काठमांडू: नेपाल के राजनीतिक क्षितिज पर एक नए युग का सूत्रपात करते हुए 'बालेन' के नाम से विख्यात बालेंद्र शाह ने 27 मार्च 2026 को देश के 40वें प्रधानमंत्री के रूप में पदभार ग्रहण कर लिया है। वर्ष 2026 के आम चुनावों में अपने दल की प्रचंड विजय के पश्चात शीर्ष पद पर आसीन होने वाले शाह, नेपाल के इतिहास में पहले बौद्ध मूल के प्रधानमंत्री बने हैं। एक स्ट्रक्चरल इंजीनियर, रॅपर और राजनेता के रूप में बहुआयामी पहचान रखने वाले 35 वर्षीय शाह ने इससे पूर्व 2022 से 2026 तक काठमांडू के 15वें मेयर के रूप में कार्य किया था, जहाँ वे इस पद को सुशोभित करने वाले पहले निर्दलीय उम्मीदवार थे।

27 अप्रैल 1990 को काठमांडू के नारदेवी में एक बौद्ध मैथिली मधेशी परिवार में जन्मे बालेंद्र शाह के पिता रामनारायण शाह एक आयुर्वेदिक चिकित्सक थे। उन्होंने भारत के बेंगलुरु स्थित निट्टे मीनाक्षी इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से स्ट्रक्चरल इंजीनियरिंग में एमटेक की उपाधि प्राप्त की है। उनकी राजनीतिक यात्रा 2022 के स्थानीय चुनावों से प्रारंभ हुई, जहाँ उन्होंने भ्रष्टाचार विरोधी और पारदर्शिता के एजेंडे पर ऐतिहासिक जीत दर्ज की। मेयर के रूप में उनके कार्यकाल को कचरा प्रबंधन, डिजिटल शासन और 'पाठ्यपुस्तक-मुक्त शुक्रवार' जैसे नवाचारों के लिए याद किया जाता है, यद्यपि अवैध निर्माण गिराने और फुटपाथ विक्रेताओं के विरुद्ध की गई दंडात्मक कार्रवाइयों के कारण उन्हें मानवाधिकार संगठनों की आलोचना और विवादों का भी सामना करना पड़ा।

शाह का राजनीतिक कद 2025 के 'जनरेशन जेड' (Gen-Z) आंदोलन के दौरान एक राष्ट्रीय नायक के रूप में उभरा। जनवरी 2026 में मेयर पद से त्यागपत्र देकर वे राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) में सम्मिलित हुए और पार्टी के प्रधानमंत्री पद के चेहरे के रूप में उभरे। झापा-5 निर्वाचन क्षेत्र में उन्होंने चार बार के पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को 49,614 मतों के विशाल अंतर से पराजित कर राजनीतिक विशेषज्ञों को स्तब्ध कर दिया। शाह को 68,348 मत प्राप्त हुए, जो नेपाल के संसदीय इतिहास में किसी भी प्रत्याशी द्वारा प्राप्त सर्वाधिक मत हैं।

उनके कार्यकाल में 'ग्रेटर नेपाल' के मानचित्र को कार्यालय में स्थान देने और भारतीय फिल्मों पर प्रतिबंध लगाने जैसे निर्णयों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कूटनीतिक हलचल पैदा की। संघीय सरकार के प्रशासनिक केंद्र 'सिंह दरबार' के विरुद्ध उनके कड़े तेवर और सोशल मीडिया पर की गई उनकी विवादास्पद टिप्पणियों ने उन्हें एक उग्र जनवादी नेता के रूप में स्थापित किया। प्रधानमंत्री के रूप में उनका निर्वाचन न केवल पारंपरिक राजनीतिक दलों के वर्चस्व को चुनौती है, बल्कि यह नेपाल की युवा पीढ़ी और मधेशी समुदाय की आकांक्षाओं का प्रतिबिंब भी है। टाइम मैगजीन की 'टॉप 100' सूची में स्थान पा चुके शाह का प्रधानमंत्री बनना नेपाल की राजनीति में एक अमूल्य मोड़ सिद्ध हो सकता है।

Ruturaj Ravan

Ruturaj Ravan

यह प्रातःकाल मल्टीमीडिया में वेबसाइट मैनेजर और सोशल मीडिया एक्जीक्यूटिव के रूप में कार्यरत हैं, और पिछले तीन वर्षों से पत्रकारिता व डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इससे पूर्व उन्होंने दैनिक प्रहार में वेबसाइट प्रबंधन और सोशल मीडिया के लिए रचनात्मक कंटेंट निर्माण और रणनीतियों में अनुभव अर्जित किया। इन्होंने कोल्हापुर के छत्रपति शिवाजी महाराज विश्वविद्यालय से स्नातक और हैदराबाद के सत्या इंस्टीट्यूट से उच्च शिक्षा पूरी की। इन्हें SEO मैनेजमेंट, सोशल मीडिया और उससे संबंधित रणनीतियाँ तैयार करने में व्यापक अनुभव है।

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