महत्वपूर्ण कच्चे माल की डिलीवरी में असामान्य देरी हो रही है। यह जलडमरूमध्य वैश्विक तेल और रसद आपूर्ति के लिए एक जीवन रेखा माना जाता है, लेकिन युद्ध की स्थिति ने इसे एक जोखिम भरे क्षेत्र में तब्दील कर दिया है।

उत्पादन प्रक्रिया में अनिवार्य माने जाने वाले रसायनों की उपलब्धता अब एक बड़ी चुनौती बन गई है। लुब्रिकेशन के लिए इस्तेमाल होने वाले सिलिकॉन ऑयल की किल्लत बढ़ गई है, जबकि कंडोम की मजबूती सुनिश्चित करने वाले एनहाइड्रस अमोनिया की कीमतों में 40 से 50 प्रतिशत तक का भारी उछाल देखा गया है। सालाना 400 करोड़ से अधिक कंडोम का उत्पादन करने वाला भारतीय उद्योग अब इन बढ़ी हुई लागतों और कच्चे माल की कमी के बीच संतुलन बनाने के लिए संघर्ष कर रहा है।

बाजार विशेषज्ञों और निर्माताओं के संकेतों को देखें तो स्पष्ट है कि उत्पादन लागत में हुई इस अभूतपूर्व वृद्धि का भार अंततः उपभोक्ताओं की जेब पर ही पड़ने वाला है। आने वाले कुछ हफ्तों में कंडोम के खुदरा दामों में बढ़ोतरी की खबरें अब केवल कयास नहीं, बल्कि एक कड़वी हकीकत बनती नजर आ रही हैं। यह घटनाक्रम न केवल स्वास्थ्य क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को प्रभावित करेगा, बल्कि परिवार नियोजन और सार्वजनिक स्वास्थ्य सुरक्षा के मोर्चे पर भी नई चुनौतियां पेश कर सकता है। वैश्विक युद्ध की विभीषिका किस तरह एक आम नागरिक की निजी जरूरतों और बजट को अस्त-व्यस्त कर सकती है, यह संकट उसी का एक ज्वलंत उदाहरण बनकर उभरा है।

Ruturaj Ravan

Ruturaj Ravan

यह प्रातःकाल मल्टीमीडिया में वेबसाइट मैनेजर और सोशल मीडिया एक्जीक्यूटिव के रूप में कार्यरत हैं, और पिछले तीन वर्षों से पत्रकारिता व डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इससे पूर्व उन्होंने दैनिक प्रहार में वेबसाइट प्रबंधन और सोशल मीडिया के लिए रचनात्मक कंटेंट निर्माण और रणनीतियों में अनुभव अर्जित किया। इन्होंने कोल्हापुर के छत्रपति शिवाजी महाराज विश्वविद्यालय से स्नातक और हैदराबाद के सत्या इंस्टीट्यूट से उच्च शिक्षा पूरी की। इन्हें SEO मैनेजमेंट, सोशल मीडिया और उससे संबंधित रणनीतियाँ तैयार करने में व्यापक अनुभव है।

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