12 मार्च आखिर क्यों मॉरीशस के लिए इतना खास है? मॉरीशस के राष्ट्रीय दिवस पर जानें गांधी जी से क्या है खास नाता
मॉरीशस राष्ट्रीय दिवस हर साल 12 मार्च को स्वतंत्रता और गणराज्य दिवस के रूप में मनाया जाता है। पोर्ट लुइस में परेड, सांस्कृतिक कार्यक्रम और अंतरराष्ट्रीय मेहमानों की उपस्थिति इसे विशेष बनाती है। यह दिन देश की विविध संस्कृति, महात्मा गांधी के सत्याग्रह और भारत–मॉरीशस कूटनीतिक संबंधों का प्रतीक है।

मॉरीशस राष्ट्रीय दिवस
मॉरीशस हर साल 12 मार्च को राष्ट्रीय दिवस के रूप में मनाता है, जो देश की ब्रिटिश शासन से स्वतंत्रता (1968) और गणराज्य बनने (1992) की याद दिलाता है। यह दिन न केवल राजनीतिक स्वतंत्रता का प्रतीक है, बल्कि मॉरीशस की बहुसांस्कृतिक पहचान और वैश्विक कूटनीतिक संबंधों को भी उजागर करता है। 2025 और 2026 में इस अवसर पर उच्च-स्तरीय अंतरराष्ट्रीय मेहमानों की उपस्थिति ने इस उत्सव को और भी महत्वपूर्ण बना दिया।
राष्ट्रीय दिवस के मुख्य समारोह मॉरीशस की राजधानी पोर्ट लुइस में आयोजित किए जाते हैं, जहाँ मॉरीशस पुलिस बल और अक्सर अंतरराष्ट्रीय सैन्य दस्तों की परेड होती है। इन कार्यक्रमों में देशभक्ति के संदेश के साथ-साथ विविध सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ भी शामिल होती हैं, जो मॉरीशस की "रंग-बिरंगी" सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान को प्रदर्शित करती हैं। परेड, संगीत और भाषणों के माध्यम से नागरिकों में राष्ट्रीय गौरव और एकता की भावना प्रकट होती है।
विशेष रूप से, इस दिन का इतिहास और महत्व बहुआयामी है। मॉरीशस ने 12 मार्च 1968 को ब्रिटिश शासन से स्वतंत्रता प्राप्त की और 12 मार्च 1992 को गणराज्य घोषित किया। इसके अतिरिक्त, यह तिथि महात्मा गांधी की सत्याग्रह और नमक सत्याग्रह के स्मरण के रूप में भी चुनी गई थी, जो लोकतंत्र और अहिंसा के सिद्धांतों का प्रतीक है।
2025 में इस अवसर पर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया था। यह प्रतिनिधित्व मॉरीशस और भारत के बीच गहरे द्विपक्षीय संबंधों और रणनीतिक साझेदारी को दर्शाता है। अंतरराष्ट्रीय मेहमानों की उपस्थिति ने केवल औपचारिक समारोहों को नहीं बल्कि सांस्कृतिक आदान-प्रदान और कूटनीतिक सहयोग को भी उजागर किया।
मॉरीशस राष्ट्रीय दिवस न केवल ऐतिहासिक उपलब्धियों का जश्न है, बल्कि यह भविष्य में सहयोग, शांति और सांस्कृतिक एकता के संदेश को भी मजबूत करता है। यह दिन देशवासियों के लिए गर्व, स्मृति और राष्ट्रीय एकता का प्रतीक बन गया है, जिसे हर वर्ष पूरे उत्साह और परंपरा के साथ मनाया जाता है।

Manyaa Chaudhary
यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।
